बर्फ पिघलते ही खुले पहाड़ी रास्ते और घाटी में घुस आए आतंकी! पहलगाम हमले ने ताजा कर दिए चित्तसिंहपुरा के जख्म

Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को हुआ आतंकवादी हमला एक बार फिर घाटी की शांति को झकझोर गया। जब छुट्टियां बिताने देशभर से आए सैलानी बैसारन की खूबसूरत वादियों में घूम रहे थे, तभी अचानक गोलियों की आवाजें गूंज उठीं और खूनी मंजर ने सबको हैरान कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आतंकियों ने लोगों से उनका धर्म पूछा और उसके बाद उन्हें अपनी बंदूक का निशाना बनाया।

इस हमले में 26 लोगों की जान गई और कई गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हमला तब हुआ जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत दौरे पर हैं, जिससे इस घटना के पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश की आशंका और भी गहरी हो गई है। घटना के बाद देश के शीर्ष स्तर पर हलचल मच गई। इस हमले ने साल 2000 में हुए चित्तसिंहपुरा अटैक की यादें ताजा कर दी हैं।

Pahalgam Terror Attack

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत दिल्ली एयरपोर्ट पर ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। इस भयानक हमले ने न सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है, बल्कि एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है- क्या पाकिस्तान घाटी को एक बार फिर अशांत करने की फिराक में है? क्या यह हमला अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है?
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जम्मू-कश्मीर में सक्रिय हैं 70 विदेशी आतंकी

केंद्रीय सुरक्षा बलों के आंकड़ों के अनुसार, इस समय जम्मू-कश्मीर में करीब 70 विदेशी आतंकी सक्रिय हैं। हाल ही में हिरानगर में डीजीपी नलिन प्रभात के नेतृत्व में एक ऑपरेशन में घुसपैठ की कोशिश नाकाम की गई थी। लेकिन एजेंसियों को शक है कि कुछ आतंकी सफलतापूर्वक घुसपैठ करके छिपे हुए हैं और सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं।

बर्फ पिघलते ही खुले पहाड़ी रास्ते

एक सूत्र के अनुसार अब जब बर्फ पिघल रही है, तो पहाड़ी रास्ते खुल गए हैं। आतंकियों ने इन्हीं रास्तों से उतरकर बैसारन की वादियों में पहुंचे और बेखबर पर्यटकों पर हमला किया। सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन जारी है। NIA की टीम मौके पर जाने को तैयार है और जल्द ही उन स्थानीय मददगारों पर शिकंजा कस सकती है जिन्होंने आतंकियों की मदद की।

2000 की चित्तसिंहपुरा त्रासदी की याद

स्थानीय लोगों को यह हमला साल 2000 की चित्तसिंहपुरा घटना की याद दिला गया, जब बिल क्लिंटन की भारत यात्रा के दौरान 34 सिखों की हत्या कर दी गई थी। इस बार हमला उस समय हुआ जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत दौरे पर हैं।

TRF ने ली जिम्मेदारी, इस्तेमाल हुए खतरनाक हथियार

मंगलवार को हुए इस हमले की जिम्मेदारी TRF (द रेसिस्टेंस फ्रंट) ने ली है। एजेंसियों का मानना है कि TRF, लश्कर-ए-तैयबा का ही एक नया चेहरा है। मौके से M4 राइफल की गोलियां मिली हैं और चश्मदीदों का कहना है कि हमलावरों ने AK-47 और अन्य स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया। कुछ पीड़ितों को दूर से निशाना बनाया गया, जिससे संकेत मिलते हैं कि हमलावरों को स्नाइपर ट्रेनिंग दी गई थी।

अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की आशंका

खुफिया एजेंसियां इस हमले को अमरनाथ यात्रा को बाधित करने की साजिश से भी जोड़कर देख रही हैं। चंदनवाड़ी से निकलने वाली अमरनाथ यात्रा पहलगाम से होकर ही गुजरती है। इससे पहले भी सोनमर्ग टनल पर हमला किया गया था, जो बालटाल रूट पर पड़ता है।

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