राजस्थान: झोटवाड़ा में पशु आहार का अत्याधुनिक प्लांट स्थापित करेगी गहलोत सरकार, जानिए पूरी योजना
राजस्थान में गहलोत सरकार पशुपालकों को गुणवत्तापूर्ण पशु आहार की आपूर्ति के लिए झोटवाड़ा में आधुनिक संसाधनों से युक्त 100 मीट्रिक टन का पशु आहार प्लांट स्थापित करेगी।

राजस्थान में गहलोत सरकार पशुपालकों को गुणवत्तापूर्ण पशु आहार की आपूर्ति के लिए झोटवाड़ा में आधुनिक संसाधनों से युक्त 100 मीट्रिक टन का पशु आहार प्लांट स्थापित करेगी। सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रेया गुहा ने कहा कि राजफैड द्वारा पशुपालकों को गुणवत्तापूर्ण पशुआहार की आपूर्ति के लिए आधुनिक संसाधनों से युक्त 100 मीट्रिक टन का पशुआहार प्लान्ट झोटवाड़ा औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजफैड के पशुआहार की अपनी एक विशेष पहचान है। पशुपालकों द्वारा इसकी मांग हमेशा रहती है। गुहा ने बुधवार को झोटवाडा में स्थित राजफैड के पशुआहार प्लान्ट का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि राजफैड का पशुआहार प्लान्ट वर्ष 1971 में स्थापित किया गया था। इस प्लान्ट का अधिकतम कार्य मैनुअल ऑपरेशन से संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आधुनिक प्लान्ट से अधिक मात्रा में पशुआहार का उत्पादन किया जाएगा। ताकि पशुपालकों की मांग को समय पर पूरा किया जा सके। उन्होंने बेहतर मार्केंटिंग करने के भी निर्देश दिए।
प्लांट की डीपीआर तैयार करने के निर्देश
प्रमुख शासन सचिव गुहा ने निर्देश दिए कि प्लान्ट की डीपीआर को शीघ्र तैयार किया जाए। इसकी प्रक्रिया में भी तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि राजफैड का गैस गोदाम रिहायशी इलाके स्थित है। गैस गोदाम को भवानी सिंह रोड़ मार्ग से स्थानान्तरित कर झोटवाडा औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित किया जाए। उन्होंने इस संबंध में कमेटी बनाकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। गुहा ने पशुआहार प्लान्ट में टेस्टिंग लैब, सुरक्षा व्यवस्था, कच्चे माल की प्रक्रिया, पशुआहार बनने से लगाकर अपलोड़िग तक की प्रक्रिया को देखा एवं समझा। उन्होंने खाली पड़े गोदामों को उपयोग लेने एवं पुराने गोदामों का नवीनीकरण करने के भी निर्देश दिए। राजफैड की प्रबंध निदेशक उर्मिला राजोरिया ने कहा कि पशुआहार प्लान्ट को 50 वर्ष से भी अधिक समय हो गया है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन प्लान्ट से लगभग 40-50 मीट्रिक टन पशुआहार का उत्पादन हो रहा है। प्लान्ट पुराना होने के साथ ही पुरानी तकनीक पर आधारित है। इससे उत्पादन में भी लागत ज्यादा आ रही है। राजोरिया ने पशुआहार प्लान्ट की प्रक्रिया से गुहा को अवगत कराया।












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