Indian Air Force Day 2022 : गांवों की वो 3 लड़कियां जो IAF में बन गईं फाइटर पायलट, पूरे देश को इन पर गर्व
भारतीय वायुसेना स्थापना दिवस (Indian Air Force Day 2022) आज मनाया जा रहा है। भारत की आन, बान और शान के लिए आसमान में लड़ने वाली इंडियन एयरफोर्स की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को की गई थी। आजादी से पहले तक इसका नाम रॉयल इंडियन एयरफोर्स हुआ करता था। अब भारतीय वायुसेना है।
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IAF Day के मौके पर जानिए राजस्थान की उन तीन बेटियों की कहानी जिन्होंने जमीन से आसमान छू लिया। छोटे से गांवों की होने के बावजूद कामयाबी की बड़ी उड़ान भरी है। मोहना सिंह, प्रिया शर्मा और प्रतिभा पूनिया ये भारतीय वायुसेना की वो महिला फाइटर पायलट हैं, जो पलभर में हिंदुस्तान के किसी भी दुश्मन को तबाह करने में सक्षम हैं। इन पर पूरे देश को गर्व है।

मोहना सिंह, गांव पापड़ा, जिला झुंझुनूं राजस्थान
सबसे पहले बात करते हैं कि फाइटर पायलट मोहना सिंह जितरवाल की। ये 18 जून 2016 में भारतीय वायुसेना में पहली महिला फाइटर पायलट बनकर इतिहास रच चुकी हैं। मोहना सिंह ने यह उपलब्धि मध्यप्रदेश के रीवा की अवनी चतुर्वेदी और बिहार के दरभंगा की भावना कंठ के साथ हासिल की थी।

गांव पापड़ा की रहने वाली हैं मोहना सिंह
फाइटर पायलट मोहना सिंह जितरवाल ( Fighter Pilot Mohana Singh Jitarwal) मूलरूप से राजस्थान में सीकर झुंझुनूं जिले की सीमा पर उदयपुरवाटी उपखंड मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर काटली नदी क्षेत्र में बसे गांव पापड़ा की रहने वाली हैं। ये जितरवाल जाट परिवार से ताल्लुक रखती हैं। इन्होंने इंडियन एयरफोर्स ज्वाइन करने की अपने परिवार की परम्परा को आगे बढ़ाया है। दादा व पिता प्रतात सिंह के बाद मोहना सिंह भारतीय वायुसेना में पहुंची हैं। मोहना सिंह की मां मंजू देवी टीचर पद से रिटायर हैं।

मोहना सिंह को पीएम मोदी ने बताया ताकतवर बेटी
22 जनवरी 1992 को जन्मी देश की पहली महिला फाइटर पायलट मोहना सिंह तीन साल पहले अपने ताऊजी के निधन पर घर आई थी। तब जाट फाउंडेशन सोसायटी की ओर से इनका अभिनंदन किया गया था। इससे पहले मोहना सिंह साल 2017 में शादी समारोह में शिरकत करने के लिए अपने गांव आई थी। वहीं, साल 2018 में पीएम नरेंद्र मोदी झुंझुनूं दौरे पर आए तब उन्होंने मोहना सिंह की सबसे ताकतवर बेटी बताया था।

प्रिया शर्मा, गांव घूमनसर कलां, जिला झुंझुनूं राजस्थान
फाइटर पायलट प्रिया शर्मा (Fighter Pilot Priya Sharma) को देश की सातवीं महिला फाइटर पायलट बनने का गौरव हासिल हुआ। प्रिया शर्मा मूलरूप से राजस्थान के झुंझुनूं जिले के पिलानी के पास गांव घूमनसर कला की रहने वाली हैं। एयरफोर्स में स्कवाड्रन लीडर मनोज कुमार शर्मा की बेटी व मदनलाल और संतोष देवी की पोती हैं। दादा दादी बताते हैं कि जब भी फाइटर पायलट पोती प्रिया शर्मा घर आती है तो उसे बाजरे की रोटी और दही खाना पसंद है। पापा की विदर्भ में पोस्टिंग के दौरान प्रिया शर्मा भारतीय वायुसेना की प्रदर्शनी देखने गई थी। उसी वक्त तय कर लिया था कि बड़े होकर उसे भी इंडियन एयरफोर्स ज्वाइन करनी है। यह सपना पूरा भी कर दिखाया।

घोड़ी पर बैठाकर पूरे गांव में जुलूस निकाला
बता दें कि भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमान उड़ाने वाली प्रिया शर्मा ने जयपुर स्थित के एमएनआइटी से बीटेक की डिग्री हासिल की थी। बीटेक करने के बाद भारतीय वायुसेना में भर्ती हो गई थी। 2019 में प्रिया शर्मा जब हैदराबाद से दो साल का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पहली बार पहुंची थी तब इसके स्वागत में परिजनों व ग्रामीणों ने पलक पांवड़े बिछा दिए थे। घोड़ी पर बैठाकर पूरे गांव में जुलूस निकाला था। तब फाइटर पायलट प्रिया शर्मा ने कहा था कि महिला व पुरुष समान हैं। भारतीय वायुसेना ज्वाइन करने के सबको समान अवसर मिलते हैं। अच्छी शिक्षा के दम पर हर किसी को अपना ख्वाब पूरा करने के प्रयास करने चाहिए।

प्रतिभा पूनिया, गांव नरवासी रामबास, जिला चूरू राजस्थान
फाइटर पायलट प्रतिभा पूनिया (Fighter Pilot Pratibha Poonia) के बारे में मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जाता है कि प्रतिभा पूनिया भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बनने वाली राजस्थान की दूसरी महिला हैं। प्रतिभा पूनिया राजस्थान के चूरू जिले के राजगढ़ उपखंड के गांव नरवासी रामाबास की रहने वाली हैं। अपने गांव से शुरुआती शिक्षा हासिल की और बीकानेर के राजकीय कॉलेज से बीटेक किया। बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद देहरादून में आयोजित परीक्षा पास करके इंडियन एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर बनी।

105 कैडेट्स के साथ भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला
दिसम्बर 2017 को महिला फाइटर पायलट बनी प्रतिभा पूनिया को हैदराबाद के डूंडीगल एयर बैस में आयोजित पासिंग आउट परेड में 105 कैडेट्स के साथ भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला। मीडिया से बातचीत में प्रतिभा पूनिया ने बताया कि बचपन से ही उसका ख्वाब भारतीय वायुसेना में जाने का था। इसके सात बार परीक्षा दी, मगर छह बार फेल हुई। इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी और आखिरी फाइटर पायलट बनकर ही मानी।












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