OPINION: राजस्थान में पीआर के दम पर सत्ता वापसी की तैयारी में अशोक गहलोत, जानिए गहलोत सरकार की पूरी रणनीति
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेशवासियों के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं तो ला ही रहे हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस बात के लिए भी हरसंभव कोशिश कर रहे हैं कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार रिपीट हो। सीएम गहलोत ने हाल ही के कुछ महीनों में प्रदेश में सरकार में वापसी के लिए पीआर का सहारा लिया है। इसके जरिए गहलोत सरकार राज्य की आम जनता तक अपनी योजनाओं की अप्रोच कर रही है। पीआर और ब्रांडिग के जरिए गहलोत सरकार अपनी योजनाओं को आमजन तक पहुंचा रही है। इस कवायद में सीएम गहलोत काफी हद तक कामयाब भी रहे हैं। अब प्रदेश में गहलोत सरकार का कामकाज दिखने लगा हैं। आमजन प्रदेश के गाँवों और शहरों के गली, नुक्क्ड़, चौराहों पर गहलोत सरकार के कामकाज की चर्चा करते नजर आने लगा है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए सीएम गहलोत छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग के मॉडल को राजस्थान में लागू करने जा रही है। सूत्रों की मानें तो सीएम गहलोत के आग्रह पर छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क अधिकारियों को एक टीम को राजस्थान बुलाया गया है। इस टीम ने पिछले हफ्ते जयपुर आकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को छत्तीसगढ़ के पीआर मॉडल का प्रजेंटेशन भी दिया है।
सीएम गहलोत ने छत्तीसगढ़ के अधिकारियों से लिया फीडबैक
राजनीति के जानकार बताते हैं कि जयपुर से गहलोत सरकार के जनसंपर्क अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ के अफसरों से चर्चा कर एग्रेसिव कैंपेनिंग के बारे में अपडेट लिया और आग्रह किया कि वह एक टीम भेजिए। जिससे कैंपेनिंग के बारे में उनसे व्यापक फीडबैक लिया जा सके। राजस्थान सरकार के आमंत्रण पर एक स्मार्ट एडीशनल डायरेक्टर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम को जयपुर भेजा गया। छत्तीसगढ़ से आए अधिकारियों को लगा कि वहां से अधिक डीपीआर, सीपीआर या फिर सीक्रेट जनसंपर्क से मुलाकात होगी। मगर प्रेजेंटेशन के दौरान अचानक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी आ गए। उन्होंने पूछा कि आप लोगों ने कैसे अपनी सरकार और मुख्यमंत्री की इस कदर ब्रांडिंग की है। सीएम गहलोत ने कॉन्फ्रेंस हॉल में तकरीबन आधा घंटा बैठकर पूरा प्रेजेंटेशन देखा और अधिकारियों से फीडबैक लिया। आपको बता दें सोशल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छत्तीसगढ़ सरकार की ब्रांडिंग के लिए काफी काम किया गया है। इससे पहले छत्तीसगढ़ में सोशल मीडिया विज्ञापन की पॉलिसी बनाई गई। पहले प्रिंट के साथ सोशल मीडिया को जोड़कर रखा गया था। अब इसे अलग करते हुए इसके लिए अलग से मद बनाया गया है। इसका सरकार को लाभ मिल रहा है। ऐसा करने से इंस्टाग्राम पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का प्रजेंस एक हजार गुना तक बढ़ गया है। अब राजस्थान में गहलोत सरकार भी इसी पैटर्न पर काम करना चाह रही है।

डिजाइन बॉक्स के सहारे चुनावी रण में उतरने की योजना
राजस्थान में चुनाव नजदीक आने के साथ ही यह भी साफ हो गया है कि प्रदेश में कांग्रेस का चेहरा सीएम अशोक गहलोत ही होंगे। इसी के साथ ही सीएम गहलोत ने साल के अंत में होने जा रहे विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी है। इसके लिए सीएम गहलोत ने इलेक्शन मैनेजमेंट कंपनी डिजाइन बॉक्स को विधानसभा चुनाव प्रचार का जिम्मा सौंपा है। यह कंपनी अभी गहलोत सरकार और मुख्यमंत्री की ब्रांडिग और पीआर का कामकाज देख रही है। राजस्थान के बजट से पहले इसकी प्री बजट टैग लाइन को लेकर खूब चर्चा भी रही। राजनीति के जानकारों की मानें तो गहलोत सरकार ने बचत, राहत, बजट टैग लाइन के साथ बजट का प्रचार डिजाइन बॉक्स के सुझाव पर ही किया था। डिजाइन बॉक्स पहली बार तब सुर्ख़ियों में आई जब कांग्रेस की प्रचार कमेटी ने 2019 में कंपनी को प्रचार की जिम्मेदारी में प्रमुख भूमिका के लिए चुना था। अब डिजाइन बॉक्स मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का पीआर और ब्रांडिंग संभाल रही है।
सीएम गहलोत को पीआर के दम पर वापसी का भरोसा
राजस्थान में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ अशोक गहलोत सरकार सत्ता में वापसी के लिए ज्यादा मेहनत करने लगी है। मुख्यमंत्री जगह-जगह जा रहे हैं और अपनी सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं के पोस्टर ब्वाय बन गए हैं। उनके द्वारा शुरू की गई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पुरानी पेंशन योजना, चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना, स्वास्थ्य का अधिकार सहित कई अन्य योजनाओं के रथ पर सवार होकर सीएम गहलोत नायक बन गए हैं। सीएम गहलोत अपने इस प्रयास और लोक लाभकारी योजनाओं के कारण केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को दबाव में लेते नजर आ रहे हैं। जानकार कहते हैं कि सीएम गहलोत इसी आधार पर बार-बार यह मांग भी उठाते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य का अधिकार और सामाजिक सुरक्षा अधिनियम पारित करें।
देखिए राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की पूरी सूची
https://hindi.oneindia.com/list-of-chief-ministers-of-rajasthan/












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