दंतेवाड़ाः कोरोना के डर से युवक की लाश को बहते नाले में दफनाया गया, गांव वालों ने नहीं दी जमीन

दंतेवाड़ा। कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर लोगों में डर का माहौल इस कदर है कि लोग किसी के मरने पर उसके शव तक को कंधा नहीं देते हैं। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिला के कटेकल्याण का, जहां युवक की सामान्य मौत के बाद भी उसे दफनाने के लिए गांव में जमीन नहीं मिली और न ही परिजनों ने उसकी अर्थी को कंधा तक दिया। मजबूरीवश गांव के पास ही नाले में युवक का अंतिम संस्कार कराया गया।

शव को दफनाने के लिए गांव में नहीं मिली जगह

शव को दफनाने के लिए गांव में नहीं मिली जगह

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर दूर कटेकल्याण ब्लॉक के गांव में गुड़से गांव का मामला है। दरअसल, इस गांव में कोरोना को लेकर लोगों के बीच इतनी दहशत है कि युवक की मौत के बाद गांव की ही मिट्टी में उसे दफनाने के लिए जगह नहीं मिली। वहीं युवक की अर्थी को कंधा देने के लिए न तो परिवार का कोई भी सदस्य आगे आया और न ही कोई ग्रामीण शामिल हुआ।

नाले में दफनाया गया शव

नाले में दफनाया गया शव

जब अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं मिली तो उसके शव को नाले में दफना दिया गया। हालांकि युवकी की मौत सामान्य थी। मृतक की शिनाख्त 22 वर्षीय लखमा के रूप में हुई है, जो पिछले 6 महीने से आंध्र प्रदेश में मिर्ची तोड़ने का काम करता था। बीते 25 मार्च को उसकी आंध्र प्रदेश में ही मौत हो गई। इसके बाद जब लखमा की मौत की खबर ग्रामीणों को लगी तो उन्हें शक हुआ कि लखमा की मौत कोरोना के चलते हुई है।

पहले महुआ के पेड़ के नीचे दफनाया गया था शव

पहले महुआ के पेड़ के नीचे दफनाया गया था शव

गांव के लोगों ने आंध्र प्रदेश में ही अंतिम संस्कार करने को कह दिया। हालांकि, लखमा जिस व्यक्ति के लिए काम करता था, उसने शव गुड़से गांव में भेज दिया। लेकिन गांव वाले भड़क न जाएं, इसलिए दफनाने की तैयारी उन्हीं दो ग्रामीणों ने की, जो आंध्र प्रदेश से शव के साथ गांव लौटे थे। ग्रामीण ने बताया कि आनन-फानन में लखमा का शव महुए के एक पेड़ के नीचे दफना दिया गया, जिस ग्रामीण की जमीन पर वह पेड़ था, वह भड़क गया।

परजिनों को था इस बात का दुख

परजिनों को था इस बात का दुख

इसके बाद दफनाए शव को फिर से निकलवाना पड़ा। आखिरकार उसे गांव में बहने वाले नाले के अंदर गड्ढा खोदकर दफनाना पड़ा। दैनिक भास्कर में छपी खबर के मुताबिक लखमा के परिवार वाले शव घर आने के बाद भी बेटे को आखिरी बार नहीं देख पाए। मृतक लखमा परिवार में सबसे छोटा था।

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