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Rajasthan Diwas 2022 : जानिए देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान की कहानी, इजराइल से 17 गुणा बड़ा

जयपुर, 30 मार्च। दिल के झरोखे से हवेलियां। पुरखों की याद दिलाते कुएं-बावड़ी और जोहड़। स्थापत्य कला की मिसाल दुर्ग को समेटे राजस्थान का आज स्थापना दिवस है। भारत में क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा राज्य राजस्थान 30 मार्च 1949 को अस्तित्व में आया था। आज 73वें राजस्थान स्थापना दिवस (Rajasthan Diwas 2022) के मौके पर आइए जानते हैं राजस्थान से जुड़े कुछ रोचक तथ्य।

Rajasthan Foundation Day History in hindi

किन देशों से बड़ा है राजस्थान?

- क्षेत्रफल की दृष्टि से देश में पहले मध्य प्रदेश सबसे बड़ा राज्य हुआ करता था। 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से टूटकर छत्तीसगढ़ नया राज्य ​बनने के बाद राजस्थान सबसे बड़ा राज्य बन गया।

-वर्तमान में राजस्थान का कुल क्षेत्रफल 3 लाख 42 हजार 239 वर्ग किलोमीटर है, जो कि भारत के क्षेत्रफल का 10.41 प्रतिशत है।

- क्षेत्रफल के लिहाज से राजस्थान इजराइल से 17 गुणा, श्रीलंका से पांच गुणा, चेकोस्लोवाकिया से तीन गुणा तथा इंग्लैण्ड से दोगुना है। जापान से थोड़ा ही छोटा है।

राजस्थान का नाम कैसे पड़ा?

- छठी सताब्दी के बाद राजस्थानी भू-भाग में राजपूत राज्यों का उदय प्रारंभ हुआ। राजपूत राज्यों की प्रधानता के कारण इसे राजपुताना कहा जाने लगा।

- वैदिक काल में ऋगवेद में राजस्थान को 'ब्रह्मवर्त' तथा रामायण में वाल्मीकि ने राजस्थान प्रदेश को 'मरुकांतर' कहा है।

- राजस्थान शब्द का प्राचीनतम उपयोग 'राजस्थानियादित्य' वि संवत 682 में उत्कीर्ण वसंतगढ़ (सिरोही ) के शिलालेख में मिलता है।

- मुहणोत नैणसी की ख्यात व राजरूपक में राजस्थान शब्द का प्रयोग हुआ है। लेकिन यह शब्द राजपूताना के इस भू-भाग के लिए प्रयोग नहीं हुआ है।

- सन 1800 ई. में आरलैण्ड के निवासी जार्ज थामस ने राजस्थान के इस भाग के लिए 'राजपुताना' की संज्ञा दी। इस बात का उल्लेख विलियम फ्रेंकलिन की पुस्तक "Military Memoirs Of Mr. George Thomas" में आता है।

- कर्नल जेम्स टॉड ने इस राज्य को 'रायथान' कहा क्योंकि स्थानीय साहित्य एवं बोलचाल में राजाओं के निवास के प्रान्त को 'रायथान' कहते थे।

19 वी. सदी में कर्नल जम्स टाॅड ने अपनी पुस्तक 'एनाॅल्स एंड एटीक्विटिज ऑफ राजस्थान' में राजस्थान शब्द का प्रयोग किया। इस पुस्तक का दूसरा नाम 'द सेंट्रल एंड वेस्टर्न राजपूत स्टेट्स ऑफ इंडिया' है।

- 30 मार्च,1949 को चार बड़ी रियासत- जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर एवं बीकानेर का राज्य में विलय होने के बाद वृहत राजस्थान का गठन हुआ। तभी से 30 मार्च को 'राजस्थान दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

पाकिस्तान से लगती है राजस्थान की 1070 किमी सीमा

- राजस्थान की कुल स्थलीय सीमा की लम्बाई 5920 किलोमीटर है। इसमें से 1070 किलोमीटर अन्तर्राष्ट्रीय सीमा है जो पाकिस्तान के साथ लगती है। शेष 4850 किलोमीटर अन्तर्राज्यीय सीमा है। यह पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात के साथ लगती है।

राजस्थान के प्रतीक चिन्ह

-राज्य वृक्ष - खेजड़ी : 5 जून 1988 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर खेजड़ी वृक्ष पर 60 पैसे का डाक टिकट जारी किया गया। खेजड़ी के वृक्ष सर्वाधिक शेखावटी क्षेत्र में देखे जा सकते हैं।

- राज्य पुष्प - रोहिडा का फूल : रोहिडा के फूल को 1983 में राज्य पुष्प घोषित किया गया। इसे 'मरूशोभा' या 'रेगिस्थान का सागवान' भी कहते है। इसका वैज्ञानिक नाम- 'टिको-मेला अंडुलेटा' है।

- राज्य पशु - चिंकारा, ऊँट : चिंकारा को 1981 में राज्य पशु घोषित किया गया। यह 'एन्टीलोप' प्रजाति का एक मुख्य जीव है। इसका वैज्ञानिक नाम गजैला-गजैला है। चिंकारे को छोटा हरिण के उपनाम से भी जाना जाता है। चिकारों के लिए नाहरगढ़ अभ्यारण्य जयपुर प्रसिद्ध है।

-ऊँट- राजस्थान का राज्यपशु (2014 में घोषित)। ऊँट डोमेस्टिक एनिमल के रूप में संरक्षित श्रेणी में और चिंकारा नाॅन डोमेस्टिक एनिमल के रूप में संरक्षित श्रेणी में रखा जाएगा।

- राज्य पक्षी - गोडावण : 1981 में इसे राज्य पक्षी के तौर पर घोषित किया गया। इसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भी कहा जाता है। यह शर्मिला पक्षी है और इसे पाल-मोरडी व सौन-चिडिया भी कहा जाता है। गोडावण को सारंग, कुकना, तुकदर, बडा तिलोर के नाम से भी जाना जाता है। गोडावण पक्षी राजस्थान में जैसलमेर व बाड़मेर अधिक पाया जाता है।

- राज्य गीत - केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश...

