MP vidhansabha chunav 2023: अपनों पर बिफरे रहे, फिर भी कौन सी वजह कि जबलपुर के अजय विश्नोई पर BJP को है भरोसा
MP vidhansabha chunav 2023: सियासत में रूठने-मनाने पुरानी परंपरा हैं। कोई दबी जुबान तो कोई खुलकर अपने दल या उससे जुड़े नेताओं से बैर भी रखने मजबूर हो जाता हैं। लेकिन ये सब बातें चुनाव में टिकट मिलते ही हाशिए पर पहुंच जाती हैं। एमपी चुनाव में जबलपुर के बीजेपी विधायक अजय विश्नोई की टिकट क्लियर होते ही कई सवाल उठने लगे हैं।
ऐसा नहीं है कि अजय विश्नोई पिछला चुनाव ही लड़े और जीते। इससे पहले 2013 में कांग्रेस के युवा प्रत्याशी नीलेश अवस्थी उन्हें हार का मुंह दिखा चुके हैं। 2003 और 2008 में भी बीजेपी ने उन्हें टिकट दिया और जीतकर मंत्री भी बने। लेकिन 2018 में जीतने के बाद 5 साल तक सिर्फ विधायक ही रहे।
ग्रामीण क्षेत्र पाटन विधानसभा से बीजेपी ने विश्नोई पर जिस अंदाज में भरोसा जताया हैं, उसके पीछे असल वजह तो खुद वो और पार्टी जानती हैं। लेकिन पब्लिक के बीच जरुर कई तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हैं। कहा जा रहा है कि विश्नोई इस कार्यकाल में जिस ढंग से अपनी सरकार पर दबाव बनाते रहे, उसी खतरे को भांपते हुए इस सीट पर मंथन हुआ। चार बार चुनाव लड़ने के साथ एक बड़ा वर्ग भी विश्नोई की ताकत हैं।

इसके अलावा चुनाव घोषणा के पहले वो खुद मीडिया में यह बयान भी दे चुके कि 'इस बार उनका आखिरी चुनाव हैं'। पार्टी द्वारा कराए गए सर्वे में भी विश्नोई, पाटन सीट पर आगे रहे। टिकट न देने के नफा-नुकसान का भी गहराई से आंकलन किया गया होगा। दूसरी बड़ी बात जबलपुर की आठ सीटों में चार सीट पहले से ही कांग्रेस के कब्जे में हैं। यदि रिस्क लेते हुए नए चेहरे पर दांव लगाया और विश्नोई की नाराजगी 'हार' की वजह बनी। तो टिकट चयनकर्ता जबाव नहीं दे पाएंगे। सत्ता हासिल करने बीजेपी को इस चुनाव में एक-एक सीट की कीमत पता हैं। यही कारण हो सकता है कि अपने के खिलाफ आग उगलने वाले विश्नोई पर ही बीजेपी भरोसा जताने मजबूर हुई।












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