छत्तीसगढ़ का एक गांव जहां आज़ादी के बाद पहली बार पहुंचे कलेक्टर
जगदलपुर, 13 मई। छत्तीसगढ़ में आज भी कई ऐसे इलाके है,जहां माओवादी तो है,लेकिन सरकार नहीं पहुंच सकी है। लेकिन अब तस्वीर बदलने लगी है। आपने छत्तीसगढ़ की दरभा घाटी के बारे में सुना होगा, जहां 25 मई 2013 नक्सल हमला हुआ था ,जिसे झीरमघाटी नक्सल हमला भी कहा जाता है।एक समय माओवादियों का गढ़ माने जाने वाले इस इलाके से सरकार तक जाने से घबराती थी। आज उसी क्षेत्र में सड़क भी बन रही है और सरकार भी पहुंचने लगी है।

कांगेर घाटी में बसे बस्तर संभाग के दरभा विकासखण्ड में अब विकास की उम्मीदे पनपने लगी हैं।दरभा के अतिसंवेदनशील माओवादी प्रभावित और दुर्गम गांव चांदामेटा से एक खूबसूरत तस्वीर सामने आई है,जहां गुरुवार को कलेक्टर ने जनचौपाल समाधान शिविर का आयोजन किया । बस्तर जिले के कलेक्टर रजत बंसल, पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र मीणा समेत कई अधिकारीयों ने चांदामेटा गांव पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी और उसका निदान भी किया। मौका इसलिए खास बन गया क्योंकि भारत की आज़ादी के बाद पहली बार चांदामेटा में सरकार पहुंची थी। कलेक्टर बंसल को देखकर ग्रामीण खुश हो गए।
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चांदामेटा के ग्रामीणों ने सरकार से आंगनबाड़ी केंद्र ,स्वास्थ्य सुविधा शुरू करने की मांग की ,जिसे कलेक्टर ने तत्काल स्वीकृत कर दिया। वही रक्त बंसल ने ग्रामीणों को राशन कार्ड और राशन वितरण करवाने , वृद्धा पेंशन दिलवाने ,के लिए भी निर्देश पंचायत सचिव कोजारी किये। उन्होंने चांदामेटा के पटेलपारा में देवगुड़ी निर्माण को भी मंजूरी प्रदान की। ग्रामीणों ने कलेक्टर से कहा कि उनके गांव में मोबाइल के नेटवर्क नहीं है ,जिसपर कलेक्टर ने चांदामेटा में जल्द ही ही मोबाइल टावर लगाने के लिए भी आश्वासन दिया। चांदामेटा गांव में जनचौपाल समाधान शिविर के कारण आजादी के पश्चात पहली बार यहां शिविर लगा और बस्तर कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक समेत बड़े अधिकारी चांदामेटा पहुंचे।
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