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Lumpy Skin Disease : राजस्‍थान में 5800 मवेशी मारने वाला लंपी त्वचा रोग क्‍या है? दूध संकट बढ़ने की आशंका

जयपुर, 5 अगस्‍त। राजस्‍थान में लंपी त्वचा रोग कहर बरपा रहा है। गोवंश इसका सबसे ज्‍यादा शिकार हो रहा है। आलम यह है कि 4 अगस्‍त 2022 तक 5 हजार 807 मवेशियों की अकाल मौत हो चुकी है। पूरे प्रदेश में एक लाख 20 हजार 782 मवेशी Lumpy Skin Disease से संक्रमित हो चुके हैं। 94 हजार 222 को उपचार मिल पाया है। 42 हजार 232 ठीक हो चुके हैं। लंपी त्वचा रोग का संक्रमण यूं ही फैलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब राजस्‍थान में दूध संकट बढ़ जाएगा।

राजस्‍थान के 16 जिलों में फैला लंपी त्वचा रोग

राजस्‍थान के 16 जिलों में फैला लंपी त्वचा रोग

राजस्‍थान में लंपी त्‍वचा रोग यानी LSD से मरने वालों मवेशियों में अधिकांश गाय हैं। प्रदेश के 16 जिलों के मवेशियों में लंपी त्‍वचा रोग फैल चुका है। सबसे ज्‍यादा सीमावर्ती जिला बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, जालौर, पाली, सिरोही, चूरू, गंगानगर, हनुमानगढ़, अजमेर, नागौर, जयपुर, सीकर, झुंझुनू और उदयपुर प्रभावित हैं। गंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू जिले में इसका असर कम होने की खबरें हैं। राजस्‍थान पशुपालन विभाग में सचिव पीसी किशन ने गुरुवार को सर्वाधिक प्रभावित जिले बाड़मेर का दौरा कर हालात का जायजा लिया है।

 राजस्‍थान सरकार ने की सहयोग की अपील

राजस्‍थान सरकार ने की सहयोग की अपील

पशुधन में फैल रही इस बीमारी को रोकने के लिए राजस्‍थान की अशोक गहलोत सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। गुरुवार को सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों के गोवंशीय पशुओं में फैल रहे लम्पी स्किन रोग चिंतनीय है। राज्य सरकार गौवंशीय पशुओं के प्रति सजगता एवं संवेदनशीलता बरतते हुए रोग नियंत्रण के सभी संभावित उपाय कर रही है। राज्य के पशुपालकों से धैर्य बनाये रखने एवं गोशाला संचालकों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं से बीमारी के नियंत्रण एवं रोकथाम में राज्य सरकार का सहयोग करने की अपील है। पशुओं में इस रोग के लक्षण दिखाई दें, तो वे अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय में संपर्क करें।

क्‍या है लंपी त्वचा रोग?

क्‍या है लंपी त्वचा रोग?

पशु चिकित्‍सकों के अनुसार संक्रामक रोग को गांठदार चर्म रोग वायरस (एल‍एसडीवी) या लंपी रोग कहा जाता है। यह रक्त चूसने वाले कीड़ों, मक्खियों की कुछ प्रजातियों, दूषित भोजन और पानी के जरिए फैलता है। पशुओं की त्वचा पर छोटी बड़ी गांठ, तेज बुखार, आहार लेने में परेशान, कमजोरी के साथ दूध उत्‍पादन में कमी, त्‍वचा में सूजन और नाक बहना इसके प्रमुख लक्षण हैं।

LSD कहां से आया?

LSD कहां से आया?

लंपी त्‍वचा रोग अफ्रीकी देशों की देन है। 1929 में पहली बार अफ्रीकी देश जाम्बिया में लंपी को देखा गया था। जुलाई 2019 में दक्षिण-पूर्वी एशिया में लंपी का पहला केस रिपोर्ट किया गया था। भारत में पहला केस ओडिशा के मयूरभंज में अगस्त 2019 में मिला। घाना व उसके आस-पास के इलाकों में तो यह बीते 10-15 सालों में महामारी का रूप ले चुका है। इसने अप्रैल में पाकिस्‍तान के रास्‍ते भारत के दस्‍तक दी। अब यह बेकाबू हो रहा है। कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली गायों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है।

लम्‍पी पाक्‍स वैक्‍सीन भारत में नहीं

लम्‍पी पाक्‍स वैक्‍सीन भारत में नहीं

पशु चिकित्‍सक कहते हैं कि पशुओं को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए तीन की वैक्‍सीन होती हैं गोट पाक्स, शीप पाक्स और लंपी पाक्स। बकरियों के लिए गोट पाक्‍स व भेड़ों के लिए शीप पाक्‍स वैक्‍सीन भारत में उपलब्‍ध है। राजस्‍थान के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया के हवाले से खबर है कि लम्पी रोग का टीका भारत में फिलहाल नहीं बन पाया है, लेकिन पशुओं को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए जाने की दवाईंयां दी जा रही हैं।

लंपी स्किन रोग से पशुओं को कैसे बचाएं?

राजस्‍थान और गुजरात में LSD सिर्फ गायों ही नहीं बल्कि बैलों और भैंसों में भी फैल रही है। घावों के देखभाल के लिए स्प्रे इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही, त्वचा संक्रमण और निमोनिया को रोकने के लिए एंटीबायोटिक दवाइयों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। बीमारी से प्रभावित मवेशी की भूख न मरे, उसके लिए एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं को भी उपयोग में लाया जाता है। वैसे इसके उपचार के लिए कोई स्पेशल एंटी-वायरल दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। मवेशियों की अच्छे से देखभाल ही फिलहाल एकमात्र उपाय है।

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