Rajasthan News : महाराष्ट्र संकट पर बोले सीएम गहलोत, कहा "सुप्रीम कोर्ट का फैसला लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत"
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महाराष्ट्र संकट पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत बताया है। सीएम गहलोत ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस फासीवादी ताकते हैं।

Rajasthan News : राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस फासीवादी है। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में सरकार गिराई। राजस्थान में हमारी सरकार बच गई। नहीं तो हमारे साथ भी यही स्थिति होती। लोगों को इन लोगों से खुद को बचाना चाहिए। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महाराष्ट्र की राजनीतिक परिस्थितियों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर यह बात कही।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत
सीएम गहलोत ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस फासीवादी ताकतें हैं। इन लोगों से बचकर रहना चाहिए। ये लोग लोकतंत्र को खत्म करने में लगे हैं। इन्होने कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में सरकारें गिराई हैं। हमारी सरकार बच गई। लोगों को इनसे बचना चाहिए। सीएम गहलोत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है। हमें पब्लिक में जाना पड़ेगा कहने के लिए कि ऐसी ताकतों से बचो आप। ये लोग लोकतंत्र खत्म कर देंगे देश में। वोटों का राज खत्म हो जाएगा। देश में एक पार्टी का शासन होगा। जैसा चाइना और रशिया में है। बार बार मैं आगाह कर रहा हूँ लोगो को।
महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
महाराष्ट्र में चल रहे सियासी संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे गुट को राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह विधायकों की अयोग्यता पर फैसला नहीं लेगा। इसके लिए स्पीकर को जल्द फैसला लेने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया। ऐसे में उनको बहाल नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि व्हिप को पार्टी से अलग करना लोकतंत्र के हिसाब से सही नहीं होगा। पार्टी ही जनता से वोट मांगती है। सिर्फ विधायक यह तय नहीं कर सकते कि व्हिप कौन होगा। उद्धव ठाकरे को पार्टी विधायकों की बैठक में नेता माना गया था। स्पीकर ने शिवसेना के नए व्हिप को मान्यता दे दी। इससे दो नेता और व्हिप हो गए। स्पीकर को स्वतंत्र जांच कर फैसला लेना चाहिए था। गोगावले को व्हिप मान लेना गलत था। क्योंकि इसकी नियुक्ति पार्टी करती है। इसके साथ ही पूरा मामला बड़ी बैंच के पास भेज दिया गया।












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