आखिर क्या होता है चातुर्मास? जिसके लिए 592 KM पैदल चलकर जयपुर आ रहे आचार्य सुंदर सागर
Chaturmas Jaipur Rajasthan: प्रसिद्ध जैन आचार्य सुंदर सागर महाराज पहली बार जयपुर की पावन धरती पर चातुर्मास करने आ रहे हैं। इसके लिए वे इंदौर स्थित आचार्य सुमति धाम से 22 मई 2025 को रवाना हुए थे। करीब 46 दिन की कठिन पदयात्रा में अब तक 592 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं। आगामी 6 जुलाई 2025 को वे जयपुर में भव्य मंगल प्रवेश करेंगे।
सोमवार को आचार्यश्री ने इंदौर से जयपुर के रास्ते में टोंक जिले के निवाई कस्बे में प्रवास किया। मंगलवार शाम 5 बजे जयपुर की ओर अंतिम चरण की यात्रा शुरू करेंगे। जयपुर में सांगानेर पुलिस थाना इलाके की चित्रकूट कॉलोनी स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में 9 जुलाई 2025 को चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना की जाएगी।

यह आचार्य सुंदर सागर का 30वां चातुर्मास होगा, लेकिन पहली बार वे जयपुर में इसे संपन्न करेंगे। खास बात यह है कि आचार्य सुंदर सागर प्रतिदिन 15 से 20 किलोमीटर तक पदयात्रा करते हुए अपने संघ के साथ विहार करते हैं। टोंक के निवाई से जयपुर तक की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है। यह तय करने के बाद वे जयपुर में होंगे।
Who is Acharya Sundar Sagar: कौन हैं आचार्य सुंदर सागर?
आचार्य सुंदर सागर का जन्म 9 नवम्बर 1976 को दिल्ली के सदर बाजार में पहाड़ी धीरज में हुआ था। महज 19 वर्ष की आयु में सांसारिक मोह का त्याग कर वे दीक्षा के पथ पर अग्रसर हो गए। आचार्य सुंदर सागर ने 16 जुलाई 1996 को आचार्य सन्मति सागर से दीक्षा ली थी। इसके बाद 25 जनवरी 2007 को उन्हें आचार्य पद की प्रतिष्ठा प्राप्त हुई।
आचार्य सुंदर सागर को पूर्व का नाम प्रदीप कुमार जैन था। इनके पिता का नाम राधेश्याम अग्रवाल व माता का नाम सावित्री देवी है। प्रवीण कुमार व नितिन कुमार इनके भाई हैं। आचार्य सुंदर सागर ने बीकॉम तक की पढ़ाई कर रखी है। साल 1996 से लेकर अब तक 29 चातुमार्स सम्पन्न कर चुके हैं।

आचार्य सुंदर सागर के संघ में 23 पिच्छिका साधु-साध्वी हैं, जिनमें 7 मुनिराज, 7 आर्थिका माताएं, 3 क्षुल्लक और 6 क्षुल्लिकाएं शामिल हैं। आचार्य सुंदर सागर अब तक सम्मेद शिखर पर चातुर्मास के दौरान पर्वत की 108 वंदनाएं भी कर चुके हैं, जो उनकी साधना की गहराई को दर्शाता है।
आचार्य सुंदर सागर के जयपुर आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण है। कई स्थानों पर पदयात्रा के स्वागत के लिए तैयारियां की जा रही हैं।
Chaturmas Kya Hota Hai: चातुर्मास क्या होता है?
चातुर्मास शब्द संस्कृत के 'चार' और 'मास' से बना है, जिसका अर्थ होता है चार महीने। यह विशेष समयावधि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा से कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तक मानी जाती है। वर्षा ऋतु के दौरान जब जमीन पर असंख्य सूक्ष्म जीव उत्पन्न होते हैं, तब जैन साधु-संत अहिंसा के सिद्धांत का पालन करते हुए स्थिर विहार करते हैं।
चातुर्मास में साधु कहीं भ्रमण नहीं करते, एक ही स्थान पर ठहरकर धर्म चर्चा, उपदेश, साधना और आत्मकल्याण में लीन रहते हैं। माना जाता है कि भगवान महावीर स्वामी ने भी वर्षा काल में स्थिर विहार की परंपरा का पालन किया था। यही परंपरा आज तक चली आ रही है।
इतिहास में चातुर्मास को तप, संयम और साधना का श्रेष्ठ अवसर माना गया है। इसी कारण श्रद्धालु इसे आध्यात्मिक उत्थान का विशेष समय मानते हैं और जैन मुनियों के सत्संग और उपदेश सुनने के लिए बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं।












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