इस गीत को सर्वप्रथम उदयपुर की मांगी बाई के द्वारा गया। इस गीत को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बीकानेर की अल्ला जिल्ला बाई के द्वारा गाया गया। अल्ला जिल्ला बाई को राज्य की मरूकोकिला कहते हैं। इस गीत को मांड गायिकी में गाया जाता है।

- राजस्थान का राज्य नृत्य - घूमर : घूमर (केवल महिलाओं द्वारा किया जाने वाला नृत्य) इस राज्य नृत्यों का सिरमौर (मुकुट), राजस्थानी नृत्यों की आत्मा कहा जाता है।

- राज्य शास्त्रीय नृत्य - कत्थक : कत्थक उत्तरी भारत का प्रमुख नृत्य है। इनका मुख्य घराना भारत में लखनऊ है तथा राजस्थान में जयपुर है। कत्थक के जन्मदाता भानू जी महाराज को माना जाता है।

- राजस्थान का राज्य खेल - बास्केटबाॅल : बास्केटबाॅल को राज्य खेल का दर्जा 1948 में दिया गया।

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग

1. चित्तौड़गढ़ दुर्ग : चित्तौड़गढ का किला राज्य के सबसे प्राचीन और प्रमुख किलों में से एक है यह मौर्य कालिन दुर्ग राज्य का प्रथम या प्राचीनतम दुर्ग माना जाता है।

2. अजयमेरू दुर्ग (तारागढ़ अजमेर) : बीठली पहाड़ी पर बना होने के कारण इस दुर्ग को गढ़बीठली के नाम से जाना जाता है। यह गिरी श्रेणी का दुर्ग है। यह दुर्ग पानी के झालरों के लिए प्रसिद्ध है। इस दुर्ग का निर्माण अजमेर नगर के संस्थापक चैहान नरेश अजयराज ने करवाया।

3. तारागढ दुर्ग (बूंदी) : इस दुर्ग का निर्माण देवसिंह हाड़ा/बरसिंह हाड़ा ने करवाया। तारे जैसी आकृति के कारण इस दुर्ग का नाम तारागढ़ पड़ा।
यह दुर्ग 'गर्भ गुंजन तोप' के लिए प्रसिद्ध है।

4. रणथम्भौर दुर्ग (सवाई माधोपुर) : सवाई माधोपुर शहर के निकट स्थित रणथम्भौर दुर्ग अरावली पर्वत की विषम आकृति वाली सात पहाडि़यों से घिरा हुआ एरण दुर्ग है। यह किला यद्यपि एक ऊंचे शिखर पर स्थित है।

5. मेहरानगढ़ दुर्ग (जोधपुर) : राठौड़ों के शौर्य के साक्षी मेहरानगढ़ दुर्ग की नींव मई, 1459 में रखी गई। मेहरानगढ़ दुर्ग चिड़िया-टूक पहाडी पर बना है। मोर जैसी आकृति के कारण यह किला म्यूरघ्वजगढ़ कहलाता है।

6. सोनारगढ़ दुर्ग (जैसलमेर) : इस दुर्ग को उत्तर भड़ किवाड़ कहते हैं।
यह दुर्ग धान्व व गिरी श्रेणी का दुर्ग है। यह दुर्ग त्रिकुट पहाड़ी/ गोहरान पहाड़ी पर बनी है।

8. आमेर दुर्ग-आमेर (जयपुर) : यह गिरी श्रेणी का दुर्ग है। इसका निर्माण 1150 ई. में दुल्हराय कच्छवाह ने करवाया। यह किला मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।

9. जयगढ दुर्ग (जयपुर) : यह दुर्ग चिल्ह का टिला नामक पहाड़ी पर बना हुआ है। इसका निर्माण मिर्जा राजा जययसिंह ने करवाया। लेकिन महलों का निर्माण सवाई जयसिंह ने करवाया। इस दुर्ग में तोप ढ़ालने का कारखाना स्थित है। सवाई जयसिंह निर्मित जयबाण तोप पहाडि़यों पर खडी सबसे बड़ी तोप मानी जाती है।

10. नहारगढ दुर्ग (जयपुर) : इस दुर्ग का निर्माण 1734 में सवाई जयसिंह नें किया। किले के भीतर विद्यमान सुदर्शन कृष्ण मंदिर दुर्ग का पूर्व नाम सूदर्शनगढ़ है। नाहरसिंह भोमिया के नाम पर इस दुर्ग का नहारगढ़ रखा गया।
11. गागरोण दुर्ग (झालावाड़) : झालावाड़ से चार किमी दूरी पर अरावली पर्वतमाला की एक सुदृढ़ चट्टान पर कालीसिन्ध और आहू नदियों के संगम पर बना यह किला जल दुर्ग की श्रेणी में आता है।

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