Jammu-Kashmir Elections: सीट शेयरिंग पर फंसा NC-कांग्रेस का पेंच, किन सीटों को लेकर है खींचतान
जम्मू-कश्मीर में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने गठबंधन कर लिया है, लेकिन वे अभी भी सीट बंटवारे पर बातचीत कर रहे हैं। इसे सुलझाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, सलमान खुर्शीद और भरत सोलंकी को श्रीनगर भेजा है।
सलमान खुर्शीद और भरत सोलंकी से चर्चा के बावजूद सीट बंटवारे पर कोई सहमति नहीं बन पाई है। कल यानी 27 अगस्त को पहले चरण के लिए नामांकन का आखिरी दिन है। हालांकि, केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में लिए गए फैसलों के बावजूद कांग्रेस ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी नहीं की है।

सीट शेयरिंग विवाद
सीट बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों के बीच विवाद ने काफी हलचल मचा दी है। फिलहाल कांग्रेस पहले चरण की 24 सीटों में से 9 या 10 पर चुनाव लड़ सकती है, जिसमें घाटी की चार सीटें शामिल हैं। 2014 में कांग्रेस ने इनमें से दो सीटें; देवसर और शांगस जीती थीं।
तीसरी सीट डुरू विधानसभा सीट है, जहां गुलाम अहमद मीर पीडीपी के सैयद फारूक अहमद अंद्राबी से 161 वोटों से हार गए। चौथी सीट कोकर नाग विधानसभा सीट है, जो वरिष्ठ कांग्रेस नेता पीरजादा मोहम्मद सैयद का गृह क्षेत्र है। 2014 में यहां पीडीपी ने जीत दर्ज की थी, जिसमें अब्दुल रहीम राथर ने 42 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, जबकि कांग्रेस को 34 प्रतिशत वोट मिले थे।
जम्मू सीट समझौता
बाकी सीटें जम्मू की हैं, जिन पर कांग्रेस के चुनाव लड़ने पर नेशनल कॉन्फ्रेंस को कोई आपत्ति नहीं है। उम्मीद है कि सीट बंटवारे को लेकर जल्द ही स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी।
10 साल बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव
जम्मू-कश्मीर में दस साल बाद पहला विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। 90 विधानसभा सीटों के लिए 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को तीन चरणों में मतदान होगा। नतीजे 4 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। पिछले चुनावों में जम्मू-कश्मीर राज्य था, लेकिन अब यह केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। यह बदलाव आगामी चुनावों को एक नया आयाम देता है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच गठबंधन का लक्ष्य इन महत्वपूर्ण चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करना है। हालांकि, सीट बंटवारे पर गतिरोध को सुलझाना उनके संयुक्त अभियान की सफलता के लिए जरूरी है। मिली जानकारी के अनुसार अब्दुला परिवार कांग्रेस पार्टी को कम सीटों पर लड़ने के लिए दबाव बना रहा है। NC ने जम्मू की हिंदू बाहुल्य सीटों पर भी दावा किया है।
दोनों ही पार्टियां नामांकन की अंतिम तिथि से पहले अपने उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। इन वार्ताओं के परिणाम आगे चलकर उनकी चुनावी रणनीति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेंगे।
पिछले एक दशक में जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक परिदृश्य काफी बदल गया है। ये चुनाव दोनों पार्टियों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी क्योंकि वे इस नए परिदृश्य में एक साथ आगे बढ़ेंगे।












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