Rajasthan News: लोकसभा में मोदी को जमकर वोट करने वाली जनता विधानसभा चुनाव में वोट क्यों नहीं करती, जानिए वजह

देश के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के पक्ष में भरपूर मतदान करने वाली जनता विधानसभा चुनाव में मोदी के चेहरे पर उतना वोट नहीं करती है। इसके पीछे की वजह भाजपा के शीर्ष नेताओं की क्षेत्रीय क्षत्रपों के दमन की रणनीति है।

narendra modi

Rajasthan News: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जनता लोकसभा चुनाव में तो जमकर वोट करती है। लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा को मोदी के चेहरे पर वोट नहीं मिल पाते हैं। नरेंद्र मोदी के 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में अब तक तकरीबन 57 विधानसभा चुनाव हुए हैं। इनमें से भाजपा ने 28 विधानसभा चुनाव जीते हैं। जबकि भाजपा 29 विधानसभा चुनाव हारी है। राजनीति के जानकारों की मानें तो भाजपा ने इनमें से लगभग 12 राज्यों की विधानसभा में पार्टी ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई है। जबकि अन्य राज्यों में पार्टी अन्य दलों के सहयोग से सरकार बनाने में सफल रही है। राजनीति के जानकार कहते हैं कि पीएम मोदी केंद्र सरकार के लिए तो सशक्त चेहरा हैं। लेकिन राज्यों की क्षेत्रीय राजनीति में क्षेत्रीय क्षत्रपों का प्रभाव रहता है। हर राज्य के अपने मुद्दे और एजेंडा होते हैं। ऐसे में भाजपा नेतृत्व की ज्यादा दखलंदाजी और क्षेत्रीय क्षत्रपों की दरकिनार करने की रणनीति से भाजपा राज्यों में उतना बेहतरीन प्रदर्शन नहीं कर पाती है। वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ कहते हैं कि भारत एक समग्र देश है। पीएम मोदी की कार्यशैली के मुताबिक वे नया नेतृत्व उभरने नहीं देते हैं। यूपी के मुख्यमंत्रियों का नाम अब तक लोगों को अब तक याद हैं। रातों-रात इन्होने मुख्यमंत्री बदले हैं। जैसे नौकरशाही में तब्दीली होती है। वैसे भाजपा में बदलाव होते हैं। यह लोकतंत्र के लिए अच्छी सूचना नहीं है। इसीलिए मोदी जब राज्यों में आते हैं तो कमजोर हो जाते हैं। वे आगे बताते हैं कि मोदी ने अपनी छवि राष्ट्रव्यापी गढ़ दी है। यह बीजेपी की पुरानी शैली रही है। यह लोग राष्ट्रपति शैली में देश को लाना चाहते हैं। लेकिन एक व्यक्ति की ताकत पर उसकी कीमत में बीजेपी राज्यों में कमजोर हो रही है। इसकी कीमत बीजेपी को चुकानी पड़ेगी। कर्नाटक इसका उदाहरण है।

भाजपा में मोदी शाह के दखल से टूट रही परंपरा

भाजपा में केंद्रीय नेताओं द्वारा राज्यों के क्षेत्रीय नेताओं को साथ लेकर चलने की परम्परा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय इस परम्परा को और मजूबती मिली। उन्होंने राज्यों की राजनीति में काबिल नेताओं को तैयार कर उन्हें साथ लेकर चले। लेकिन भाजपा में अब यह परम्परा टूटने के कगार पर है। पार्टी के शीर्ष नेता प्रदेशों के क्षेत्रीय क्षत्रपों को दबा कर रखना चाहते हैं। राजनीति के जानकार बताते हैं कि मौजूदा दौर में भाजपा में केंद्रीय नेताओं द्वारा क्षेत्रीय नेताओं के दमन की नीति अपनाई जा रही है। पार्टी के नेता खुद का वर्चस्व बरकरार रखने के लिए राज्यों में ऐसे नेताओं की फौज खड़ी कर रहे हैं। जिनका स्थानीय राजनीति में बहुत बड़ा वर्चस्व नहीं है। इसके विपरीत जिन नेताओं का जनाधार है। पार्टी उन्हें मुख्य धारा से अलग-थलग कर रही है। यही वजह है कि पार्टी का राज्यों में प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहता है। नारायण बारेठ कहते हैं बीजेपी के नेतृत्व की खामी यह है कि वे गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों को प्रोत्साहित कर आगे ला रहे हैं। जो मंत्री बनाए जाते हैं। उनमे बड़ा हिस्सा उन लोगों का होता जा रहा है। जो राजनीतिक पृष्ठभूमि से नहीं है। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। प्रकाश जावड़ेकर, हर्षवर्धन, रविशंकर प्रसाद ग्रास रुट वर्कर रहे हैं। उनको हटाकर गैर राजनीतिक व्यक्तियों को प्रोत्साहित करना। इससे पार्टी को तात्कालिक फायदा मिल सकता है। लेकिन इससे पार्टी भी कमजोर होगी और लोकतंत्र कमजोर होगा।

इन राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव

देश में इस साल छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव के नजरिए से इन तीनों राज्यों को बड़ा अहम माना जाता है। राजस्थान में 25 लोकसभा सीटें हैं। साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान से भाजपा को 25 में से 25 सीटें मिली थी। साल 2019 के चुनाव में नागौर लोकसभा सीट भाजपा ने आरएलपी से समझौते के तहत जीती थी। इसी तरह मध्यप्रदेश में साल 2019 में लोकसभा की 29 सीटों में 28 सीट पर भाजपा ने जीत हांसिल की थी। एक सीट पर कांग्रेस जीत पाई थी। ऐसे में भाजपा के सामने लोकसभा चुनाव 2024 के नजरिए से इन तीनों राज्यों के विधानसभा चुनाव बड़े अहम हैं। चर्चा है कि इन प्रदेशों में भाजपा पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ना चाह रही है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के पूरे आसार है। यह बात बीजेपी भी जानती है। राजस्थान में भी पार्टी ने प्रदेश के प्रमुख चेहरों को दरकिनार कर चुनाव लड़ा तो राजस्थान में भाजपा की राह आसान नहीं होगी। पार्टी क्षेत्रीय क्षत्रपों को दरकिनार कर चुनाव मैदान में उतरेगी तो पार्टी का कर्नाटक वाला हाल होगा। नारायण बारेठ आगे बताते हैं कि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने किसी क्षेत्रीय नेता को उभरने नहीं दिया है। पार्टी चुनाव को मोदी केंद्रित करना चाहते हैं। यह सुनने में अच्छा लग सकता है। लोग स्थानीय चीजों को देखकर सरकार चुनते हैं। इसलिए इस पैमाने पर बीजेपी को घाटा हो सकता है।

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