Rajasthan News : प्रदेश का सरपंच संघ करेगा मुख्यमंत्री आवास का घेराव, जानिए पूरी रणनीति
प्रदेश में सरपंच संघ द्वारा 20 अप्रैल 2023 से चल रहे आंदोलन को तेज करने का निर्णय किया गया है। सरपंच संघ 3 से 15 मई 2023 को शहीद स्मारक से मुख्यमंत्री आवास तक महारैली एवं मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेगा।

Rajasthan News : राजस्थान में सरपंच संघ द्वारा 20 अप्रैल 2023 से चल रहे आंदोलन को तेज करने का फैसला किया गया है। प्रदेश के 11,000 से ज्यादा सरपंच पंचायती राज संस्थाओं में राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलनरत है। सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर गढ़वाल ने बताया कि राजस्थान सरकार विगत तीन वर्षों से पंचायतीराज संस्थाओं में उनके चुने हुए प्रतिनिधियों को लगातार कमजोर करने का काम कर रही है। राजस्थान की सरकार ने सबसे पहले तो पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव समय पर नहीं करवाएं तथा चुने हुए जनप्रतिनिधियों के स्थान पर अधिकारियों को प्रशासक के रूप में लगाकर हमारे प्रशासनिक तौर पर कुठाराघात किया है। सरपंच संघ की प्रदेश कार्यकारिणी तथा जिला अध्यक्ष द्वारा 4 मई को शहीद स्मारक पर सांकेतिक धरना दिया जाएगा। 2 से 13 मई तक प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालय पर सरपंच संघ के प्रदेश पदाधिकारी के द्वारा विरोध प्रदर्शन एवं सभाएं तथा 3 से 15 मई 2023 को शहीद स्मारक से मुख्यमंत्री आवास तक महारैली एवं मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
वित्त आयोग के अनुदान को अन्य कार्यों में उपयोग ले रही सरकार
सरपंच संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नेमीचंद मीणा ने बताया कि वर्तमान सरकार द्वारा 2022-23 के राज्य वित्त आयोग अनुदान के 2533 करोड रुपए में से एक भी रुपया पंचायती राज संस्थाओं को हस्तांतरित नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2022-23 में केंद्रीय वित्त आयोग द्वारा द्वितीय किस्त के रूप में 1500 करोड़ रुपए का भी विगत 2 माह से राज्य सरकार उपयोग कर रही है। इस तरह पंचायती राज संस्थाओं के 4000 करोड़ रुपए राज्य सरकार अपने अन्य कार्यों के लिए उपयोग कर ग्रामीण आबादी के विकास में बहुत बड़ी बाधा पैदा कर रही है। सरपंच संघ के कार्यकारी अध्यक्ष रोशन अली ने बताया कि ग्राम पंचायतों के वित्तीय हालात बद से बदतर हो गए हैं तथा ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के पास पेयजल योजनाओं और विभिन्न कार्यालयों के बिजली के बिल के भुगतान के लिए भी राशि नहीं है।
केंद्र और राज्य सरकार बजट में कर रहे कटौती
सरपंच संघ के मुख्य प्रवक्ता रफीक पठान ने बताया कि देश की ग्रामीण आबादी को रोजगार उपलब्ध करवाने की सबसे बड़ी महानरेगा योजना का विगत 17 वर्षों से पंचायतीराज संस्थाएं सफल संचालन कर रही है। लेकिन वर्तमान में केंद्र और राज्य दोनों सरकारें लगातार बजट में कटौती कर रही है। ग्रामीण क्षेत्र मैं प्रतिदिन हजारों श्रमिक काम करने के बावजूद ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाने के कारण श्रम राशि से वंचित हो रहे हैं। जिसके संबंध में बार-बार आग्रह के बाद भी कोई निर्णय नहीं किया जा रहा है। सरपंच संघ के प्रदेश महामंत्री शक्ति सिंह रावत ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं पर निर्भर डेढ़ लाख जनप्रतिनिधियों व 20 हजार संविदा कर्मचारियों को मानदेय देने के लिए भी राशि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सरपंचों को जनता की मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति करने में भी बहुत अधिक जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है।












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