India Pakistan Fishermen: मछली पकड़ते हुए पाकिस्तान पहुंचा था जौनपुर का शख्स, अब करांची जेल से आई मौत की खबर
India Pakistan Fishermen: कराची की जेल में बंद जौनपुर के युवक घुरहू बिंद ने वहां मिल रही अमानवीय यातनाओं से तंग आकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह दुखद खबर जब उसके गांव पहुंची तो पूरे इलाके में मातम पसर गया। परिवार की हालत ऐसी हो गई कि हर आंख नम हो गई और गांव के लोग गुस्से और दुख में डूबे हुए हैं।
घटना के बाद मृतक के परिवार के साथ-साथ ग्रामीणों ने भारत सरकार से अपील की है कि कराची जेल में बंद बाकी भारतीय बंदियों को जल्द से जल्द छुड़ाया जाए। घुरहू की मौत के बाद उसकी पत्नी और छह बच्चे बेसहारा हो गए हैं। चार बेटियां और दो बेटे अब पिता की परछाईं के बिना ही जीने को मजबूर हैं।

घटना की जानकारी सबसे पहले कराची जेल में बंद एक अन्य भारतीय कैदी धर्मेंद्र बिंद द्वारा भेजी गई चिट्ठी से हुई। दो पेज के इस पत्र में उन्होंने 'गणेशाय नमः' लिखकर शुरुआत की और फिर ठेठ भाषा में अपने साथी की मौत और जेल की पीड़ा का जिक्र किया।
मछली पकड़ने निकले थे, पहुंच गए पाकिस्तानी जेल
बसिरहा गांव निवासी घुरहू बिंद वर्ष 2021 में काम की तलाश में गुजरात गए थे। ओखा बंदरगाह पर वे मछली पकड़ने का काम कर रहे थे। 8 फरवरी 2022 को उनकी नाव गलती से पाकिस्तान की जल सीमा में पहुंच गई, जिसके बाद पाकिस्तानी रेंजरों ने उन्हें पकड़ लिया और कराची जेल में बंद कर दिया।
उनके साथ पांच और साथी भी पकड़े गए थे। बताया जा रहा है कि पाक जेल में लगातार मारपीट और अमानवीय व्यवहार के कारण घुरहू मानसिक रूप से टूट चुके थे। आखिरकार उन्होंने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया।
परिवार की माली हालत खराब
घुरहू के परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब थी। उनके पास पक्की छत तक नहीं थी और पूरा परिवार टिन की छत के नीचे किसी तरह गुजर-बसर कर रहा था। उनकी पत्नी पार्वती देवी ने बताया कि चार बेटियों में से तीन की शादी हो चुकी है और एक बेटी इंटर की पढ़ाई कर रही है।
दोनों बेटे भी पिता की गिरफ्तारी के बाद आर्थिक संकट के चलते मुंबई में नौकरी करने चले गए थे। अब पिता की मौत ने पूरे परिवार की उम्मीदों को तोड़कर रख दिया है।
छह और युवक अभी भी कराची की जेल में बंद
घुरहू अकेले नहीं थे, जो पाकिस्तान की जेल में यातना झेल रहे थे। उनके साथ मछलीशहर और आसपास के इलाकों के छह अन्य युवक भी 2021 में मछली पकड़ने के लिए गुजरात गए थे। नाव भटकने की वजह से वे पाक जल सीमा में चले गए और वहां की सेना ने उन्हें पकड़ लिया।
इन युवकों में चौबेपुर गांव के राजनाथ बिंद, बसिरहा के विनोद कुमार बिंद, नंदापुर के लालमणि बिंद और सुरेश बिंद, देवरिया के राजनाथ बिंद, भदोही के नीरज बिंद और सुल्तानपुर के अभयराज बिंद शामिल हैं।
आजाद समाज पार्टी ने उठाई आवाज
गांव के लोग अब इन बंदियों की रिहाई के लिए आवाज उठा रहे हैं। आजाद समाज पार्टी के वाराणसी मंडल प्रभारी एस.पी. मानव ने पीड़ित परिवारों को साथ लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात की और गृह मंत्रालय को पत्र भेजने की मांग की।
उन्होंने कहा कि इन गरीबों की सुध लेना सरकार की जिम्मेदारी है। जेल में रह रहे भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाया जाए ताकि और किसी परिवार को घुरहू जैसा गम न झेलना पड़े।
लौटे बंदी ने सुनाई दर्दनाक कहानी
1999 में कराची जेल में बंद रह चुके राजेंद्र बिंद ने बताया कि वहां दी जाने वाली यातनाएं इंसान की सहनशक्ति से बाहर होती हैं। वे भी मछली पकड़ते हुए पकड़े गए थे और 2002 में छूटकर भारत लौटे थे। उन्होंने कहा कि जो दर्द वहां मिला, वह जीवनभर नहीं भूल सकते।
ग्राम प्रधान मृत्युंजय बिंद ने सरकार से तीन प्रमुख मांगें की हैं। पहली, घुरहू के शव का पोस्टमार्टम स्थानीय डॉक्टरों के पैनल से हो। दूसरी, पीड़ित परिवार को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिले। और तीसरी, बाकी बंदियों को सुरक्षा के साथ वापस भारत लाया जाए।












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