दो साल बाद राजनीति की बोतल से निकला नाकारा निकम्मा का जिन्न, सियासत गरमाई
जयपुर, 6 जुलाई। राजस्थान की राजनीति में नाकारा निकम्मा नाम का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है. इससे प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है. प्रदेश में अशोक गहलोत और सचिन पायलट की गुटबाजी में बँटी कांग्रेस में ऐसी बयानबाजी अब आम हो चुकी है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर इस शब्द के जरिए सचिन पायलट और गजेंद्र सिंह शेखावत पर निशाना साधा है.

पायलट ने दिखाया था बड़प्पन
पिछले दिनों सचिन पायलट ने गहलोत को अनुभवी, वरिष्ठ और पितातुल्य बताकर अपना बड़प्पन दिखाया था. बदले में गहलोत ने नाकारा निकम्मा बच्चे को पिता द्वारा डांटने के लहज़े में कहने की कहावत का हवाला देकर पायलट को झगड़ने वाला बच्चा करार दे दिया है. हांलाकि गहलोत ने अपने सम्बोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह को भी निशाने पर लिया है. लेकिन गहलोत के इस बयान को सीधे तौर पायलट से जोड़कर देखा जा रहा.

गहलोत ने की नाकारा निकम्मा की व्याख्या
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को कांग्रेस विधायकों और नेताओं को सम्बोधित करते हुए नाकारा और निकम्मा शब्द की व्याख्या की. इस दौरान गहलोत ने कहा कि निकम्मा का मतलब क्या होता है. पड़ोस में बच्चे कोई झगड़ा करते हैं. बच्चे आपस में झगड़ते हैं तो एक पड़ोसी दूसरे के घर जाता है. बच्चे की शिकायत करता है. तब उस बच्चे के पिता उसे कहते हैं कि अभी बुलाकर डांटता हूँ. वह नाकारा-निकम्मा है. यही तो कहते हैं, ये तो कहावतें होती हैं. वह अपने बच्चे के लिए कहता है. गहलोत ने कहा- यही बात मैं कहता हूँ कि निकम्मा-नाकारा है। इसका मतलब यही होता है कि यह बच्चा है. इसने गलती कर दी होगी. मैं इसे डांटता हूँ. कई बार प्रेम से भी कहा जाता है. अब मैं प्रेम से भी कहूं तो कई लोग बुरा मान जाते हैं. उसका मैं क्या कर सकता हूँ.

सम्मेलन में 13 जिलों के विधायक और नेता हुए शामिल
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बुधवार को जयपुर के बिड़ला सभागार में ईस्टर्न कैनाल प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने के मसले पर 13 जिलों के विधायकों और कांग्रेस नेताओं के सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे. इस दौरान सीएम गहलोत ने कहा कि गजेंद्र सिंह शेखावत केंद्र में जलशक्ति मंत्री हैं. बावजूद इसके राजस्थान को उसका हक़ नहीं दिलवा पा रहे हैं. केंद्रीय मंत्री शेखावत पीएम मोदी के किए हुए वादे को भूल गए. शेखावत अब्सेंट माइंड हैं. उन्होंने राजस्थान के लिए कुछ नहीं किया. इस दौरान सीएम गहलोत ने ईडी की कार्रवाई का हवाला देते हुए पीएम मोदी और बीजेपी को भी निशाने पर लिया.

दो साल पहले पायलट को कहा था नाकारा निकम्मा
सचिन पायलट ने दो साल पहले राजस्थान का उपमुख्यमंत्री रहते हुए जुलाई के महीने में अपने समर्थित विधायकों को साथ लेकर गहलोत सरकार को अस्थिर करने की कोशिश थी. वे अपने साथी विधायकों के गुड़गांव के मानेसर में एक होटल में चले गए थे. इसके बाद प्रदेश में अशोक गहलोत सरकार संकट में आ गई थी. खुद अशोक गहलोत को अपने विधायकों की जयपुर के एक होटल में बाड़ेबंदी करनी पड़ी थी. इस दौरान गहलोत ने अपने एक बयान के दौरान पायलट को नाकारा निकम्मा बताते हुए बागी करार दिया था. उनका उपमुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष पद छीन लिया गया था. बावजूद इसके पायलट ने पार्टी नहीं छोड़ी.












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