जयपुर को बसाने वाले सवाई जयसिंह को बताया बाबर के वंशज का नौकर, विरोध में तेलंगाना विधायक के कविता का ट्वीट

जयपुर, 17 सितम्‍बर। राजस्‍थान की राजधानी जयपुर की स्‍थापना करने वाले पूर्व महाराजा सवाई जयसिंह को मुगल बादशाह बाबर के वंशज मुहम्मद शाह का नौकर लिखे जाने का मामला सामने आया है, जिस पर राज परिवार व लोगों में नाराजगी भी बढ़ती जा रही है। सवाई जयसिंह को मुगलों का नौकर बताने का मामला उज्बेकिस्तान के शहर समरकंद की वेधशाला से जुड़ा है। इस पर तेलंगाना सीएम तेलंगाना की एमएलसी के कलवाकुन्तल कविता ने आपत्ति जताते हुए ट्वीट किया है।

वेधशाला समरकंद उज्बेकिस्तान

वेधशाला समरकंद उज्बेकिस्तान

दरअसल, समरकंद उज्बेकिस्तान के सबसे फेमस शहरों में से एक है। यहां पर वेधशाला बनी हुई है, जिसके बाहर एक शिलालेख पर लिखा है कि 'भारत में 17वीं शताब्दी में राज करने वाले मिर्जा बाबर के पूर्वज मिर्जा उलूग बेग की साइंटिफिक हेरिटेज पर उन्होंने खास ध्यान दिया। बाबर के वंशज मुहम्मद शाह ने 18वीं शताब्दी में महल के नौकर और खगोलविद् सवाई जयसिंह को जयपुर, बनारस में वेधशालाएं बनाने का आदेश दिया। उनमें समरकंद की वेधशाला के उपकरणों की नकल की गई है'

सवाई जयसिंह एस्ट्रोनॉमर के तौर पर भी पहचान रखते थे

सवाई जयसिंह एस्ट्रोनॉमर के तौर पर भी पहचान रखते थे

इधर, हकीकत यह है कि सवाई जयसिंह एस्ट्रोनॉमर के तौर पर भी पहचान रखते थे। देश में जयपुर समेत पांच स्थानों पर बनाई गईं वेधशालाएं उन्‍हीं की देन है। 18 नवंबर 1727 को शतरंज के आकार में बसाए गए जयपुर की सीमा 9 मील की थी, जिसे ब्रह्मांड में नौ ग्रहों के नवनिधि सिद्धांत पर वास्तुकला के आधार पर नौ चौकड़ियों में बसाया गया। जयपुर को पिंकसिटी के नाम से भी जाना जाता है।

उज्बेकिस्तान सरकार के सामने यह मुद्दा रखें और इसमें संशोधन करवाएं

उज्बेकिस्तान सरकार के सामने यह मुद्दा रखें और इसमें संशोधन करवाएं

समरकंद की वेधाशाला के शिलालेख में मानसिंह को मुगलों का नौकर बताने पर सीएम बेटी कलवाकुन्तल कविता ने ट्वीट कर लिखा कि 'ये तस्वीरें एक दोस्त ने भेजी हैं। ये समरकंद वेधशाला की हैं। इसमें हमारे देश की सम्मानित ऐतिहासिक हस्ती को नौकर बताया गया है। मेरा प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से आग्रह है कि वे उज्बेकिस्तान सरकार के सामने यह मुद्दा रखें और इसमें संशोधन करवाएं'

 दीया कुमारी ने भी आपत्ति जताई

दीया कुमारी ने भी आपत्ति जताई

इस संबंध में जयपुर पूर्व राजघराने की सदस्य दीया कुमारी ने भी आपत्ति जताई है। दीया कुमारी ने कहा कि हमारे इतिहास को गलत तरीके से पेश किया गया है। कांग्रेस के शासनकाल से ऐसा होता आया है। कई जगह गलत तरीके से शिलालेख लगे हैं। उन्हें बदलने के लिए केंद्र सरकार प्रयास भी कर रही है। मैंने चिट्ठी भी लिखी है और मुझे पूरा विश्वास है कि इसको बदलकर हटाया जाएगा।

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