गुलाम नबी आजाद ने फिर की मोदी सरकार की तारीफ, कहा- कश्मीर में हड़ताल और पत्थरबाजी खत्म हुई
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने राजौरी हमले पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि केंद्र के एक्शन के अलावा जम्मू कश्मीर की जनता को भी जाकरूक करना होगा।

राजौरी (Rajouri) आतंकी हमले में जवानों की शहादत पर जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) के पूर्व मुख्यमंत्री व डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी प्रमुख गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा जवानों, सुरक्षा बलों और पुलिस सख्ती के बावजूद राजौरी की घटना चिंता का विषय है। हालिया घटनाओं से इतर उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से जम्मू कश्मीर से आतंकवाद (Terrorism)को खत्म करने को लेकर लिए गए अहम प्रयासों की प्रशंसा भी की।
डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (Democratic Progressive Azad Party) ने चीफ मीडिया के सवालों को जवाब देते हुए कहा कि बाकी इस सरकार की चाहे बाकी कई खामिया रहीं, 370 खत्म किया। ऐसे कई चीजें हैं, जो केंद्रीय सरकार को नहीं करनी चाहिए थी, ये जनता के हित में नहीं हैं। लेकिन जम्मू कश्मीर में एक अच्छी चीज हुई कि थी कि आतंकवाद खतम हो गया, हड़तालें खत्म हुई, पत्थरबाजी खत्म हुई।
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जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम ने कहा कि इस साल जनवरी से लेकर अब तक राजौरी और पुंछ में हुई घटानएं जांच का विषय हैं। उन्होंने कहा राजौरी, पुंछ में कोई घाटी में उतनी खराब स्थिति नहीं है, जितनि कि उधमपुर और कठुआ में है। यहां आर्मी की मौजूदगी लंबे समय से रही है। इसके बावजूद ये घटनाएं हो रही हैं, जो कि चिंता विषय है और पूरा विश्वास है कि जल्द इस पर नियंत्रण पा लिया जाएगा। डीपीएपी चीफ ने कहा कि जिस तरह से रक्षा मंत्री घटना के बाद राजौरी पहुंचे इससे सरकार की समाधान के प्रति गंभीरता को दिखती है।
गुलाम नबी आजाद ने कहा, "कल रक्षा मंत्री कल आए और यहां कुछ शहीदों के परिवारों से भी मिले। बढ़ते हुए आतंकवाद को लेकर आर्मी, इंटेलिजेंश के अलावा जम्मू कश्मीर की जनता को भी जागरूक होना है। सबको सतर्क होने की जरूरत है। जितना आतंकवाद होगा उसका सबसे ज्यादा नुकसान जनता को होगा। जनता, आर्मी और इंटेलिजेंस को मिलकर काम करना करना है। आतंकवाद किसी के हक में नहीं है। इससे लोग गुरबत और जहालत की तरफ जाते हैं। पिछड़े हो जाते हैं। आतंकवाद ना दुनिया के कोने ना हमारे हित में है।"
पूर्व सीएम आजाद ने जम्मू कश्मीर के उस दशक की याद दिलाई जब वहां आतंकवाद प्रभावी नहीं था। आजद ने कहा, "जब तक आतंकवाद 30 से 35 साल पहले यहां नहीं था, पर्यटक बहुत आते थे। अब पिछले 2 साल से फिर पर्यटक यहां आने लगे हैं। पर्यटक ना आने से हम कितने गरीब हुए कंगाल हुए, ये जम्मू कश्मीर की जनता जानती है।"
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