MP: आलाकमान नहीं, ज्योतिष बाँट रहे टिकट ! शनि-वक्रीय चाल का खौफ, दावेदार चैक करा रहे कुंडली और हाथ
नगरीय निकाय चुनाव के फेर में लगे दावेदारों को अपने नेता और पार्टी पर भरोसा भी है और संशय भी। कोई भी इस बार के चुनाव में टिकट कटने नहीं देना चाहते, लिहाजा नेताओं के चरण वंदन, पूजा पाठ गृह नक्षत्र मालूम किए जा रहे है
जबलपुर, 12 जून: मध्यप्रदेश के नगरीय निकाय चुनाव के कई दावेदार भारी टेंशन में है। ये टेंशन टिकट का है, चाहे मिले या फिर न मिले? दिमाग के बारह बजे हुए है। लिहाजा इससे निपटने ज्योतिषियों का सहारा भी लिया जा रहा है, वो भी लुक-छिपकर कि कोई देख न ले। कोई शनि की वक्रीय चाल से खौफजदा है तो कोई महादशा-अंतर्दशा और राजयोग का रिपोर्ट कार्ड पता करने दौड़ लगा रहा है। इस बीच खेल जगत के अलावा राजनीति में भी सट्टे के साथ ज्योतिष पर भरोसा करने वाले खिलाडी और उनके सलाहकारों की बाढ़ आ गई है। नेता और नेत्री अपने-अपने हिसाब से चुनाव लड़ने की सेटिंग जमा रहे है।

किसी को बताना नहीं, कि मैं कुंडली दिखवा रहा हूँ !
नगरीय निकाय चुनाव के फेर में लगे दावेदारों को अपने नेता और पार्टी पर भरोसा भी है और संशय भी। कोई भी इस बार के चुनाव में टिकट कटने नहीं देना चाहते, लिहाजा नेताओं के चरण वंदन, पूजा पाठ के अलावा गृह नक्षत्रों की स्थिति, महादशा-अंतर्दशा और राजयोग का रिपोर्ट कार्ड पता लगाने ज्योतिषियों, तांत्रिकों और न्यूमैरिक एस्ट्रोलॉजर तक से कंसल्ट करने में भी कोई पीछे नहीं है। हालांकि यह सब सबको बताकर नहीं, बल्कि चुपचाप हो रहा है। अपने नामोआमाल के तगड़े गृहों को और तगड़ा करने और कमजोर गृहों का उपाय पूछने दावेदार पण्डितों-ज्योतिषियों का सहारा ले रहे हैं। वहीं ज्योतिषी भी शनि-राहु-केतु के फेर में डर दिखाकर अच्छी खासी दक्षिणा बटोरने में जुटे हुए हैं।

शनि की वक्री चाल का सबको सता रहा डर
दरअसल 2019 में शनि राशि परिवर्तन कर मकर राशि में पहुंचे थे जो उनकी स्वयं की राशि है। लेकिन इस कालखण्ड के शुरू होते ही। कोरोना, युद्ध, महंगाई-बेरोजगारी का अच्छा खासा ताण्डव देखने सभी को मिला। वैसे तो कोरोना काल में चुनाव पूरे देश में हुए लेकिन प्रदेश के नगरीय निकाय चुनाव पर मानो अढैया अपनी कैंची फंसाए बैठा था। हालांकि अप्रैल के लास्ट-लास्ट तक शनि ने जैसे ही राशि परिवर्तन कर कुंभ राशि में डेरा जमाया वैसे ही चुनाव पर लगा हुआ ग्रहण छंट गया। लेकिन अब शनि देव अपनी चाल वक्री करके वापस मकर राशि में पहुंच रहे हैं और दूसरे चरण की मतगणना यानि रिजल्ट तक यहीं डेरा जमाए बैठने वाले हैं ऐसे में दावेदारों को उनका काफी डर सता रहा है।

राजयोग का मीटर भी चैक करा रहे दावेदार
कहते हैं जिसकी कुण्डली में राजयोग हो उसे ही राजनीति में सफलता मिलती है। ऐसे में नए-नए दावेदार जहां अपनी-अपनी कुण्डली में राजयोग चैक करा रहे हैं तो ज्योतिषी भी पार्टी देखकर हर दावेदार को गजकेसरी, नीचभंग और राजयोग बताकर दक्षिणा निकलवाने से नहीं चूकते। उनको भी लगता है दावेदारों के सिर से दावेदारी का भूत जल्दी न उतरे। वहीं इस कड़ी में पूर्व पार्षद भी शामिल हैं जिन्हें पता है कि उनकी कुण्डली में राजयोग है लेकिन वे पण्डित जी से यह चैक करा रहे हैं कि उनके राजयोग में अभी भी ताकत बाकी है या सर्वश्रेष्ठ समय बीत चुका है।

जनता ही दिलाएगी राजयोग
ज्योतिष विज्ञान कुछ भी कहे लेकिन लोकतंत्र में जनता ही प्रत्याशी के सारे गृह नक्षत्रों का आटा-साटा करती है। ऐसे में नए दावेदार हों या पुराने इतना जान लें कि उनकी किस्मत के पिटारे का बटन केवल और केवल जनता के हाथ में है। ये टोटके और तंत्र-मंत्र से कुछ नहीं होने वाला।












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