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'सिर पर तिलक लगाने से करते थे मना, कराई जाए CBI जांच', झारखंड के असिस्टेंट प्रोफेसर की मौत पर बड़ा आरोप

तमिलनाडु के कोयंबटूर में असिस्टेंट प्रोफेसर समीर की मौत की खबर से झारखंड के शिक्षक और छात्रों में आक्रोश है। उन्होंने बड़े आरोप लगाए और शव का फिर से पोस्टमार्टम कराने की मांग की है।

तमिलनाडु में असिस्टेंट प्रोफेसर की मौत को लेकर परिजनों ने कोयंबटूर के करुण्य इंस्टीट्यूट (Karunya Institute) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि प्रोफेसर समीर ने उन्हें अपनी कई समस्याएं बताईं थी। परिजम सनातन धर्म के प्रति आस्था और विश्वास प्रोफेसर समीर में था और जब हमारी बात उनसे होती थी तो उनके द्वारा बताया जाता था कि कॉलेज प्रशासन के द्वारा तिलक लगाए जाने का विरोध किया जाता था रांची लोकसभा के सांसद और स्थानीय विधायक प्रोफेसर के परिजनों के समर्थन में हैं।

प्रोफेसर समीर का शव उनके पैतृक शहर झारखंड के बोकारो पहुंचने के बाद परिजनों का रो- रोकर बुरा हाल है। समीर के बहन का कहना है कि उनके भाई इतने कमजोर नहीं थे कि वे आत्महत्या की सोचते। उनकी मौत की वजह कोई बड़ी साजिश है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रोफेसर समीर के परिजनों का कहना है कि उनकी सनातन धर्म के प्रति मजबूत आस्था और विश्वास था।

Tamil Nadu assistant professor of Jharkhand

परिजनों के मुताबिक, समीर ने अपने भाई को ये बताया था कि कॉलेज प्रशासन उनके तिलक लगाने का विरोध करता था। जब समीर ने कॉलेज प्रशासन की बात नहीं मानी तो उन्हें इंस्टिट्यूट के हॉस्टल का वार्डन तक बना दिया गया था। अंतिम बार जब समीर की परिजनों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि हॉस्टल वार्डन का ड्यूटी करना मुझे अच्छा नहीं लगा रहा।

असिस्टेंट प्रोफेसर के परिजनों ने कहा है कि कुछ दिन पहले ही जब अंतिम बार उनसे (समीर) बात हुई तो उन्होंने बताया कि हॉस्टल में नशीले पदार्थों का सेवन और बरामदगी होती रहता है। परिजनों ने कहा कि प्रोफेसर समीर की इन्हीं सभी विषयों को लेकर उसकी हत्या कर दी गई है। अब इसे आत्महत्या का रूप दिया जा रहा है।

समीर फोरेंसिक एक्सपर्ट भी थे। उनकी मौत को लेकर उनके द्वारा पढ़ाए गए छात्रों ने कहा है कि ये आत्महत्या नहीं है। वे अंदर से काफी मजबूत थे। बता दें कि असिस्टेंट प्रोफेसर का घर झारखंड की राजधानी रांची के राज भवन के समीप झारखंड के बोकारो जिला पेटरवार में है।

समीर की मां ने कहा, " समीर की सनातन धर्म में गहरी आस्था और विश्वास था। जब हमारी बात उनसे होती थी तो उनके द्वारा बताया जाता था कि कॉलेज प्रशासन के द्वारा तिलक लगाए जाने का विरोध किया जाता था और उसे इंस्टिट्यूट के हॉस्टल का वार्डन भी बना दिया गया था। जिस दिन उसकी मुझसे अंतिम बार बात हुई तो बताया कि हॉस्टल वार्डन का ड्यूटी करना मुझे अच्छा नहीं लगा। इससे कुछ दिन पहले अपनी बहन को भी बताया था कि हॉस्टल में नशीले पदार्थों का सेवन और बरामदगी होते रहता है इन्हीं सभी विषयों को लेकर उसकी हत्या कर दी गई है और हमें आत्महत्या बताया जा रहा है।"

असिस्टेंट प्रोफेसर की मौत को लेकर रांची लोकसभा सांसद संजय सेठ ने कहा कि मामला पूरी तरीके से संदेहास्पद मौत का लग रहा है और इनके मांग के प्रति हम सभी संवेदनशील हैं। झारखंड सरकार को मामले में तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।

वहीं विरोध में शामिल छात्रों ने कहा कि हमारे प्रोफेसर मौत आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या दिख रही है। मामले को पूरी तरह से डायवर्ट किया जा रहा है। हत्या को इंस्टिट्यूट प्रशासन की ओर से आत्महत्या बताया जा रहा है।

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