Rajasthan News: राजस्थान भाजपा में वरिष्ठ विधायक कैलाश मेघवाल के बयान से सियासी बवंडर, पार्टी ने किया निलंबित
Rajasthan News: राजस्थान में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वरिष्ठ भाजपा नेता और विधायक कैलाश मेघवाल के बयान से सियासी घमासान खड़ा हो गया है। भाजपा प्रदेश में चुनाव को लेकर प्रत्याशियों की सूची जारी करने की तैयारी में जुटी है। इसी बीच विधायक कैलाश मेघवाल ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर आरोप जड़ते हुए पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को हवा दे दी है। मेघवाल ने पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि मेरे राजनीतिक सफर को अनदेखा कर भाजपा पूरी तरह गुटबाजी में लिप्त है। भाजपा ने अर्जुन राम मेघवाल को आगे करने के लिए मुझे उपेक्षित किया है। मेरे साथ अन्याय हो रहा है और मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा। चाहे मुझे किसी भी हद तक जाना पड़े। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा पूरी तरह गुटों में बँटी हुई है। पार्टी में एक गुट वसुंधरा समर्थक है। दूसरा वसुंधरा विरोधी गुट है। मेघवाल ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वसुंधरा गुट के लोगों को चुन-चुन कर बाहर किया गया। उनका महत्व कम किया गया। मेघवाल ने नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, उप नेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया और प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी पर गुटबाजी फैलाने के गंभीर आरोपों जड़े हैं। पार्टी सूत्रों की माने तो कैलाश मेघवाल को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है।
दलित वोट बैंक पर दिखेगा असर
राजस्थान के वरिष्ठ भाजपा नेता और विधायक कैलाश मेघवाल का यह बयान सियासत में गहरे असर छोड़ने वाला है। कैलाश मेघवाल प्रदेश की सियासत में बड़ा दलित चेहरा है। वे जन संघ के जमाने से पार्टी से जुड़े हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के साथ उन्होंने काम किया है और कई बार विधायक और मंत्री रह चुके हैं। साल 2013 की सरकार में वे विधानसभा अध्यक्ष थे। ऐसे में उनके द्वारा पार्टी पर उपेक्षा के आरोप लगाए जाने से भाजपा पर दलित वोट बैंक खिसकने की तलवार लटक गई है। विधायक मेघवाल ने इससे पहले शाहपुरा के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अर्जुन मेघवाल पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखने की बात कही थी। प्रदेश में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले विधायक कैलाश मेघवाल ने पार्टी और शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा कर प्रदेश में सियासी घमासान तेज कर दिया है।

चुनाव से ठीक पहले पार्टी के भीतर बढ़ेगी गुटबाजी
भाजपा का शीर्ष नेतृत्व राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी को एक जाजम पर लाने की तमाम कोशिश कर रहा है। बावजूद इसके प्रदेश में सियासी गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रदेश में मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा द्वारा किया गया प्रयोग अब उनके लिए ही आत्मघाती साबित हो रहा है। प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हो चुके हैं। इससे पार्टी के भीतर गुटबाजी चरम पर आ चुकी है। एकजुट होने की तमाम कोशिशें के बावजूद यह गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। अगले कुछ महीनो में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस सहित अन्य दल भी चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके हैं। भाजपा खुद प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप देने में जुटी है। उससे पहले उठा यह सियासी भंवर प्रदेश भाजपा में गुटबाजी को और बढ़ाएगा और पार्टी को नुकसान पहुंचाएगा।












Click it and Unblock the Notifications