अलविदा कर्नल : किरोड़ी सिंह बैंसला की शवयात्रा में लगे नारे, 'कर्नल तेरी नेक कमाई, तूने सूती कौम जगाई'
जयपुर, 01 अप्रैल। राजस्थान में दो दशक तक गुर्जर आरक्षण आंदोलन का चेहरा रहे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को शुक्रवार को अंतिम विदाई दी गई। कर्नल बैंसला को आखिरी सैल्यूट करने के लिए हजारों लोग उमड़े। सड़क दोनों तरफ करीब 35 किलोमीटर कतार में लोग खड़े नजर आए।

83 साल की उम्र में कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का निधन
गुर्जर आंदोलन के संयोजक कर्नल किरोड़ी बैंसला लंबे समय से पोस्ट कोविड की समस्या से जूझ रहे थे। गुरुवार को 83 साल की उम्र में कर्नल बैंसला ने जयपुर के एक निजी अस्पताल में आखिरी सांस ली। शुक्रवार को उनके पैतृक गांव मूंडिया (करौली) में उनकी पार्थिव देह लाई गई।

गुर्जर समाज में जगाई चेतना
भारतीय सेना में कर्नल पद से रिटायर होने के बाद सेना से रिटायर होने के बाद किरोड़ी सिंह बैंसला ने रेल पटरियों से आंदोलन की शुरुआत कर गुर्जर समाज को न केवल नई दिशा दी बल्कि चेतना जगाई। शायद यही वजह है कि कर्नल की अंतिम यात्रा में लोगों ने 'कर्नल तेरी नेक कमाई, तूने सूती कौम जगाई' के खूब नारे लगाए।
35 किमी लंबी कतार में खड़े दिखे लोग
कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की पार्थिव देह करौली जिले में उनके स्थित पैतृक गांव मूंडिया ले जाई गई। रास्ते में दौसा जिला मुख्यालय से मानपुर चौराहे तक करीब 35 किलोमीटर में 58 जगहों पर कर्नल बैंसला को गुर्जर समाज समेत अन्य लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

सिकंदरा चौराहे पर श्रद्धांजलि
गुर्जर आरक्षण आंदोलन में प्रमुख केंद्र रहे सिकंदरा चौराहे स्थित शहीद स्मारक पर अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को ले जाया गया। यहां हजारों की तादाद में समाज के लोगों ने कर्नल को श्रद्धांजलि दी। दौसा के पांचोली-खेड़ला में कर्नल बैंसला की पार्थिव देह निकली तो सड़कों के दोनों ओर लोगों का हुजूम नजर आया।

कर्नल के सम्मान में घोड़े का डांस
कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की शवयात्रा के साथ बाइक, ट्रैक्टर पर भी लोग साथ चल रहे थे। पैदल चलने वाले भी हजारों लोग साथ-साथ चल रहे थे। पांचोली-खेड़ला में कर्नल की शव यात्रा के सामने उनके सम्मान में घोड़े का नृत्य कराया गया। सेना के ट्रक में कर्नल बैंसला का पार्थिव शरीर पैतृक गांव लाया गया। तीन बजे अंतिम संस्कार होगा।
बाबर व लिंकन ने किया प्रभावित
बता दें कि किरोड़ी सिंह ने कई बार कहा था कि उनके जीवन को मुगल शासक बाबर और अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन, दो लोगों ने प्रभावित किया है। उनके एक इशारे पर गुर्जर समाज एकजुट हो जाता था। बैंसला की ताकत इतनी थी कि वो उनके एक इशारे पर पूरा राजस्थान रुक जाता था। वसुंधरा राजे से लेकर अशोक गहलोत सरकार तक उनकी ताकत का अहसास राजस्थान में कई बार कर चुके थे।
1971 भारत-पाक युद्ध में लिया हिस्सा
कर्नल बैंसला भारतीय सेना में भर्ती और 1971 भारत-पाक युद्ध में भी युद्ध बंदी भी रहे। 1991 में सेना से रिटायर होने के बाद समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हुए। गुर्जर समाज को आरक्षण की मांग को लेकर बनी संघर्ष समिति का 2005 में उन्हें संयोजक बनाया गया। उनके नेतृत्व में गुर्जरों को आरक्षण दिलवाने की मुहिम को तेज हुई तो 2007 में पहली बार पाटोली-पीपलखेडा व पीलूपुरा बयाना के चर्चित आंदोलन सुर्खियों में रहे। कई आंदोलनों के बाद राजस्थान के गुर्जर समाज को एमबीसी का 5% आरक्षण दिलवाने में प्रमुख भूमिका रही। कर्नल बैंसला गुर्जर समाज में शिक्षा को लेकर जन जागरण का कार्य किया।
कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला जी के जयपुर निवास पहुंचकर उनकी पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी एवं शोक संतप्त परिवारजनों को सांत्वना दी। उनका निधन समाज और प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है। pic.twitter.com/9dcp16O3Jc
— Sachin Pilot (@SachinPilot) March 31, 2022












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