उमर अब्दुल्ला का अमित शाह पर पलटवार, कहा-'तय करें कि आतंकवाद के लिए किसे दोषी ठहराया जाए'
Jammu Kashmir Assembly Elections 2024: जम्मू-कश्मीर में एक बड़ी रैली के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने अब्दुल्ला, मुफ्ती और गांधी परिवार पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर क्षेत्र में हिंसा और अशांति फैलाने का आरोप लगाया। शाह ने कहा कि इन परिवारों की सत्ताओं के दौरान, विशेष रूप से कांग्रेस और महबूबा मुफ़्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी के शासनकाल में 35 वर्षों में 40,000 लोगों की जानें गईं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन में आतंकवाद पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण पा लिया गया है और इन परिवारों की कोशिशें अब कभी भी आतंकवाद को दोबारा जीवित नहीं कर पाएंगी।
शाह के आरोपों पर कड़ा प्रहार करते हुए जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने कहा कि भाजपा जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के लिए एनसी और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराती है। जबकि देश के अन्य हिस्सों में वह इसके लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराती है। अब्दुल्ला ने शाह से सवाल किया कि क्या वह स्पष्ट कर सकते हैं कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के लिए वास्तव में जिम्मेदार कौन है। अब्दुल्ला ने भाजपा के इस दोहरे रवैये को उजागर करते हुए कहा कि यदि एनसी और कांग्रेस जिम्मेदार हैं तो पाकिस्तान के साथ बातचीत का क्या मतलब है।
उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति और खासकर युवाओं की दयनीय हालत को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा राज्य के बाहर विभिन्न आरोपों के तहत हिरासत में हैं। उनके बयान ने इस बात पर जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की शिकायतों का समाधान निकालने की जरूरत है। जो राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझे हुए हैं।

शाह ने रैली में सिर्फ़ अतीत की आलोचना नहीं की। बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में हुए परिवर्तन पर भी रोशनी डाली। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने क्षेत्र में आतंकवाद को जड़ से मिटा दिया है और यह बदलाव अब्दुल्ला, मुफ्ती और गांधी परिवार के शासनकाल में हुई हिंसा के विपरीत है।
अमित शाह और उमर अब्दुल्ला के बीच ये बयानबाजी जम्मू-कश्मीर में जारी राजनीतिक संघर्ष को दर्शाती है। जहां अमित शाह क्षेत्र में आतंकवाद के खात्मे का श्रेय मोदी सरकार को देते हैं। वहीं अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के असली मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की मांग कर रहे हैं। इन राजनीतिक मतभेदों के बीच जनता की मांग है कि उनकी समस्याओं का ठोस समाधान किया जाए। जो इन वाद-विवाद से इतर हैं।












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