MP News: वर्दीधारी पर गुंडे का आतंक, जबलपुर में हिस्ट्रीशीटर ने दी धमकी- घर खाली करो, वरना भुगतो अंजाम!
जबलपुर में एक जेल प्रहरी को एक हिस्ट्रीशीटर की प्रताड़ना इतनी भारी पड़ रही है कि वह अपने सपनों का घर बेचने को मजबूर हो गया है। प्रहरी ने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, पुलिस थाने के चक्कर काटे, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली। उल्टा अपराधी और ज्यादा हावी हो गया और अब खुलेआम धमकियां देने लगा है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि प्रहरी ने शहर छोड़ने की योजना बना ली है।
दो साल पहले हुई थी विवाद की शुरुआत
सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल में पदस्थ आरक्षक मोहन कुमार ने दो साल पहले जबलपुर के हनुमान ताल थाना क्षेत्र में स्थित खेरमाई मंदिर के पीछे एक मकान खरीदा था। कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन फिर पड़ोसी हिमांशु कोरी ने परेशानी खड़ी करनी शुरू कर दी।

हिमांशु कोरी का कहना था कि वह इस मकान को खरीदना चाहता था, लेकिन प्रहरी ने इसे पहले ही खरीद लिया। जब मोहन कुमार ने मकान बेचने से इनकार किया, तो हिमांशु ने धमकियां देना शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि हिमांशु ने अपने गुंडों को प्रहरी और उसके परिवार के पीछे लगा दिया।
डर और आतंक का माहौल
मोहन कुमार के अनुसार, देर रात जब वह ड्यूटी के बाद घर लौटते हैं, तो बदमाश उनका पीछा करते हैं और रात में दरवाजा खटखटाते हैं। हिमांशु खुलेआम कहता है, "मकान मुझे पसंद आ गया है, इसे खाली कर दो, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो।"
हिमांशु ने यह भी धमकी दी है कि यदि मोहन कुमार ने घर नहीं बेचा, तो वह उसके खिलाफ झूठे छेड़छाड़ के मामले दर्ज करवा देगा। उसका दावा है कि पूरा हनुमान ताल थाना उसका है और पुलिस उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।
हिस्ट्रीशीटर की आपराधिक पृष्ठभूमि
हिमांशु कोरी पर शहर के विभिन्न थानों में 50 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, मारपीट और अवैध हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। हाल ही में वह अवैध हथियार के एक मामले में जेल से छूटकर आया है।
पुलिस भी नहीं कर रही मदद
22 अप्रैल 2024 को मोहन कुमार ने हिमांशु कोरी के खिलाफ हनुमान ताल थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। इसके बाद हिमांशु ने बदला लेने के लिए उसके घर के बाहर अपने गुर्गे तैनात कर दिए। प्रहरी ने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज भी सौंपे, जिनमें बदमाशों की गतिविधियां साफ नजर आ रही थीं, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अब, अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को देखते हुए मोहन कुमार ने जबलपुर छोड़कर किसी अन्य शहर में बसने का फैसला किया है। इस पूरी घटना ने कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।












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