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MP News: जानवरों के खाने योग्य चावल घोटाले में 6 अधिकारी कर्मचारी बर्खास्त, कोरोनाकाल में उजागर हुआ था मामला

कोरोनाकाल के वक्त उजागर हुए घटिया चावल घोटाले मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। जानवरों के खाने योग्य अमानक स्तर का गरीब इंसानों को चावल बांटा गया था। जिसके बाद मध्यप्रदेश में गरमाई सियासत के बीच कई अधिकारियों समेत 19 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। मामला EOW में भी पहुंचा और 16 करोड़ रुपए की धांधली के सबूत मिले। जांच के बाद सरकार ने नागरिक आपूर्ति निगम के दो जिला प्रबंधकों और चार गुणवत्ता निरीक्षकों को नौकरी से टर्मिनेट कर दिया है।

इस तरह उजागर हुआ था यह मामला

इस तरह उजागर हुआ था यह मामला

करीब दो साल पहले कोरोनाकाल के वक्त एमपी के मंडला और बालाघाट जिले में 30 जुलाई से 2 अगस्त के बीच गरीबों को वितरित चावल के सेम्पल लिए गए थे। मंडला और बालाघाट जिले के 31 डिपों और 1 राशन दुकान से केन्द्रीय टीम ने सेम्पल इकटठा किए थे। जो जिनका मानक भेड़ बकरियों को खिलाए जाने वाले आहार के बराबर निकला था। जांच दल की रिपोर्ट के बाद मप्र सरकार हरकत में आई फिर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबों को बंटने वाले राशन की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई।

EOW को सौंपी गई थी जांच की जिम्मेदारी

EOW को सौंपी गई थी जांच की जिम्मेदारी

केन्द्रीय जांच दल की रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार ने जांच की जिम्मेदारी EOW को सौंपी। जिसके बाद अधिकारी-कर्मचारी और राइस मिलर्स के 19 अधिकारियों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की गई। पूरे राज्य में जब गोदामों की जांच शुरू हुई तो धांधलियों की बाढ़ आ गई। जांच में लगभग 16 करोड़ का गड़बड़ घोटाला उजागर हुआ था। बताया गया कि घटिया चावल वितरित कर पूरे प्रदेश में लगभग शासन को लगभग 700 करो़ड़ रुपये की क्षति पहुंचाई गई । इसी बीच राजनैतिक दबाव के चलते राईस मिलर्स ने अमानक स्तर जो चावल सप्लाई किया था, उसे बदलकर मानक स्तर का चावल गोदामों में डंप किया गया।

इन अधिकारियों कर्मचारियों गई नौकरी

इन अधिकारियों कर्मचारियों गई नौकरी

इस मामले को लेकर राजधानी भोपाल से दिल्ली तक बबाल मचा था। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार पर मिलीभगत के आरोप लगाए थे। अब दो साल बाद पूरे प्रकरण में जुटाए गए सबूत और बयानों के आधार नागरिक आपूर्ति निगम के दो जिला प्रबंधक और चार गुणवत्ता निरीक्षक को सबसे ज्यादा दोषी ठहराया गया हैं। सरकार ने भोपाल के प्रबंधक संचालक तरुण पिथोडे, प्रभारी जिला प्रबंधक बालाघाट आरके सोनी, प्रभारी प्रबंधक मंडला मनोज श्रीवास्तव, गुणवत्ता मिश्रा मंडला, राकेश सेन, नागेश उपाध्याय और मुकेश कनेरिया को नौकरी से टर्मिनेट कर दिया गया हैं।

कमलनाथ ने बताया था अपराधिक कृत्य

इस घोटले के बाद मप्र में नेताप्रतिपक्ष के तौर कमलनाथ ने सरकार को भी घेरा था। केंद्रीय जांच रिपोर्ट के आधार पर इसे अपराधिक कृत्य करार दिया था। इस मामले पर विधानसभा से लेकर सड़क तक सियासत गरमाई और सत्ता पक्ष आरोपों का जबाब देती रही। पूर्व केबिनेट मंत्री तरुण भनोत का कहना है कि जिन अफसरों को नौकरी से बर्खास्त किया गया, यह कार्रवाई काफी पहले हो जाना चाहिए था। अभी भी कई ऐसे लोग से है जिन्हें बीजेपी सरकार ने बचाने दो साल का भरपूर वक्त लिया।

चावल बनाने मिलर्स को दी जाती है धान

चावल बनाने मिलर्स को दी जाती है धान

मध्यप्रदेश में पीडीएस सिस्टम के जरिए बांटे गए घटिया चावल घोटाले की जड़े उन जगहों पर मिली, जहां से चावल बनाने की शुरुआत होती है। किसान संगठनों से जुड़े जबलपुर के राघवेन्द्र पटेल बताते है कि चावल बनाने के लिए सरकार मिलर्स को हायर करती हैं। अनुबंध के तहत मिलर्स को धान से चावल निकालने के बाद 67 फीसदी चावल वापस सरकारी गोदामों तक पहुंचाना होता हैं। जहां से पीडीएस सिस्टम के तहत यही चावल राशन दुकानों तक हितग्राहियों को वितरित करने के लिए पहुंचता हैं। राघवेन्द्र बताते है कि अधिकारियों और राइस मिलर्स की सांठगांठ का यह नतीजा है। मिलिंग से पहले ही धान को दूसरे राज्यों में बेचने जुगाड़ कर लिया जाता है। फिर बिहार-यूपी जैसे राज्यों से घटिया चावल मंगवाकर सरकारी गोदाम में जमा करने का काला कारनामा किया जाता है।

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