'मानव रहित वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल', अखनूर एनकाउंटर पर मेजर जनरल ने बताई रणनीति
Akhnoor encounter: जम्मू-कश्मीर के अखनूर इलाके में हुए आतंकवादियों के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान में भारतीय सेना ने अत्याधुनिक तकनीकों और साहस का परिचय दिया। इस अभियान के दौरान मानव रहित वाहन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया गया, जिससे तुरंत और सफल परिणाम हासिल हुए।
भारतीय सेना के मेजर जनरल समीर श्रीवास्तव जीओसी 10 इन्फैंट्री डिवीजन ने मंगलवार को कहा कि जम्मू और कश्मीर के अखनूर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने एक अज्ञात वाहन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया। ऑपरेशन के दौरान तीन आतंकवादी मारे गए हैं।

मेजर जनरल का बयान
मेजर जनरल समीर श्रीवास्तव ने बताया कि इस ऑपरेशन में सेना ने एक आर्मी डॉग भी खो दिया। उन्होंने बताया, "हम सर्च ऑपरेशन कर रहे थे, तब हमारा आर्मी डॉग सबसे आगे था। आतंकवादियों ने उस पर गोलियां चलाईं, लेकिन उसके बलिदान के कारण ही कई सैनिकों की जान बचाई जा सकी।"
इस अभियान में सेना ने कठिन इलाकों में ऑपरेशन के लिए BMP जैसे वाहनों का भी उपयोग किया। मेजर जनरल श्रीवास्तव ने कहा, "अखनूर का इलाका अत्यंत चुनौतीपूर्ण है, जहां 30 डिग्री की ढलान और घने जंगल हैं। ऐसे में आतंकियों की उपस्थिति की पुष्टि होने के बाद हमने खास सैन्य वाहनों का सहारा लिया ताकि हम प्रभावी ढंग से ऑपरेशन को अंजाम दे सकें।"
सेना और पुलिस के बीच तालमेल
मेजर जनरल समीर श्रीवास्तव के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद जम्मू-सांबा-कठुआ रेंज के डीआईजी शिव कुमार शर्मा ने कहा कि वे सेना और पुलिस के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा के साथ एक बार की बैठक सहित कई बैठकें कर रहे हैं। इससे पहले मंगलवार को जम्मू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) जोगिंदर सिंह ने घटना के बारे में जानकारी दी।
सिंह ने कहा, "तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया है और तलाशी अभियान जारी है। जैसे ही हमें सूचना मिली कि आतंकवादी उस स्थान पर हैं, उन्होंने सेना की एंबुलेंस पर गोलीबारी शुरू कर दी। तब यह निश्चित हो गया कि यहां आतंकवादी हैं। पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई। इस अभियान में सेना, पुलिस, एसओजी और अर्धसैनिक बलों ने हिस्सा लिया।"
सेना की एंबुलेंस पर की गोलीबारी
यह आतंकवाद विरोधी अभियान भारतीय सुरक्षा बलों के जवाबी अभियान का हिस्सा था, जिसे 28 अक्टूबर को बटाल इलाके में सेना के काफिले पर आतंकवादियों द्वारा हमला किए जाने के बाद शुरू किया गया था। सुरक्षा बलों के अनुसार आतंकवादियों ने सेना की एंबुलेंस पर गोलीबारी की, जिसके बाद तत्काल जवाबी कार्रवाई की गई। इलाके को तुरंत सील कर दिया गया और तलाशी अभियान शुरू किया गया।
इस अभियान का नेतृत्व भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर ने किया, जिसने चौबीसों घंटे निगरानी के बाद आतंकवादियों को घेर लिया।
मुठभेड़ के बाद सेना की इस कार्रवाई की सराहना हो रही है। सेना ने जिस तकनीकी क्षमता और साहस का परिचय दिया, उससे ना केवल आतंकियों का सफाया संभव हुआ बल्कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का संकल्प भी दोहराया गया है।












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