New Parliament inauguration: 'बचपना कर रहा है विपक्ष', पीएम मोदी के समर्थन में उतरे J&K के नेता
नए संसद भवन के उद्घाटन के मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर के कई नेता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया है। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर विपक्ष का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण और बचकाना है।

जम्मू-कश्मीर के कई राजनीतिक नेता और ऐक्टिविस्ट नए संसद भवन के उद्घाटन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में उतर गए हैं। इन्होंने इस कार्यक्रम के बहिष्कार के कुछ विपक्षी दलों की मुहिम की भी खिंचाई की हैं और उनके फैसले को 'बचकाना और तुच्छ' तक कहा है। सबसे बड़ी बात है कि इस उद्घाटन समारोह का समर्थन करने वालों में गुलाम नबी आजाद की पार्टी के प्रवक्ता भी शामिल हैं।

'70 वर्षों में हमें ऐसी लीडरशिप नहीं मिली है'
इस मसले पर न्यूज एजेंसी एएनआई से सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता आदिल हुसैन ने कहा है कि संसद की नई इमारत लोकतंत्र का मंदिर है और यह विपक्ष समेत सबके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा, 'संसद की नई इमारत लोकतंत्र का मंदिर है। यह हम सबके लिए बहुत ही गौरव की बात है, विपक्ष समेत सभी भारतीयों के लिए। पिछले 70 वर्षों में हमें ऐसी लीडरशिप नहीं मिली है।'

'दुनिया में प्रधानमंत्री मोदी की रेटिंग 78 है और बाइडेन की 43'
उन्होंने कहा कि 'अगर आप दुनिया भर की रेटिंग देखें तो प्रधानमंत्री मोदी की रेटिंग 78 है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का सिर्फ 43 है। विपक्ष ने मुद्दे उठाए हैं, लेकिन, हम नहीं समझते कि यह इतना बड़ा मुद्दा है। इसपर राजनीति नहीं होनी चाहिए।'

विपक्ष का रवैया बच्चों वाला- आजाद की पार्टी के प्रवक्ता
वहीं पूर्व कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के प्रवक्ता फिरदौस ने कहा, 'यह इतना बड़ा मुद्दा नहीं है, जिस तरह से विपक्ष दिखा रहा है। विपक्षी दलों का पूरी तरह से बच्चों वाला रवैया है। इस नए संसद भवन का एक विजन है। पीएम मोदी से इस पार्लियामेंट बिल्डिंग का उद्घाटन कराना, बड़ी पहल है। इसे एजेंडा नहीं बनाया जाना चाहिए।'

Recommended Video
'प्रधानमंत्री का अपमान सही नहीं है'
उन्होंने कहा कि उद्घाटन का खुले दिल से स्वागत किया जाना चाहिए और बहिष्कार करके प्रधानमंत्री का अपमान करना सही नहीं है। उन्होंने कहा, 'पार्टी प्रवक्ता के रूप में मुझे लगता है कि उद्घाटन का खुले दिल से स्वागत होना चाहिए। आखिरकार, वह हमारे प्रधानमंत्री हैं। प्रधानमंत्री का अपमान सही नहीं है। निश्चित रूप से हमें इसका स्वागत करना चाहिए। पहले भी राजीव गांधी समेत प्रधानमंत्रियों ने संसद में इमारतों का उद्घाटन किया है। यह कोई नई बात नहीं है।'

यह पीएम मोदी के समर्पण और जुनून से ही संभव हुआ- श्रीनगर के मेयर
श्रीनगर नगर निगम के मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने कहा, 'यह बहुत ही तुच्छ मुद्दा है। देश के लोग इन छोटी बातों में दिलचस्पी नहीं रखते। लोकतंत्र के मंदिर के उद्घाटन का अधिकार प्रधानमंत्री को है। वह लोगों के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। यह प्रोजेक्ट पीएम मोदी के समर्पण और जुनून से ही संभव हुआ है।'

'इसपर हो रही राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है'
मट्टू ने कहा, 'विपक्ष का बीजेपी और सरकार के साथ कई मुद्दा हो सकता है, लेकिन ऐसी तुच्छ चीजों पर समय नहीं बर्बाद करना चाहिए। अदालतों को ऐसे मामलों पर अपना समय नहीं खराब करना चाहिए। तथ्य यह है कि इसपर राजनीति हो रही है, जो कि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। नई संसद के उद्घाटन पर हम सबको उत्सव मनाना चाहिए।'

नई संसद के उद्घाटन के बहिष्कार करने वाले 21 दलों में जम्मू-कश्मीर की नेशनल कांफ्रेंस भी शामिल है। विपक्ष का आरोप है कि बिना राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के उद्घाटन कराना, 'राष्ट्रपति का अपमान है और संविधान की भावना के खिलाफ है।' वैसे सत्ताधारी एनडीए समेत 25 राजनीतिक दल इस कार्यक्रम में शामिल होने की पुष्टि कर चुके हैं, जिसमें कई विपक्षी दल भी शामिल हैं।












Click it and Unblock the Notifications