राजस्थान पुलिस ने ISI के लिए जासूसी करने वाले दो युवकों को गिरफ्तार किया, पाकिस्तान भेज रहे थे ये जानकारी

राजस्थान पुलिस ने ISI के लिए जासूसी करने वाले दो युवकों को गिरफ्तार किया, पाकिस्तान भेज रहे थे ये जानकारी

जयपुर, 14 अगस्‍त। राजस्‍थान पुलिस की इंटेलिजेंस विंग ने फिर बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने दो लोगों को कथित रूप से पाकिस्‍तान सामरिक महत्‍व की सूचनाएं भेजने के आरोप में पकड़ा है। आरोपियों की पहचान भीलवाड़ा निवासी नारायण लाल गाडरी और जयपुर के कुलदीप सिंह शेखावत के रूप में हुई है। दोनों आरोपियों से इंटेलिजेंस एजेंसियां पूछताछ कर रही है।

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न्‍यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार नारायण लाल गाडरी पर आरोप है कि उसने पाकिस्‍तान के हैंडलर्स को भारतीय मोबाइल की सिम उपलब्‍ध करवाई ताकि वो सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाकर भारतीय सैनिकों व बॉर्डर इलाके के लोगों को हनीट्रैप के जाल में फंसा सके।

महानिदेशक (इंटेलिजेंस) उमेश मिश्रा ने बताया कि भीलवाड़ा के बेमाली निवासी नारायण लाल गाडरी और कुलदीप सिंह शेखावत को पाली के जैतारण से गिरफ्तार किया गया है। आरोपी दोनों जासूस सोशल मीडिया के माध्यम से निरंतर आईएसआई के संपर्क में थे। जासूस नारायण लाल गाडरी ने आईएसआई को मोबाइल सिम उपलब्ध कराने में मददगार था और सेना से संबंधित गोपनीय सूचना भी भेज रहा था। पाली की शराब की एक दुकान में सेल्समैन का काम करने वाला कुलदीप सिंह शेखावत एक पाकिस्तानी महिला हैंडलर के संपर्क में था।

पुलिस पूछताछ में पता चला कि कुलदीप सिंह शेखावत भारतीय सेना के जवानों से सोशल मीडिया पर दोस्ती करने के बाद उनसे गोपनीय सूचनाएं हासिल करता था और पाकिस्तानी महिला हैंडलर को भेजता था। दोनों को इस काम के पैसे मिल रहे थे. फिलहाल पुलिस इन दोनों जासूसों से पूछताछ में जुटी है। दोनों आरोपी जासूसी करने और अपने पाकिस्तानी आकाओं की मदद करने के एवज में पैसे ले रहे थे।

उनके खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और आईटी अधिनियम, पीटीआई की रिपोर्ट के तहत अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। हाल ही में, जुलाई 2022 में, पाकिस्तान की एक महिला ISI एजेंट को कथित रूप से संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में राजस्थान पुलिस की CID-खुफिया शाखा द्वारा सेना के एक जवान को गिरफ्तार किया गया था।

राजस्थान पुलिस ने सेना के जवान पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 के तहत मामला दर्ज किया। जवान की पहचान पश्चिम बंगाल निवासी शांतिमय राणा के रूप में हुई। वह 2018 से भारतीय सेना से जुड़ा था। महिला ने सेना के सैन्य इंजीनियरिंग विंग से भारतीय कार्यकारी अभियंता बनकर सोशल मीडिया के माध्यम से उससे दोस्ती की।

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