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‘टिकट का टेंशन’ तिकड़ी करेगी दूर, BJP चुनाव चयन समिति में शामिल कई दावेदारों की उम्मीदों पर फिरा पानी

रतलाम को छोड़ कांग्रेस की ओर से जारी हुई महापौर कैंडीडेट की फाइनल लिस्ट के बाद, अब हर किसी की निगाह भाजपा पर है। सरप्राइज देने में माहिर बीजेपी अपने पत्ते चुनाव समिति की बैठक के बाद खोलेगीं।
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जबलपुर, 10 जून: मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव में महापौर पद के लिए कांग्रेस ने तो प्रत्याशियों की घोषणा कर दी, अब इंतजार भाजपा की लिस्ट का किया जा रहा है। जिसके बाद सियासत की चौसर पर चलने वाली चालों से प्रदेश के 16 नगर-निगम का भविष्य तय होगा। आखिरी फैसला तो मतदाता ही करेंगे, लेकिन उससे पहले भाजपा खेमे में टिकट को लेकर पक रही खिचड़ी पर सभी की नजर है। राजधानी भोपाल से लेकर दिल्ली तक मंथन चल रहा है। चुनौती जबलपुर, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर के भाजपा के किले को बचाने की है। जिसके लिए प्रदेश के दिग्गजों ने, महापौर पद के लिए अपने चहेतों को टिकट दिलाने साम, दाम दंड भेद की रणनीति अपनाई है।

क्या टिकट में भी सरप्राइज देगा BJP का ‘टशन’?

क्या टिकट में भी सरप्राइज देगा BJP का ‘टशन’?

रतलाम को छोड़ कांग्रेस की ओर से जारी हुई महापौर कैंडीडेट की फाइनल लिस्ट के बाद, अब हर किसी की निगाह भाजपा पर है। सरप्राइज देने में माहिर बीजेपी अपने पत्ते चुनाव समिति की बैठक के बाद खोलेगीं। उससे पहले सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलों का बाजार गर्म है। बीजेपी के टशन के सामने कितने दावेदार टिकेंगे, यह आना वाला वक्त ही बताएगा। इस बीच दावेदारों की तैयार लंबी फेहरिस्त ने टिकट का आखिरी फैसला लेने वालों की नींद जरुर उड़ा रखी है। क्योकि महाकौशल हो, मालवा, बुंदेलखंड, चंबल या फिर राजधानी भोपाल और उससे लगा इलाका, जिन नेताओं का सिक्का बुलंद है, वह चाहते है कि टिकट उनके कोटे से ही रिलीज हो। कुल मिलाकर उनमें में प्रतिस्पर्धा चल रही है।

संभागीय चयन समिति से कटा कई दावेदारों का पत्ता !

संभागीय चयन समिति से कटा कई दावेदारों का पत्ता !

इधर कांग्रेस अपने महापौर उम्मीदवारों की लिस्ट फाइनल कर रही थी, तो उधर भाजपा चुनावी टिकट लिए चयन समिति बनाने में जुटी थी। दोनों के बीच थोड़ी बहुत देर के फासले में लिस्ट जारी कर दी गई। संभाग स्तरीय तैयार हुई भाजपा की चयन समिति में अधिकांश ऐसे सदस्यों को जिम्मेदारी दे दी, जो खुद या फिर अपने घर से किसी करीबी के लिए टिकट की जुगत लगा रहे थे। ऐसी जिम्मेदारी भरे हालातों में कई दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इससे आगे फाइनल होने वाली लिस्ट का काम भी हल्का हो गया है।

टिकटों के टेंशन में कई खेमे

टिकटों के टेंशन में कई खेमे

विशेषतौर पर महापौर पद के लिए प्रदेश के बड़े शहरों जबलपुर, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और रीवा में ज्यादा तनाव है। शुरुआत में तैयार पैनल में यदि एक-दो नाम होते तो भी किसी असंतुष्ट को मैनेज कर लिया जाता। लेकिन इस बार नगर निगम चुनाव में बीजेपी के टिकट बंटवारे को लेकर दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। यदि बात जबलपुर की करे तो यहाँ से RSS से जुड़े और सीएम शिवराज की पसंद डॉ जितेन्द्र जामदार है। उन्हें राज्यसभा के लिए भी दावेदार माना जा रहा था, लेकिन बाद में पार्टी ने सरप्राइज दे दिया। युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पांडे भी दावेदारों में से एक है। युवा चेहरा होने साथ प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के ख़ास है। वही पूर्व एमआईसी सदस्य कमलेश अग्रवाल और श्रीराम शुक्ला भी अपना जेक लगाए है कि किसी तरह उन्हें टिकट मिल जाए। भोपाल में कृष्णा गौर और मालती राय के नाम सबसे आगे है, पर कृष्णा गौर को चुनाव चयन समिति का सदस्य बना दिया गया। इसी तरह इंदौर में सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय अपने चहेतों के लिए जोर आजमाइश कर रहे है। सुमित्रा महाजन नए चेहरे की डिमांड कर रही है, तो कैलाश रमेश मेंदोला को मैदान में लाना चाहते है। मालिनी गौड़ का नाम भी दावेदारों की सूची में शामिल है। चंबल इलाके में सिंधिया, तोमर और नरोत्तम का अलग ही गणित है। इन सब के बीच देखना होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है।

कोर ग्रुप की बैठक में निकलेगा निचोड़

कोर ग्रुप की बैठक में निकलेगा निचोड़

आगामी 11 और 12 जून को बीजेपी की कोर ग्रुप की बैठक है। जिसमे शामिल होने वाले दिग्गज फाइनल लिस्ट को हरी झंडी देंगे। देखा यह भी जाएगा कि कांग्रेस ने किस वर्ग के किस हैसियत वाले नेता को प्रत्याशी बनाया है, ताकि उसके मुकाबले भाजपा का चेहरा बीस ही बैठे। दिल्ली के मंथन से भी नया सरप्राइज सामने आ सकता है। इसकी बानगी हाल ही में OBC और ST वर्ग से बने राज्य सभा सांसद के रूप में देखी जा चुकी है। इस चुनाव में टिकट बंटवारे के बहाने किसी न किसी तरह का सन्देश देने की कोशिश भी होगी। क्योकि अगले साल विधानसभा फिर उसके बाद लोकसभा चुनाव भी है।

टिकट फाइनल होने के पहले असंतुष्टों की भी तैयार लिस्ट

टिकट फाइनल होने के पहले असंतुष्टों की भी तैयार लिस्ट

टिकट किसके पाले में जाती है यह अगले हफ़्ते पता लगेगा। उससे पहले बीजेपी का ख़ुफ़िया तंत्र सक्रिय है। यह पता लगाया जा रहा है टिकट फाइनल होने के बाद उस उम्मीदवार के खिलाफ कौन-कौन चुनावी गणित प्रभावित कर सकता है? उन असंतुष्टों से पूरे चुनाव पर कितना असर पड़ सकता है, इसका आंकलन अभी से लगाया जा रहा है। पार्टी सूत्रों की माने तो ऐसे लोगों को पहले तो समझाइश दी जाएगी, उसके बाद भी यदि प्रत्याशी के खिलाफ कोई भी गतिविधि की तो उसे बाहर का रास्ता दिखाने का अभी से प्रबंध है।

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English summary
Tension of ticket in the urban body elections, the hopes of many BJP contenders have been dashed
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