लॉकडाउन का असर : राजस्थान के हाथी गांव में महावत व 103 हाथियों पर मंडराया रोजी-रोटी का संकट
जयपुर। राजस्थान में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। 11 मई तक 3940 लोग कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। 110 लोगों की मौत हो गई है। बढ़ते संक्रमण रोकने के लिए 17 मई तक देशभर में लॉकडाउन लागू है। हर क्षेत्र पर काफी बुरा असर पड़ रहा है। पर्यटन उद्योग भी इससे अछूता नहीं है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर का हाथी गांव भी लॉकडाउन से खासा प्रभावित हुआ है, क्योंकि हाथी गांव की रोजी-रोटी का सबसे बड़ा जरिया पर्यटक हैं। लॉकडाउन के चलने लोगों ने घूमना-फिरना बंद कर रखा है। वहीं, विदेशों से भी पर्यटकों की आवक बंद है। हाथी मालिक विकास समिति के अध्यक्ष और पूर्व बीजेपी पार्षद अब्दुल अजीज ने मीडिया से बातचीत में बताया कि लॉकडाउन ने महावतों के सामने समस्या खड़ी कर दी है। कोरोना संकट से पहले आमेर का किला देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते थे।
पर्यटक हाथी की सवारी का आनंद उठाते थे, जिससे यहां महावतों के कई परिवारों का जीवन यापन हो रहा था। सरकार भी 600 रुपये प्रति हाथी के हिसाब से देती है, लेकिन खर्चा 3,000 से ज्यादा होता है। अब इनकम शून्य हो गई है। ऐसे में सरकार से ज्यादा मदद की जरूरत है। समिति के अध्यक्ष अब्दुल अजीज का यह भी कहना है कि समिति की ओर से पूरी कोशिश की जा रही है कि हाथियों की खुराक कम ना पड़े। इन हाथियों को गन्ना पसंद है, इसलिए गन्ने से गोदाम भरे हैं और इन्हें भरपेट खाना दिया जाता है। समिति का कहना है कि जब पर्यटन होता है तो कमाई भी होती है, जिससे हाथियों को भी पोषक खुराक मिलती है और महावत का भी घर चलता है।
फिलहाल हाथी गांव में सन्नाटा पसरा पड़ा है। हाथी अपने-अपने कमरों में बंद हैं। महावत घर से बाहर निकल नहीं सकते। घर के छोटे-छोटे बच्चे हाथियों के साथ खेलकर समय बिता रहे हैं। लॉकडाउन ने कई चुनौतियां सामने खड़ी कर दी हैं। सबको सरकारी मदद की दरकार है, ताकि जिंदगी चलती रहे।












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