'सरकार को JK पुनर्गठन अधिनियम में संशोधन नहीं करना चाहिए', उमर अब्दुल्ला ने उठाए सवाल
Omar Abdullah jammu kashmir Reorganization Act: उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित होने पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में संशोधन नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष ने पुलवामा में मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस बिल पर दो मुद्दों पर हमारी आपत्तियां हैं। पहला यह कि सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्गठन पर अपना फैसला नहीं सुनाया है और सरकार बदलाव पर बदलाव ला रहे हैं।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पार्टी की दूसरी आपत्ति नामांकन के जरिए विधानसभा सीटें भरने पर है। यह निर्वाचित सरकार के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए। विधेयक एलजी को नामांकन का अधिकार देता है। यह स्पष्ट रूप से संदेह पैदा करता है कि यह भाजपा की मदद करने के लिए किया जा रहा है क्योंकि भाजपा चुनाव नहीं जीत सकती है।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) द्वारा संशोधन विधेयक को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाने पर विचार करने के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी पहले ही जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दे चुकी है।
'हमें अदालत जाने की कोई जरूरत नहीं है'
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह मामला अदालत के समक्ष लंबित है। जब हमने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर में लाए गए बदलावों के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया, तो पीडीपी चुप रही। हमारा मामला पहले से ही अदालत में है। अगर पीडीपी अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहती है तो वे जा सकती हैं। फिलहाल हमें अदालत जाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि हमारा मामला पहले से ही अदालत में है।
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