Jabalpur में पिछले चुनाव में कौन सा सूंघ गया था 'सांप'? बीजेपी के कमलेश अग्रवाल की 'भगवान रूपी' जनता अब कहां?

Jabalpur uttar madhya assembly: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जबलपुर उत्तर मध्य सीट पर बम के गोले की तरह फटी बीजेपी में बगावत की आग की लपटों की आंच का असर सूबे में भी दिखाई दिया। अनुशासन और मर्यादाओं का अहसास कराने कराने वाले किसी दल के बड़े दफ्तर में जब इसका अखाड़ा बन जाए तो आवाज दूर तलक जानी ही थी।

जबलपुर में बीजेपी के कुनबे में वहीं हस्र हुआ और जिसको मौका मिला, वह असंतोष की बहती गंगा का आचमन करने जुट गया। देखने में आया कि विरोधी खेमा के लिए प्रदेश के चुनाव मुखिया भूपेन्द्र यादव भी कुछ नहीं। गुजरते दिन के बाद नगर निगम नेता प्रतिपक्ष कमलेश अग्रवाल के नामांकन दाखिल करने के फैसले ने बगावत की आग में और घी डालने का काम कर दिया।

disputed-politics-in-jabalpur-uttar-madhya-assembly

पूर्व महापौर और लोकसभा चुनाव में प्रभारी रहे प्रभात साहू ने भी नगर अध्यक्ष पद की छोर को छोड़ दिया। जानकारों की माने तो जबलपुर में बीजेपी के इतिहास में किसी चुनाव में ऐसी तस्वीर पहली बार ही बनी। वो भी उस उत्तर मध्य सीट पर जिस पर कभी बीजेपी की मजबूती अन्य 7 सीटों को सहारा देती थी। रूठे दोनों नेताओं से होने वाले संभावित नुकसान की चर्चाएं, जब राजधानी भोपाल फिर दिल्ली के कानों तक पहुंची, तो सियासी साम दाम दंड भेद ही मनाने का सहारा अपनाना पड़ा।

भोपाल संगठन से प्रभात माने तो कमलेश अग्रवाल भी यू टर्न लेने मजबूर हुए। वही कमलेश अग्रवाल जो तीन बार के पार्षद और नेता प्रतिपक्ष बनने की ताकत के सहारे टिकट के लिए दावेदारी कर रहे थे। मीडिया के बयानों में जनता और समर्थक कार्यकर्ताओं को भगवान, विश्वास और न जाने क्या-क्या कहकर उन्होंने चुनाव में निर्दलीय नामांकन फॉर्म जमा किया। लेकिन एक दिन गुजरने के बाद कमलेश ने भगवान रूपी जनता और समर्थकों की भावनाएं धरी रह गई। कथनी और करनी का सबूत बन बैठे। एयरपोर्ट पर सीएम शिवराज के दुलार और भविष्य के सरप्राइज में कमलेश के 'भगवान' वहीं जहां के तहां खड़े हैं।

एक-एक सीट और चुनाव में हर रोज बदलते ऐसे सीन को लेकर बीजेपी का एक खेमे ने दबीं जुबान से कई सवाल उठाना शुरू कर दिए। पूछा जा रहा है कि 2018 के चुनाव में जबलपुर उत्तर मध्य सीट से बागी चुनाव लड़ने वाले धीरज पटैरिया पर पार्टी का जोर क्यों नहीं चला? ऐसी कौन सी वजह थी कि धीरज को दुलार करने वालों का टोटा था? क्या किसी की सोची समझी रणनीति या फिर ओवर कॉन्फिडेंट में बीजेपी ने खुद अपने हाथों जीत फिसलने दी?

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+