Earthquake: जम्मू-कश्मीर में कांप उठी धरती, इस बार गोलियों ने नहीं भूकंप ने दहलाया, जानें क्या हुआ हाल?
Jammu Kashmir Earthquake: जम्मू-कश्मीर, जो पिछले कुछ हफ्तों से आतंकवादी हमलों और गोलियों की आवाज से सहमा हुआ है, अब एक नई दहशत की चपेट में आ गया। शनिवार शाम 7:36 बजे, यहां 3.6 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने जमीन को हल्का सा झकझोर दिया लेकिन लोगों के दिलों में बड़ी हलचल पैदा कर दी।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र 9 किलोमीटर की गहराई में था, जिसका अक्षांश 32.96°N और देशांतर 74.71°E था। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी तरह की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं आई। मगर एक ऐसा इलाका, जो पहले से ही सुरक्षा और तनाव के साये में जी रहा है, वहां कुदरत की यह दस्तक लोगों के लिए एक और चिंता बन गई।

हाल के महीनों में बार-बार महसूस हुए झटके
ये पहला मौका नहीं है, जब कश्मीर घाटी और आसपास के इलाके भूकंप से कांपे हैं। इससे पहले मार्च में कारगिल और अप्रैल में पाकिस्तान के पास आए भूकंप के झटके जम्मू-कश्मीर तक महसूस किए गए थे। हिमालय की गोद में बसे इस संवेदनशील इलाके को भूकंपीय जोन IV और V में रखा गया है, जिसका मतलब है कि यहां कभी भी तीव्र झटके आ सकते हैं।
गोलियों के बीच अब प्रकृति भी चेतावनी दे रही है?
जब एक तरफ आतंकवादियों की गोलियों से सुरक्षा बल मोर्चा संभाले हुए हैं, वहीं अब प्रकृति भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या लगातार हो रही हलचलें आने वाले किसी बड़े खतरे की आहट हैं?
सतर्कता की जरूरत
सरकार और प्रशासन भले ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। सुरक्षा अभ्यासों के साथ-साथ अब भूकंप सुरक्षा मॉक ड्रिल की भी जरूरत महसूस की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर, जो हमेशा से ही संघर्ष और चुनौती से भरा रहा है, अब प्रकृति की नई चुनौती से दो-चार हो रहा है। गोलियों की आवाज से थर्राने वाली घाटी अब भूकंप से भी कांपने लगी है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सुरक्षा के साथ-साथ आपदा प्रबंधन और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति भी तैयारियां तेज की जाएं।












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