धारा 370 पर पाक मंत्री के ब्यान पर भड़के फारूक अब्दुल्ला, कहा-'8 अक्टूबर तक इंतजार करें, सब साफ हो जाएगा'
Jammu Kashmir Assembly Elections 2024: जम्मू-कश्मीर में धारा 370 की बहाली के समर्थन में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन को पाकिस्तान द्वारा दिए गए बयान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के हस्तक्षेप की निंदा की है। यह बयान ऐसे समय में आया है। जब जम्मू-कश्मीर में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली का मुद्दा चर्चा में है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने धारा 370 को बहाल करने का संकल्प लिया है। जिस पर भाजपा लगातार हमलावर रही है। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इस मुद्दे पर बयान देते हुए कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रयासों को समर्थन देने की बात कही थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुझे नहीं पता पाकिस्तान क्या कहता है। मैं पाकिस्तान से नहीं हूं। मैं भारत का नागरिक हूं। अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के हस्तक्षेप को भारत के आंतरिक मामलों में घुसपैठ की कोशिश बताया और इसे सख्ती से खारिज कर दिया।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री द्वारा अनुच्छेद 370 पर कांग्रेस-एनसी गठबंधन के रुख का समर्थन करने पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान का हमसे क्या लेना-देना है। हम पाकिस्तान का हिस्सा भी नहीं हैं। उन्हें अपना ख्याल रखना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि उन्हें हमारे चुनावों में हस्तक्षेप करना चाहिए या हमारे चुनावों पर टिप्पणी करनी चाहिए। हम अपने लोकतंत्र में भाग ले रहे हैं।
आपको बता दें कि पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि धारा 370 की बहाली कश्मीरी लोगों के जख्मों को भरने में मदद कर सकती है। उनके इस बयान को भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल के रूप में देखा जा रहा है। खासकर जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। इस बीच फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर की प्रगति और युवाओं के रोजगार पर जोर देते हुए कहा कि उनका लक्ष्य 100,000 युवाओं को रोजगार देना है। साथ ही विधवाओं और गरीबों को वित्तीय सहायता और आवश्यक वस्तुओं पर सब्सिडी प्रदान करना है।
फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा दिलाने के लिए विपक्षी गठबंधन के प्रयासों पर जोर दिया और कहा कि क्षेत्रीय स्वायत्तता और स्वशासन उनकी प्राथमिकता है। गौरतलब है कि 2019 में मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस लगातार इस फैसले का विरोध कर रही हैं और धारा 370 को बहाल करने की मांग कर रही हैं। उनका मानना है कि यह अनुच्छेद कश्मीरियों की गरिमा और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करता है।
फारूक अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर अपनी आशा व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही इसमें समय लगेगा। लेकिन धारा 370 एक दिन जरूर बहाल होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह लक्ष्य कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से हासिल किया जाएगा। अनुच्छेद 370 की बहाली का समर्थन जम्मू-कश्मीर के लोगों में अपनी विशिष्ट संवैधानिक स्थिति की पुनः स्थापना की गहरी इच्छा को दर्शाता है। हालांकि यह विवादास्पद बना हुआ है।
अनुच्छेद 370 और पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर हुई यह बहस जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक परिदृश्य को और जटिल बना रही है। फारूक अब्दुल्ला जैसे प्रमुख भारतीय नेताओं ने बाहरी हस्तक्षेप को खारिज कर दिया है और ध्यान अब घरेलू चुनावी और कानूनी प्रक्रियाओं पर केंद्रित हो गया है। इन चुनावों और कानूनी चुनौतियों के नतीजे ही अंततः जम्मू-कश्मीर के भविष्य और स्वायत्तता को निर्धारित करेंगे।
जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव आगे बढ़ रहे हैं। क्षेत्र की स्वायत्तता और शासन व्यवस्था पर राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता जा रहा है। यह देखना बाकी है कि धारा 370 की बहाली के लिए कानूनी और राजनीतिक प्रयास कहां तक सफल होंगे और इसका जम्मू-कश्मीर के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा।












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