राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव परिणामों ने कांग्रेस भाजपा की बढ़ाई चिंता, तीसरा मोर्चा ताकतवर होने का संकेत
जयपुर, 28 अगस्त। राजस्थान में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले छात्र संघ चुनाव में कांग्रेस और भाजपा को आईना दिखा दिया है। प्रदेश के 14 विश्वविद्यालयों और 450 सरकारी कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव हुए। इसमें राजस्थान विश्वविद्यालय सहित अधिकांश विश्वविद्यालय में निर्दलीयों की जीत हुई है। प्रदेश में 14 विश्वविद्यालय में से 7 में निर्दलीय और पांच में एबीवीपी ने जीत दर्ज की है। वही शेखावाटी और जोधपुर में एसएफआई ने कब्जा जमाया है। जोधपुर में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत ने एनएसयूआई को जिताने के भरसक प्रयास किए। उन्होंने स्थानीय नेताओं के साथ इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी। बावजूद इसके प्रदेश में एनएसयूआई का सूपड़ा साफ हो गया है। प्रदेश में युवाओं के नेतृत्व ने दोनों प्रमुख दलों को सीख दी है। राजस्थान में अगले साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में प्रदेश में तीसरे मोर्चे के मजबूत होकर उभरने की संभावनाएं प्रबल दिखाई दे रही है।

कांग्रेस बीजेपी के लिए परिणाम चिंताजनक
राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव ने कांग्रेस और भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। इस बार कांग्रेस से जुड़े संगठन एनएसयूआई और भाजपा से एबीवीपी के मुकाबले निर्दलीय उम्मीदवार दोनों संगठनों पर भारी पड़े हैं। इसे अगर सियासी संदेश माना जाए तो यह कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए चिंता बनाने वाला परिणाम है। प्रदेश में जहां एनएसयूआई का सूपड़ा साफ हो गया है। वही एबीवीपी का दबदबा घटा है और उसे भी ज्यादातर जगह निर्दलीयों से मात मिली है। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया खुद एबीवीपी में प्रदेश मंत्री रह चुके हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ छात्र संघ अध्यक्ष रहने के साथ एबीवीपी से जुड़े रहे हैं।

राजस्थान में अगले साल होने हैं विधानसभा चुनाव
राजस्थान में अगले साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर कांग्रेस और बीजेपी अभी से तैयारी में जुट गए हैं। कांग्रेस पार्टी अभी सरकार में है। पार्टी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के धड़ों में बँटी है। वहीं भाजपा में सीएम फेस को लेकर गुटबाजी है। ऐसे में प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव काफी रोचक होंगे।













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