सरदार शहर उपचुनाव: कांग्रेस के गढ़ में सेंध मार पाएगी भाजपा, बीजेपी ने बनाए 40 स्टार प्रचारक

Rajasthan में दिवंगत कांग्रेस नेता भंवरलाल शर्मा के निधन के बाद सरदारशहर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है। भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेता अशोक कुमार पींचा और कांग्रेस में भंवरलाल शर्मा के बेटे अनिल शर्मा को प्रत्याशी घोषित किया है। उपचुनाव के लिए नामांकन का गुरुवार को आखिरी दिन है। इसके बाद बीजेपी व कांग्रेस सरदारशहर के रण को जीतने के लिए सियासी मैदान में उतरेगी।

कांग्रेस का गढ़ माना जाता है सरदार शहर

कांग्रेस का गढ़ माना जाता है सरदार शहर

चुनावी आंकड़ों पर गौर करें तो सरदारशहर विधानसभा सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। यही वजह है कि 2013 में मोदी की प्रचंड लहर के बावजूद सरदार शहर सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। ऐसे में बीजेपी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार बीजेपी कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने में कामयाब रहेगी या नहीं। दरअसल इसकी एक वजह यह भी है कि सरदार शहर सीट पर अब तक 15 चुनाव हो चुके हैं। जिनमें से कांग्रेस पार्टी 9 बार इस सीट पर कब्जा कर चुकी है। बीजेपी सिर्फ दो ही बार सरदार शहर सीट पर चुनाव जीत पाई है। ऐसे में बीजेपी के सामने कांग्रेस के किले को भेद पाना आसान काम नहीं होगा। सरदार शहर सीट पर 1951 से लेकर 2018 तक 15 विधानसभा के चुनाव हुए हैं। जिनमें से कांग्रेस पार्टी ने 9 बार जीत दर्ज की है। वहीं बीजेपी को केवल 1980 और 2008 में ही जीत हासिल हो सकी है।

सरदार शहर के छह बार विधायक रहे भंवर लाल शर्मा

सरदार शहर के छह बार विधायक रहे भंवर लाल शर्मा

सरदारशहर सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे चंदनमल बैद चार बार और भंवरलाल शर्मा 6 बार यहां से विधायक रहे। हालांकि भंवर लाल शर्मा चार बार कांग्रेस, एक बार जनता दल और एक बार लोकदल से विधायक रहे हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे भंवरलाल शर्मा पहली बार 1985 में लोक दल के टिकट पर सरदारशहर से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। इसके बाद 1990 में भंवरलाल शर्मा जनता दल के टिकट पर विधायक चुने गए और 1998 में कांग्रेस ज्वाइन करके कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने। जिसके बाद 1998, 2013 और 2018 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। 1967 में आर सिंह निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक बने। हजारीमल जेएनपी के टिकट पर 1976 में विधायक बने और कांग्रेस के नरेंद्र बुडानिया 1993 में इस सीट से विधायक चुने गए। वहीं बीजेपी के अशोक कुमार पींचा 2008 में इस सीट से विधायक चुने गए।

कांग्रेस ने सहानुभूति और बीजेपी ने वरिष्ठता के आधार पर लगाया दांव

कांग्रेस ने सहानुभूति और बीजेपी ने वरिष्ठता के आधार पर लगाया दांव

कांग्रेस पार्टी इस बार भी उपचुनाव में सहानुभूति का कार्ड खेलने की तैयारी कर रही है। इसके लिए कांग्रेस ने दिवंगत विधायक भंवरलाल शर्मा के पुत्र अनिल शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है। वहीं बीजेपी के सामने सहानुभूति कार्ड का जवाब किस प्रकार से दिया जाए। यह बड़ा प्रश्न है। बीजेपी ने वरिष्ठता पर दांव खेला है। हालांकि भाजपा की ओर से दावा किया जा रहा है कि इस बार कांग्रेस का सहानुभूति कार्ड नहीं चल पाएगी। पूरे प्रदेश के साथ-साथ सरदार शहर की जनता में भी कांग्रेस सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी है। हालांकि भाजपा के दावों में कितना दम है। यह चुनाव परिणाम सामने आने पर साफ होगा।

भाजपा ने उपचुनाव के लिए 40 नेताओं को बनाया स्टार प्रचारक

भाजपा ने उपचुनाव के लिए 40 नेताओं को बनाया स्टार प्रचारक

बीजेपी ने सरदार शहर सीट पर उपचुनाव के लिए 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है। सूची में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह, सह प्रभारी विजया रहाटकर, केंद्रीय चुनाव समिति सदस्य ओम माथुर, संगठन महामंत्री चंद्रशेखर सहित अनेक नेताओं को शामिल किया है। बीजेपी की इस सूची में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जयपुर ग्रामीण के सांसद राज्यवर्धन राठौड़ और सीकर सांसद सुमेधानंद सरस्वती का नाम शामिल नहीं है।

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