The Great Grand Superhero Review: दिल से बने सुपरहीरो, जैकी श्रॉफ की फिल्म इमोशनल कर देगी, पढ़ें रिव्यू
फिल्म: द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो (The Great Grand Superhero)
स्टारकास्ट: जैकी श्रॉफ, मिहिर गोडबोले, सहर्ष शुक्ला, प्रतीक बब्बर
डायरेक्टर: मनीष सैनी
रनटाइम: 1 घंटा 52 मिनट
स्टार- 3 (***)
The Great Grand Superhero Review: सुपरहीरो का नाम सुनते ही दिमाग में बड़ी-बड़ी इमारतों से छलांग लगाते, आसमान में उड़ते और दुश्मनों को धूल चटाते किरदार सामने आ जाते हैं। फिर एक सवाल मन में आता है कि क्या सुपरहीरो सिर्फ वही होता है जिसके पास सिक्स पैक हो, भारी-भरकम ताकत हो और स्क्रीन पर VFX का तूफान चलता हो? जैकी श्रॉफ (Jackie Shroff) की नई फिल्म 'द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो', इसी सोच को पूरी तरह बदल देती है।

फिल्म 'द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो' हुई रिलीज
आपको बता दें कि जैकी श्रॉफ स्टारर फिल्म 'द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो' आज यानी 29 मई 2026 (शुक्रवार) को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। ये फिल्म सिर्फ एंटरटेन नहीं करती बल्कि आपको आपके बचपन में वापस ले जाती है।
बच्चों और फैमिली ऑडियंस के लिए परफेक्ट फिल्म
इस फिल्म में इमोशन है, परिवार है, दोस्ती है और जिंदगी से जुड़े ऐसे छोटे-छोटे सबक हैं जो दिल को छू जाते हैं। लंबे समय बाद बच्चों और फैमिली ऑडियंस के लिए ऐसी फिल्म आई है जिसे साथ बैठकर देखा जा सकता है।
क्या है फिल्म 'द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो' की कहानी?
-फिल्म 'द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो' की कहानी 11 साल के दीपू के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार मिहिर गोडबोले ने निभाया है। स्कूल में बुलिंग का शिकार होने के बाद दीपू अपने दोस्तों से कह देता है कि उसके दादा एक सुपरहीरो हैं। जब वह ये बात अपने दादा को बताता है, तो दादा भी मुस्कुराते हुए खुद को सुपरहीरो मान लेते हैं।
-क्या सच में वो सुपरहीरो हैं? इसी सवाल का जवाब फिल्म धीरे-धीरे बेहद खूबसूरत तरीके से देती है। कहानी आपको हंसाती भी है, भावुक भी करती है और कई जगहों पर सोचने पर मजबूर भी कर देती है।
क्यों खास है ये फिल्म?
-फिल्म का पहला हिस्सा बेहद मजबूत और दिल को छू लेने वाला है। स्कूल की यादें, बचपन की मासूमियत और शक्तिमान जैसे पुराने सुपरहीरो शोज की फीलिंग आपको लगातार फिल्म से जोड़े रखती है। कई सीन्स इतने रिलेटेबल हैं कि दर्शक खुद को कहानी का हिस्सा महसूस करने लगते हैं।
-हालांकि सेकेंड हाफ में फिल्म थोड़ी अलग दिशा में चली जाती है। यहां एक्शन और लड़ाई वाले हिस्से बढ़ जाते हैं, जिसकी वजह से फिल्म कुछ जगह वीडियो गेम जैसी लगने लगती है। यही वजह है कि फिल्म का दूसरा हिस्सा पहले जितना असरदार महसूस नहीं होता। बावजूद इसके फिल्म अपनी भावनाओं और मैसेज की वजह से अंत तक बांधे रखती है।
सिर्फ मनोरंजन नहीं, बच्चों को सीख भी देती है फिल्म
-इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका मैसेज है। कहानी बेहद हल्के और दिलचस्प अंदाज में बच्चों को प्रकृति, पेड़-पौधों और पढ़ाई की अहमियत समझाती है। फिल्म कहीं भी भारी-भरकम भाषण नहीं देती बल्कि अपनी कहानी के जरिए बहुत कुछ कह जाती है।
-आज के दौर में जहां बच्चों की फिल्मों में सिर्फ चमक-धमक और VFX देखने को मिलता है, वहां येलफिल्म इमोशन और कहानी पर भरोसा करती नजर आती है। यही वजह है कि इसकी छोटी-मोटी कमियां भी ज्यादा खलती नहीं हैं।
फिल्म की स्टारकास्ट और उनकी एक्टिंग
-फिल्म देखने के बाद सबसे ज्यादा असर अगर कोई छोड़ता है तो वो हैं जैकी श्रॉफ। उन्होंने अपने किरदार को इतनी सादगी और ईमानदारी से निभाया है कि दर्शकों को उनसे प्यार हो जाता है।
-असल जिंदगी में अपने बिंदास अंदाज के लिए मशहूर जैकी श्रॉफ यहां बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज, बोलने का तरीका और स्क्रीन प्रेजेंस उन्हें एक असली दादाजी जैसा बना देता है।
-फिल्म में जैकी श्रॉफ के हाथ में हमेशा दिखने वाला पौधा सिर्फ एक प्रॉप नहीं बल्कि फिल्म के मैसेज का अहम हिस्सा बन जाता है। जैकी श्रॉफ ने इस किरदार के जरिए बता दिया कि सुपरहीरो बनने के लिए ताकत नहीं, बड़ा दिल होना जरूरी है।
-दीपू के रोल में मिहिर गोडबोले बेहद शानदार लगे हैं। उनकी मासूमियत और कॉमिक टाइमिंग फिल्म को कई जगह हल्का और मजेदार बनाती है। जैकी श्रॉफ के साथ उनकी बॉन्डिंग फिल्म की जान है।
-वहीं सहर्ष शुक्ला ने एलियन के किरदार को मजेदार और प्यारे अंदाज में निभाया है। छोटे रोल में भाग्यश्री भी स्क्रीन पर काफी खूबसूरत और प्रभावशाली लगती हैं। प्रतीक बब्बर अपने किरदार में ठीक-ठाक असर छोड़ते हैं जबकि बाकी कलाकारों ने भी कहानी को मजबूती देने का काम किया है।
फिल्म का डायरेक्शन और राइटिंग
-इस फिल्म को नेशनल अवॉर्ड विनर मनीष सैनी ने लिखा और डायरेक्ट किया है। उनकी कोशिश साफ नजर आती है कि वो बच्चों के लिए कुछ अलग और दिल से जुड़ी कहानी कहना चाहते थे।
-फिल्म कई जगह शानदार बन पड़ती है लेकिन कुछ सीन्स जरूरत से ज्यादा लंबे और ओवर लगते हैं। अगर सेकेंड हाफ पर थोड़ा और काम किया जाता तो ये फिल्म एक यादगार मास्टरपीस बन सकती थी। खासकर इसलिए क्योंकि इसके ट्रेलर ने दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ा दी थीं।
इस फिल्म को देखें या नहीं?
अगर आप ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं बल्कि दिल को भी छू जाए तो ये फिल्म आपके लिए है। ये बच्चों को पसंद आएगी, बड़ों को अपने बचपन की याद दिलाएगी और परिवार के साथ देखने के लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकती है। फिल्म शायद परफेक्ट नहीं है लेकिन इसकी नीयत बेहद साफ है और यही बात इसे खास बना देती है।













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