Rajasthan : भैंस किसकी? DNA टेस्ट से भी नहीं चला मालिक का पता तो नागौर पुलिस ने यूं सुलझाई पहेली
नागौर। राजस्थान के नागौर में एक भैंस सुर्खियों में है। बीते आठ माह से भैंस का मालिक पहेली बनी हुई थी। दो व्यक्ति मालिक होने का दावा कर रहे थे। डीएनए टेस्ट तक करवाया गया, मगर भैंस के असली मालिक का पता नहीं चला। आखिर अब आठ माह पुरानी यह पहेली सुलझा दी गई है।

हिम्मताराम मेघवाल भैंस हुई गुम
नागौर एसपी श्चेता धनखड़ के अनुसार खींवसर इलाके में पांचला सिद्धा गांव निवासी हिम्मताराम मेघवाल अपने परिवार के साथ खेत में रहता है। वहीं, नलकूप से खेती करता है और पशु भी रखता है। आठ माह पहले हिम्मताराम ने अपनी दो भैंस चरने के लिए छोड़ी थी। एक भैंस वापस नहीं लौटी।

पड़ोसी की भैंस पर जताया हक
इस पर हिम्मताराम अपनी भैंस को ढूंढने निकला। वह पड़ोसी झालाराम के खेत की तरफ गया तो उसे एक भैंस चरती दिखाई दी, जिस पर हिम्मताराम मेघवाल ने खुद की भैंस होने का दावा कर दिया। इस पर झालाराम जाट ने विरोध जताया और बोला उसने यह भैंस गांव कांटिया के बाबूलाल सियाग से दस हजार रुपए में खरीदी है।

हिम्मताराम व झालाराम के बीच विवाद
हिम्मताराम और झालाराम दोनों के बीच भैंस के मालिकाना हक को लेकर विवाद बढ़ा तो बाबूराम को मौके पर बुलाया। उसने भैंस झालाराम को बेचने की बात स्वीकार की। इसके दो तीन दिन बाद हिम्मताराम ने गांव कांटिया व आस-पास के लोगों की पंचायत बुलाई, जिसमें हिम्मताराम मेघवाल व बाबूलाल सियाग की भैंस मंगवाई। दोनों की भैंस के बीच झालाराम की भैंस को छोड़ा गया तो वह बाबूराम सियाग की भैंस के साथ चली गई। इस पर पंचायत ने हिम्मताराम को समझाया कि यह भैंस झालाराम की है, जो उसने बाबूलाल से खरीदी है।

डीएनए जांच नहीं आई काम
डीएसपी विनोद कुमार सीपा के अनुसार पंचायत के फैसले से हिम्मताराम संतुष्ट नहीं हुआ और उसने झालाराम के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवा दी। इस पर पुलिस ने मामले को सुलझाने के लिए झालाराम, हिम्मताराम और बाबूलाल की भैंस का डीएनए परीक्षण करवाया। डीएनए सैंपल जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला जयपुर भेजे गए, जहां पशुओं के डीएनए की सुविधा नहीं होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई।

झालाराम जाट की निकली भैंस
इसके बाद नागौर पुलिस ने पूरे मामले की अपने स्तर पर नए सिरे से जांच शुरू की। पुलिस ने दोनों पक्ष के लोगों से पूछताछ की। गांव के पचास से ज्यादा लोगों से भी पूछताछ की। इसके बाद पुलिस ने फैसला किया कि हिम्मताराम की भैंस चरते हुए किसी और गांव-कस्बे में चली गई और यह भैंस झालाराम जाट की है।
भैंस की सभी फोटो प्रतिकात्मक












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