Rajasthan : कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस विधायकों में असंतोष, दलित वोट बैंक खिसकने का डर
जयपुर, 19 अगस्त। प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस के विधायकों के बगावती तेवरों से पार्टी के भीतर कलर तेज हो रहा है। प्रदेश में एक के बाद एक वीभत्स घटनाओं के कारण दलित वर्ग के विधायकों में बेचैनी बढ़ रही है। अपना वोट बैंक को बचाने के लिए कांग्रेस के विधायक अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ बयान बाजी कर रहे हैं। प्रदेश की कानून व्यवस्था और आपराधिक घटनाओं को लेकर गहलोत सरकार भाजपा के निशाने पर तो है ही। साथ ही कांग्रेस विधायकों ने भी अब अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना शुरू कर दिया है। ऐसे में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर ही कलह तेज हो गया है। प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर गहलोत सरकार बैकफुट पर है।

पार्टी के ही विधायकों ने खोला मोर्चा
राजस्थान की कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस पार्टी के विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। जालौर में दलित छात्र की मौत के बाद बसपा से कांग्रेस में आए मंत्री राजेंद्र गुड्डा और विधायक लाखन सिंह मीणा ने तो सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दे दी। वही बारां जिले के अटरू से विधायक पानाचंद मेघवाल ने जालौर घटना को लेकर अपना इस्तीफा भेज दिया है। पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी जालौर के मामले को लेकर न्याय की मांग की है।हालांकि गहलोत सरकार ने मृतक के परिजनों को मुआवजा औरदोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की घोषणा की है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित पांच मंत्री और आधा दर्जन विधायक जालौर में मृतक छात्र के परिजनों से मुलाकात कर चुके हैं। लेकिन एक जाति वर्ग और क्षेत्र में घटनाओं को लेकर आक्रोश पैदा होने के कारण कांग्रेस के विधायक आमजन के साथ नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि एससी एसटी वोट बैंक के प्रभाव वाली बसपा से विधायक बने राजेंद्र गुढ़ा सहित अन्य विधायक दलितों का मुद्दा आते ही सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा करने लगे है। पूर्वी राजस्थान में दलित वर्ग की राजनीति करने वाले विधायक खिलाड़ी लाल बैरवा सहित अन्य विधायक भी धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, भरतपुर सहित अन्य क्षेत्रों में दलित वोट बैंक के नाराज होने से डरे हुए हैं।

कांग्रेस नेतृत्व तक पहुंचाई अपनी पीड़ा
दलित वोट बैंक खिसकने के डर से खफा विधायकों ने कांग्रेस नेतृत्व तक अपनी पीड़ा पहुंचाई है। उन्हें आशंका है कि यदि दलितों पर अत्याचार के मुद्दे पर कांग्रेस का वोट बैंक खिसक सकता है तो पूर्वी राजस्थान में कांग्रेस को भारी नुकसान हो सकता है। जालौर, सिरोही, बाड़मेर में भी दलित और आदिवासी मतदाताओं में इन घटनाओं से नाराजगी बढ़ी है। यही वजह है कि कांग्रेस विधायक पार्टी संविधान में बंधे होने के कारण विपक्ष की तरह धरने प्रदर्शनों में शामिल नहीं हो सकते। लेकिन अपने बयानों के जरिए प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। आम जनता ने भी दलितों के मामले में चुप्पी साधे विधायकों पर सोशल मीडिया के जरिए हमला बोलना शुरू कर दिया है। ऐसे में कांग्रेस विधायकों के निशाने पर अब पुलिस और प्रशासन की सुस्ती और लापरवाही है। जिसके सहारे वे बातों ही बातों में अपनी ही पार्टी की सरकार को घेर रहे हैं।













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