फर्जी सिग्नेचर कांड में घिरते जा रहे अभिषेक बनर्जी? CID के सामने पेश होने से क्यों डर रहे हैं? फिर मिला नोटिस
West Bengal signature 'Forgery' case (Abhishek Banerjee): पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी अब कथित "फर्जी सिग्नेचर" मामले में जांच एजेंसी CID के रडार पर हैं। मामला इतना गंभीर हो चुका है कि CID ने उन्हें पूछताछ के लिए सोमवार (08 जून) को तीसरी बार नोटिस भेजा है, लेकिन अभिषेक बनर्जी ने फिलहाल पेश होने के लिए और ज्यादा समय मांग लिया है।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वो फिलहाल दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं, ऐसे में वो नहीं आ सकते हैं। अब CID ने उन्हें 09 जून को शाम 5 बजे पेश होने के लिए फिर से नोटिस जारी किया है। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है, बल्कि TMC के अंदरूनी हालात और विधानसभा में लिए गए कुछ अहम फैसलों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

🔷Signature Forgery Case: आखिर क्या है फर्जी सिग्नेचर का आरोप?
पूरा विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) जैसे अहम पदों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इन नियुक्तियों से संबंधित दस्तावेजों में कुछ विधायकों के हस्ताक्षर असली नहीं थे और कथित तौर पर उनके नाम पर फर्जी सिग्नेचर किए गए थे।
जांच एजेंसियों के मुताबिक विधानसभा में जमा किए गए दस्तावेजों में दावा किया गया था कि 06 मई को हुई टीएमसी विधायक दल की बैठक में कई बड़े प्रस्ताव पारित किए गए थे। बाद में कुछ विधायकों ने दावा किया कि या तो वे उस बैठक में मौजूद ही नहीं थे या फिर उनके हस्ताक्षरों का इस्तेमाल गलत तरीके से किया गया। यहीं से यह मामला राजनीतिक विवाद से निकलकर कानूनी जांच का विषय बन गया।
🔷CID Investigation: जांच एजेंसी को अब तक क्या मिला?
सीआईडी अब तक 13 विधायकों के बयान दर्ज कर चुकी है। जांच के दौरान कम से कम तीन विधायकों ने कथित तौर पर दावा किया कि दस्तावेजों में उनके नाम के सामने मौजूद हस्ताक्षर उन्होंने नहीं किए थे।
एक विधायक ने तो यहां तक कहा कि जिस बैठक का जिक्र दस्तावेजों में किया गया है, वह उसमें शामिल ही नहीं हुए थे। इन बयानों के बाद जांच एजेंसी ने मामले को और गंभीरता से लेना शुरू किया। सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह भी देखा जा रहा है कि बैठक से जुड़े रिकॉर्ड, उपस्थिति रजिस्टर और प्रस्ताव पुस्तिका में दर्ज विवरण वास्तविक हैं या नहीं।
🔷How Did The Controversy Start: विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
विवाद तब शुरू हुआ जब अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को जानकारी दी कि विधायक दल की बैठक में कुछ अहम राजनीतिक फैसले लिए गए हैं। इसके बाद मई में संबंधित दस्तावेज विधानसभा को सौंपे गए।
दस्तावेजों के साथ एक उपस्थिति सूची भी जमा की गई, जिसमें दावा किया गया कि बड़ी संख्या में विधायक बैठक में मौजूद थे। हालांकि कुछ दिनों बाद दो विधायकों ने खुलकर इन दावों पर सवाल उठा दिए।
उनका आरोप था कि जिस तारीख की बैठक का जिक्र किया गया है, उस दिन ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने बाद की तारीख में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे, जबकि रिकॉर्ड में उन्हें पहले की बैठक से जोड़कर दिखाया गया। इसी शिकायत के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और फिर सीआईडी ने जांच अपने हाथ में ले ली।
🔷CID Notice To Abhishek Banerjee: अभिषेक को क्यों बुलाया गया?
जांच एजेंसी का मानना है कि मामले के कई अहम दस्तावेज अभिषेक बनर्जी के पास मौजूद हो सकते हैं। इसी वजह से उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया और मूल मीटिंग रेजोल्यूशन बुक भी पेश करने को कहा गया।
सीआईडी की एक टीम उनके कोलकाता स्थित आवास भी पहुंची थी और नया नोटिस सौंपा गया। हालांकि उस समय अभिषेक दिल्ली में विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक में शामिल होने गए हुए थे। इसी कारण उन्होंने फिलहाल पेश होने के लिए ज्यादा समय मांगा है।
🔷Abhishek Banerjee's Response: अभिषेक ने क्या कहा?
अभिषेक बनर्जी ने जांच एजेंसी के नोटिस को स्वीकार करने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि वह कानूनी सलाह लेने के बाद उचित कदम उठाएंगे और यदि जांच में सहयोग की जरूरत होगी तो वह उपस्थित होंगे। साथ ही उन्होंने पूरे मामले को राजनीतिक दबाव की रणनीति बताया।
उनका कहना है कि उन्हें पहले भी अलग-अलग केंद्रीय एजेंसियों ने कई बार पूछताछ के लिए बुलाया था और हर बार उन्होंने जांच में सहयोग किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी दबाव में आने वाले नहीं हैं और अगर जरूरत पड़ी तो कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
🔷Handwriting Experts In Probe: हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स की भी एंट्री
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीआईडी ने हस्तलेखन विशेषज्ञों की भी मदद ली है। विशेषज्ञ यह जांच कर रहे हैं कि विवादित दस्तावेजों में मौजूद हस्ताक्षर वास्तव में संबंधित विधायकों के हैं या नहीं। अगर जांच में जालसाजी या दस्तावेजों में हेरफेर की पुष्टि होती है, तो मामला और गंभीर कानूनी मोड़ ले सकता है।
🔷Political Impact Analysis: TMC के लिए क्यों अहम है यह मामला?
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति पहले से ही अस्थिर दौर से गुजर रही है। पार्टी के भीतर असंतोष, कुछ नेताओं की नाराजगी और लगातार उठ रहे राजनीतिक सवालों के बीच यह मामला TMC के लिए नई चुनौती बन गया है।
अगर जांच आगे बढ़ती है और आरोपों को समर्थन देने वाले सबूत सामने आते हैं, तो इसका असर केवल कुछ नियुक्तियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली, नेतृत्व की विश्वसनीयता और संगठनात्मक एकजुटता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
🔷अब सबकी नजर CID की अगली कार्रवाई पर
फिलहाल अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी के सामने पेश होने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। दूसरी ओर जांच एजेंसी दस्तावेजों, हस्ताक्षरों और विधायकों के बयानों की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहता है या फिर कानूनी रूप से किसी बड़े निष्कर्ष तक पहुंचता है। लेकिन इतना तय है कि बंगाल की राजनीति में "फर्जी सिग्नेचर विवाद" फिलहाल सबसे चर्चित और संवेदनशील मुद्दों में से एक बन चुका है।














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