राइजिंग राजस्थान समिट: एनवक्‍त पर खत्‍म हो गया खाना, कांग्रेस ने वीडियो शेयर उठाए आठ सवाल

Rising Rajasthan Summit Second day: जयपुर में राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का दूसरा दिन चल रहा है। इस कार्यक्रम में 5,000 से ज़्यादा निवेशक, कारोबारी नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। हालांकि, राज्य कांग्रेस ने समिट की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कथित कुप्रबंधन और खामियों को उजागर करते हुए आठ मुद्दे उठाए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 दिसंबर को तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे राजस्थान के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण घटना बताया। सरकार इस शिखर सम्मेलन को राज्य में निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखती है।

Rising Rajasthan Summit Food

कांग्रेस ने उठाए ये 8 सवाल
1 खाना खत्म, मेहमान तरसते रहे
2 अव्यवस्थाओं से निवेशक परेशान रहे
3 विधायक समारोह से बाहर रहे
4 सोनू निगम नाराज़, CM उठकर चले गए
5 राष्ट्रीय झंडे लगाने के क्रम में चूक रही
6 वसुंधरा जी निवेश को लेकर चिंतित थी
7 PM के आने के बाद भी नामी उद्योगपति आए नहीं
8 डेलीगेट्स पार्किंग में उलझे रहे

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) ने सोशल मीडिया के ज़रिए अपना असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने दावा किया कि "राइजिंग राजस्थान समिट हर तरफ़ से फ्लॉप रहा।" उनकी आलोचनाएँ आयोजन के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित थीं।

एक प्रमुख मुद्दा अपर्याप्त भोजन व्यवस्था का था, जिसके कारण मेहमानों को असुविधा हुई। इसके अतिरिक्त, पार्किंग की समस्या पर भी प्रकाश डाला गया क्योंकि प्रतिनिधियों को अपने वाहनों के लिए उपयुक्त स्थान खोजने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

निवेशक अनुभव पर चिंताएं
कांग्रेस ने यह भी कहा कि शिखर सम्मेलन में खराब प्रबंधन के कारण निवेशक नाखुश थे। कथित तौर पर कुछ विधानसभा सदस्यों (विधायकों) ने कार्यक्रम में शामिल न होने का फैसला किया, जिससे शिकायतों की सूची और बढ़ गई।

विवाद का एक और मुद्दा गायक सोनू निगम के साथ कार्यक्रम में किए गए व्यवहार से जुड़ा था। इस बात पर सवाल उठाए गए कि सम्मेलन में भाग लेने के दौरान उनके साथ कैसा व्यवहार किया गया।

झंडा फहराने का विवाद
शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने में कथित गलती को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस ने इस घटना की आलोचना की और इसे आयोजकों की बड़ी चूक बताया।

कांग्रेस ने निवेश की संभावनाओं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की चिंताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या उनकी शंकाओं का राजस्थान में संभावित निवेश पर कोई असर पड़ेगा।

कांग्रेस ने शिखर सम्मेलन में प्रमुख उद्योगपतियों की अनुपस्थिति को भी मुद्दा बनाया। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी के बावजूद ये उद्योगपति इसमें शामिल नहीं हुए, जिससे राजस्थान में निवेश करने में उनकी रुचि पर सवाल उठने लगे।

इन आलोचनाओं के बावजूद सरकार इस शिखर सम्मेलन के ज़रिए निवेश आकर्षित करने को लेकर आशावादी है। उनका मानना ​​है कि यह राज्य में आर्थिक विकास और रोज़गार सृजन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा। तथा निवेश और विकास के केन्द्र के रूप में राजस्थान की क्षमता का जश्न मनाना है।

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