Rajasthan में यूपी के नेता कर रहे कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश, आचार्य प्रमोद के बयान के बाद छिड़ी बहस
Congress को उत्तर प्रदेश में जड़ मूल से खत्म करने वाले यूपी के कुछ नेता पिछले कुछ दिनों से राजस्थान में भी पार्टी को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं। खुद के प्रियंका गांधी का दावा करने वाले यह नेता बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई बार तारीफ कर चुके हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष न बनने देने और उनके गांधी परिवार के साथ संबंधों में दरार डालने की साजिश करने वाले नेताओं में भी यह लोग शामिल बताए जाते हैं। साजिश में असफल होने और प्रियंका गांधी से डांट खाने के बाद भी यह नेता मीडिया में मुख्यमंत्री गहलोत के खिलाफ बयानबाजी कर पार्टी को कमजोर करने में जुटे हैं। वहीं भाजपा को यह नेता ताकत दे रहे हैं। पिछले दिनों जयपुर में एक निजी कार्यक्रम में जयपुर में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सीएम पद को लेकर बयान देकर प्रदेश में नई बहस छेड़ दी है।

उत्तर प्रदेश के नेता रादेश में मुद्दा बनी सीएम गहलोत की योजनाएं
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पुरानी पेंशन बहाली समेत कई योजनाएं जिस तरह से राष्ट्रीय मुद्दा बनी है। उससे बीजेपी चिंता में हैं। क्योंकि देश भर में सरकारी कर्मी इससे प्रभावित हो रहे हैं। पार्टी में राहुल गांधी समेत तमाम नेता भी योजनाओं से खुश हैं। यही नहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अभी अपना एक और बजट पेश करना है। बीजेपी इसी बात से चिंतित है कि कहीं मुख्यमंत्री गहलोत अपने बजट में इस तरह की लोक लुभावनी अन्य योजनाएं ना ले आए। जिससे कांग्रेस की फिर से वापसी की राह आसान हो जाए। इसलिए ऐसी कमजोर कड़ियों को सीएम गहलोत के खिलाफ बयान देने के लिए उकसाया जा रहा है।

सीएम गहलोत को लेकर कांग्रेस हाईकमान का रुख स्पष्ट
ऐसे नेताओं की भाजपा से मिलीभगत की बात इसलिए सामने आती है। क्योंकि यूपी के यह नेता अच्छी तरह जानते हैं कि न तो राहुल गांधी और न हीं अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के मुख्यमंत्री गहलोत को बदलने जा रहे हैं और ना ही किसी नेता पर एक्शन होने जा रहा है। सूत्रों की माने तो राहुल गांधी तो इन यूपी के नेताओं से बात करना तो दूर मिलना भी पसंद नहीं करते। अपने को प्रियंका का करीबी होने का दावा करते हैं। जबकि 2019 में लोकसभा चुनाव में टिकट दिलाने का एक स्टिंग ऑपरेशन सामने आने के बाद में प्रियंका ने भी इनसे दूरी बना ली थी। इस समय यूपी प्रदेश कांग्रेस में इनकी कोई हैसियत नहीं है। यूपी प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए भी इन्होंने बहुत हाथ-पैर मारे थे। लेकिन पार्टी ने कोई भाव नहीं दिए।

सरकार गिराने में असफल होने पर रच रहे षड्यंत्र
सरकार गिराने की कोशिश में नाकाम रहने वाले सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों की बयानबाजी को भी इसी से जोड़कर देख रहे हैं। यूपी के इन नेताओं की सहानुभूति पूरी तरह से सरकार गिराने की कोशिश करने वाले नेताओं के प्रति होना। इस तरह की आशंकाओं को जन्म दे रहा है। क्योंकि यूपी के यह नेता लंबे समय से सचिन पायलट को सीएम बनाने के लिए मुख्यमंत्री गहलोत को कमजोर करने वाले बयान देते आए हैं। बता दें यूपी के यह नेता नब्बे के दशक में गाजियाबाद जिला कांग्रेस में थे। तभी से यूपी में कांग्रेस का पतन होना शुरू हो गया था।

चर्चा में बने रहने के लिए बयानों का सहारा
राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार को गिराने के षड्यंत्र में लगे यह नेता मीडिया में प्रायोजित बयान देकर खुद को चर्चा में बनाए रखना चाहते हैं। मीडिया गहलोत के खिलाफ दिए बयानों को इस तरह चलाता है। जैसे कोई बड़ा पदाधिकारी बयान दे रहा हो। क्योंकि इस तरह के बयानों से कांग्रेस तो कमजोर हो ही रही है। बीजेपी को भी इसका लाभ मिल रहा है। ऐसी चर्चा है कि अगले साल यूपी के इन नेताओं के साथ राजस्थान के गिनती के दो तीन नेता बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। तब तक के लिए इन्हें एजेंडा दिया गया है कि बयानबाजी करते रहे और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को टारगेट पर रखें।












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