संत विजयदास की मौत के बाद गरमाई सियासत, भाजपा नेताओं ने गहलोत पर साधा निशाना
जयपुर, 23 जुलाई। राजस्थान के संत विजयदास की मौत के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। गहलोत सरकार पर भाजपा हमलावर हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संत विजयदास के निधन पर शोक जताया है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि संत विजयदास के निधन से उन्हें धक्का लगा है। "राज्य में संतो को आंदोलन करना पड़े। लोकहित की मांगों को मनवाने के लिए संतों को अपनी बलि देनी पड़े। राज्य में इससे बड़ी अराजकता और क्या हो सकती है।" केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। शेखावत ने कहा कि पिछले 550 दिन से ब्रज क्षेत्र के बाबा भगवान कृष्ण की लीला भूमि को बचाने के लिए प्रयास कर रहे थे। आखिरकार उन्हें अपने प्राणों की आहूति देनी पड़ी।

अवैध खनन के खिलाफ था आंदोलन
भरतपुर के पसोपा इलाके में अवैध खनन के खिलाफ कई सालों से आंदोलन चल रहा है। संत विजयदास अपने साथियों के साथ अवैध खनन के खिलाफ धरने पर बैठे थे। सरकार और प्रशासन के आला अधिकारियों ने संतों की बात नहीं सुनी तो संत विजयदास ने खुद को आग के हवाले कर दिया। संत विजयदास को इलाज के लिए भरतपुर के जिला अस्पताल ले जाया गया। यहाँ से उन्हें दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल रैफर कर दिया गया था। जहाँ आज तड़के तीन बजे दम तोड़ दिया। इसके बाद से बीजेपी नेता आक्रोशित होकर गहलोत सरकार पर हमलावर हो गए।
गहलोत सरकार की डेमेज कंट्रोल की कवायद
भरतपुर में अवैध खनन को लेकर संत के आत्मदाह की घटना के बाद गहलोत सरकार तुरंत एक्शन मोड में आ गई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में ब्रज क्षेत्र की विवादित भूमि को सघन वन क्षेत्र घोषित कर अवैध खनन पर तुरंत लगाम लगाने के निर्देश दिए गए। इसके बाद कलेक्टर की मौजूदगी में धरना समाप्त किया गया। भरतपुर कलेक्टर ने सरकार की अनुमति से चल रही खानों को अन्य जगहों पर स्थानांतरित करने की बात कही थी।












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