Jaunpur News: संभल के बाद अब जौनपुर से बड़ी खबर, 500 साल पुराने पुल में महाकाली की मूर्ति का दावा, टूटेगा पुल?
Jaunpur News: उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में मंदिर मिलने के बाद अब प्रदेश के अलग-अलग हिस्से से बंद पड़े मंदिर के बारे में जानकारियां मिल रही हैं। संभल, वाराणसी और कानपुर के बाद अब जौनपुर से भी ऐसा ही मामला सामने आया है। जौनपुर के पुराना शाही पुल में दीवार के पीछे महाकाली की मूर्ति होने का दावा किया जा रहा है।
शाही पुल के नीचे महाकाली मंदिर होने का दावा मंदिर के पुजारी स्वामी अंबुजानंद और उनके समर्थकों द्वारा किया जा रहा है। पुजारी द्वारा दावा किया जाने के बाद स्थानीय लोगों द्वारा वहां पर पूजा पाठ भी शुरू कर दी गई है। स्थानीय लोगों द्वारा मांग किया जा रहा है कि पत्थर जल्द से जल्द हटाया जाए।

पुजारी द्वारा प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा गया है कि यदि प्रशासन द्वारा दो दिन में दीवार तोड़कर वहां से पत्थर नहीं हटाया जाता है तो हम लोग खुद दीवार को ढहा देंगे और मां काली की मूर्ति का पूजा पाठ शुरू कर देंगे। अब यह मामला धीरे-धीरे तूल पड़ रहा है।
12वीं शताब्दी में मंदिर होने का दावा
दरअसल, स्वामी अंबुजानंद बताया गया कि जौनपुर में गोमती नदी पर शाही पुल बना हुआ है। शाही पुल के निर्माण से चार साड़ी पहले 12वीं शताब्दी में यहां पर महाकाली का मंदिर था। मंदिर में भक्ति नियमित रूप से पूजा पाठ करने के लिए आते थे।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ सालों पहले प्रशासन द्वारा इस मंदिर को दीवार से ढकवा दिया गया। मंदिर को ढक दिए जाने के बाद यहां पर पूजा पाठ करने के लिए आने वाले लोग यहां आना छोड़ दिए। ऐसे में उनकी मांग है की दीवार को तुड़वाया जाए।
उनका कहना है कि दीवार को तोड़ने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा की दीवार के पीछे मंदिर है या नहीं? साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि दीवार के पीछे मूर्ति नहीं मिलेगी तो फिर दीवार का पुनः निर्माण करते हुए उसे बंद कर दिया जाएगा।
उनका कहना है कि यदि दीवार के पीछे मंदिर मिलती है तो वहां पर सनातन धर्म के लोगों को नियमित रूप से पूजा पाठ करने की अनुमति जिला प्रशासन को देनी होगी। वहीं इस बारे में उन्होंने जिला प्रशासन को 2 दिन का अल्टीमेटम भी दिया है।
इधर इस मामले में सिटी मजिस्ट्रेट इंद्र नंदन सिंह का कहना है कि ऐसे किसी मामले की उनको जानकारी नहीं है। कोई भी व्यक्ति ऐसे ही दीवाल नहीं तोड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी को शांति व्यवस्था में खलल डालने की अनुमति नहीं है।













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