J&K: बुरी फंसी सैकड़ों पाकिस्तानी महिलाएं, इस वजह से मुल्क लौटना भी हुआ मुश्किल
श्रीनगर, 3 अगस्त: पाकिस्तान में शादी करके भारत आईं सैकड़ों पाकिस्तानी महिलाएं इस वक्त अजीब मुसीबत में फंसी हुई हैं। ये महिलाएं पूर्व कश्मीरी आतंकियों की बीवियां हैं, जो कई कारणों से अब वापस पाकिस्तान या नियंत्रण रेखा के उसपार लौटना चाहती हैं। इन सबको भारत आने का मौका तब मिला था, जब उमर अब्दुल्ला के मुख्यमंत्री रहते हुए पूर्व आतंकियों को कश्मीर लौटने का मौका दिया गया था। लेकिन, बाद में कई कारणों से ये पाकिस्तानी महिलाएं अपने भारतीय पतियों से अलग हो गईं। ये महिलाएं अब पाकिस्तान या नियंत्रण रेखा पार लौटना चाहती हैं तो कानून आड़े आ रहा है।
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हिरासत में ली गईं पाकिस्तानी महिलाएं
सोमवार को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कई पाकिस्तानी महिलाओं को नियंत्रण रेखा (एलओसी) की ओर मार्च करने की कोशिश करते हुए हिरासत में ले लिया। ये महिलाएं उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले में उरी के पास नियंत्रण रेखा (एलओसी) को पार करना चाहती थीं। दअरसल, इन पाकिस्तानी महिलाएं ने पूर्व कश्मीरी आतंकियों के साथ निकाह किया था। लेकिन, अब अपने मुल्क वापस लौटने के लिए बेचैन हो चुकी हैं और उसी कोशिश में सोमवार को उन्होंने बैनर-पोस्टर के साथ नियंत्रण रेखा की ओर कूच करना शुरू किया था। बारामूला के सीनियर सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस मोहम्मद रईस भट ने ईटी को बताया कि,'हमने करीब 15 महिलाओं को हिरासत में लिया है और उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा।' इन महिलाओं के साथ तीन बच्चे भी देर शाम तक पुलिस हिरासत में थे।

भारतीय नागरिकता की कोशिश नाकाम- प्रदर्शनकारी
विरोध प्रदर्शन के दौरान इन महिलाओं के हाथ में जो बैनर थे, उसमें लिखा था कि वे पाकिस्तान से आई थीं और अब उन्हें अपने परिवार वालों से मिलने की इजाजत दी जानी चाहिए। उनके बैनर में लिखा था, 'हम भारत और पाकिस्तान दोनों से अपील करते हैं कि हमारी शिकायतों का निदान करें.....हम अपने देश वापस जाना चाहते हैं। ' कश्मीर में रह रहीं इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें वापस निर्वासित किया जाए, क्योंकि भारतीय नागरिकता पाने की उनकी बार-बार की कोशिशें नाकाम रही हैं।

पाकिस्तान से कैसे आईं भारत ?
दरअसल, नियंत्रण रेखा के उसपार के इलाकों और पाकिस्तान की रहने वाली 350 से ज्यादा महिलाओं ने कश्मीरी पुरुषों के साथ तब निकाह किया था, जब वे 1990 के दशक और 2000 के दशक की शुरुआत में आतंकवाद के मकसद से आर्म्स की ट्रेनिंग लेने के लिए सीमा पार गए थे और 2010 में वापस कश्मीर लौट आए थे। पूर्व कश्मीरी आतंकियों को पाकिस्तानी बीवियों और बच्चों के साथ घाटी लौटने का मौका उमर अब्दुल्ला की सरकार के दौरान दिया गया था। जानकारी के मुताबिक यहां आने के बाद अधिकतर पाकिस्तानी महिलाओं के सामने संकट इस वजह से आ गया कि उनके पतियों ने या तो उन्हें तलाक दे दिया या फिर कुछ मामलों में पूर्व आतंकियों के परिवार वालों ने उन्हें अपनी संपत्ति से ही वंचित कर दिया। (ऊपर की तस्वीरें- सोशल मीडिया वीडियो ग्रैब से)

उमर अब्दुल्ला सरकार की क्या थी नीति ?
जब जम्मू-कश्मीर में 2010 में उमर अब्दुल्ला की अगुवाई वाली सरकार थी, तब 1989 से 2009 के बीच नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तान गए हुए लोगों की वापसी और पुनर्वास के लिए एक नीति बनाई गई थी। नीति के मुताबिक यह योजना सिर्फ उन लोगों के लिए थी, जिन्होंने कभी भी आतंकवाद में 'सक्रिय' रूप से हिस्सा नहीं लिया था। उनसे कहा गया था कि वे नेपाल के रास्ते कश्मीर वापस आएं, जो कि इस नीति का लाभ उठाने के लिए अनाधिकृत रूट था।












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