आंख से आंख मिलाई तो खतरा, जबलपुर समेत कई शहरों में 'आई फ्लू' के केस, अलर्ट मोड पर स्वास्थ्य महकमा
Patients of conjunctivitis: देश के कई राज्यों की तरह मध्य प्रदेश के भी कई शहरों में तेजी से कंजक्टिवाइटिस फैल रहा है। बीमारी की भयावहता ये है कि रोगी की आंख से आंख मिलाने में खतरा हो रहा है। बड़ी संख्या में सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में कंजक्टिवाइटिस के मरीज पहुंचने लगे हैं।
बीते एक पखवाड़े में जबलपुर में भी आई फ्लू के रोगी बढ़े हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बरसात का मौसम इन्फेक्शन के लिए अनुकूल है, इसलिए वातावरण में कंजेक्टिवाइटिस के वायरस तेजी से फैल रहे हैं जो आंखो को प्रभावित कर रहे हैं।
इसलिए सावधानी की आवश्यकता है। हालांकि बारिश गायब होने से रोग में कमी आई है, लेकिन ये नाक फी है। जानकार बताते हैं कि हल्की बारिश होते ही बीमारी फिर शबाब पर होगी। जबलपुर के विक्टोरिया जिला अस्पताल में प्रतिदिन 25-30 मरीज यहां पर पहुंच रहे हैं यही हाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नेत्र विभाग का भी है। वहां पर हर रोज करीब आधा सैकड़ा से अधिक मरीज जांच के लिए पहुंच रहे हैं।

तेजी से फैल रहा कंजैक्टिवाइटिस, सावधानी आवश्यक
शहर के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ परवेज मोहम्मद सिद्दकी ने बताया कि ये संक्रामक बीमारी है। इससे रोगी के संपर्क में आने पर बीमारी का संक्रमण हो जाता है। पहले चरण में आंखे लाल होती हैं। इसके अधिकतर मामले एडेनोवायरस के कारण होते हैं। इसके अलावा हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस, वैरिसेला जोस्टर वायरस से हो सकता है। वायरल कंजक्टिवाइटिस अक्सर एक आंख में होता है, कुछ दिनों में दूसरी आंख में भी फैल जाता हैं।
चिकित्सकों की सलाह
नेत्र विशेषज्ञ डॉ तरुण अहिरवाल का कहना है कि वायरल कंजक्टिवाइटिस के लिए कोई उपचार उपलब्ध नहीं है। 7-8 दिनों में इसके लक्षणों में अपने आप सुधार आ जाता है। वैसे वार्म कम्प्रेस (कपड़े को हल्के गरम पानी में डुबोकर आंखों पर रखना) से लक्षणों में आराम मिलता है। बैक्टीरिया के किसी भी संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक्स सबसे सामान्य उपचार है। बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस में एंटीबायोटिक्स आई ड्रॉप्स और ऑइंटमेंट (मरहम / जैल) के इस्तेमाल से कुछ ही दिनों में आंखें सामान्य और स्वस्थ्य होने लगती हैं। 2-3 दिन के बाद तकलीफ बनी रहे तो नेत्र विशेषज्ञ को दिखाना ही सबसे उत्तम है।
स्कूली बच्चों को ज्यादा परेशानी
बड़ों के साथ बच्चों में तेजी से फैल रहे आई फ्लू की रोकथाम के लिए स्कूलों में भी एहतियात बरती जा रही है। स्कूल प्रबंधन के द्वारा पैरेंट्स को मैसेज भेजकर चेताया जा रहा है कि यदि उनके बच्चों में आई फ्लू के कोई भी लक्षण हैं, जो तो उन्हें स्कूल न भेजें ताकि उनके बच्चे को तो आराम मिल ही सके, साथ ही दूसरे बच्चों को भी संक्रमण से बचाया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
इधर प्रदेश का हेल्थ डिपार्टमेंट भी अलर्ट हैं। इस इंफेक्शन की रोकथाम के लिए सभी जिलों को जरुरी दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। प्रभारी सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा का कहना है कि जिला अस्पताल और मेडिकल में आई फ्लू के पहुंच रहे सभी मरीजों का परीक्षण किया जा रहा हैं। उनके लक्षण और इंफेक्शन के मुताबिक जरुरी दवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस फ्लू के संबंध में लोगों को जागरूक करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।












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