Local Election: मेयर की चेयर के लिए सोशल मीडिया पर दावेदारों की बाढ़, कौन करेगा चुनाव का संचालन?

नगरीय निकाय चुनाव प्रक्रिया लगातार रफ्तार पकड़ती जा रही है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने में कुछ ही दिन शेष हैं। पार्टी से टिकट मिलने में अभी समय लग सकता है ऐसे में सभी दावेदार अपनी पूरी तैयारी के साथ सोशल मीडिया में देशभक

जबलपुर, 06 जून: नगरीय निकाय चुनाव के ऐलान के साथ ही हर गली हर मोहल्ले में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त बन रही है। जून के महीने में जहां सूरज अपने सातों घोड़ों के रथ पर सवार होकर जहां आग बरसा रहे हैं, तो वहीं पार्षद पद के दावेदार तपती धूप में भी टिकट की चाह में अपने नेता के दरबार से लेकर मंदिर-मजारों पर मन्नतें करते नजर आ रहे हैं। बीते नगरीय निकाय चुनाव से तुलना की जाए तो इस बार कोरोना के असर को कारण कहें या फिर मौसम की निर्दयता को। मौजूदा वक्त में गली चौराहे के नुक्कड़ों पर चलने वाली चुनावी चर्चा में जहां कमी देखी जा रही है, वहीं सोशल मीडिया पर पार्षद पद के दावेदार और उनके समर्थक जमकर दावेदारी पेश कर रहे हैं।

या तो खुद या फिर समर्थकों के जरिए करा रहे प्रचार

या तो खुद या फिर समर्थकों के जरिए करा रहे प्रचार

नगरीय निकाय चुनाव प्रक्रिया लगातार रफ्तार पकड़ती जा रही है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने में कुछ ही दिन शेष हैं। पार्टी से टिकट मिलने में अभी समय लग सकता है ऐसे में सभी दावेदार अपनी पूरी तैयारी के साथ सोशल मीडिया में देशभक्ति, जनसेवा और क्रांतिकारी स्लोगन्स के साथ सक्रिय हैं। न केवल अपनी आईडी, बल्कि अपने समर्थकों, दोस्तों और रिश्तेदारों के जरिए भी ये दावेदार माहौल खींचने में जुटे हुए हैं। इस बीच कमेंट बॉक्स के जरिए आम लोग भी दावेदारों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। इस बीच मानों ऐसा लग रहा है कि पूरा चुनाव सोशल मीडिया पर ही हो जायेगा। दलीय नेता हो या फिर निर्दलीय सबकों चुनाव लड़ने का भूत सवार है। लोकल लेवल से लेकर राजधानी भोपाल और दिल्ली तक कई दावेदार दौड़ लगा रहे है कि कम से कम इस बार पार्टी उन पर टिकिट की कृपा बरसा दें।

सब की नजर मेयर की चेयर पर, तो किसके जिम्मे होगा चुनाव संचालन?

सब की नजर मेयर की चेयर पर, तो किसके जिम्मे होगा चुनाव संचालन?

बात यदि बीजेपी की हो तो, यहां ज्यादातर बड़े नेता महापौर के पद पर नजर गड़ाए बैठे हैं। चिकित्सा और समाजसेवा के जरिए हर चुनाव में दावेदारी करने वाले एक प्रतिष्ठित चिकित्सक हों, पुराने शहर से पिछला चुनाव हार चुके पूर्व मंत्री हों या इनके जैसे खांटी भाजपाई सभी मेयर की चेयर में इंट्रेस्ट ले रहे हैं। चुनाव संचालन की जिम्मेदारी उठाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। इतना महत्वपूर्ण पद जो बीजेपी के प्रोटोकॉल के हिसाब काफी अहमियत रखता है। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जब यह लोकल इलेक्शन सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा हो, उस दौरान चुनाव संचालन की जिम्मेदारी कौन उठाए, इस पर न तो चर्चा हो रही है और न ही कोई इस माथापच्ची में पड़ने लालायित दिख रहा है।

कांग्रेसी दावेदार भी यहाँ-वहाँ चला रहे अपना पंजा

कांग्रेसी दावेदार भी यहाँ-वहाँ चला रहे अपना पंजा

जबलपुर में कांग्रेस इस बार खुदकिस्मत है कि जबलपुर की 8 विधानसभा सीटों में 4 सीट पर उसका दबदबा है। तीन सीट उत्तरमध्य, पश्चिम और पूर्व विधानसभा तो नगर निगम सीमा में पूरी तरह आती है, चौथी बरगी विधानसभा में भी नगर निगम के कई वार्ड कवर होते है। कई गुटों में दिखाई देने वाली कांग्रेस के कई नेता महापौर का चुनाव लड़ना चाह रहे है। वक्त की नजाकत को देखते हुए लोकल लेवल पर उन्हें लग रहा है, कि अबकी बार कांग्रेस की सरकार। सबसे बड़ी मुश्किल अघोषित तौर पर पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष का नाम सामने आना। इससे कई दावेदारों के अरमानों पर अभी से पानी फिरता नजर आ रहा है। फिर उन दावेदारों ने टिकिट की जंग में अभी अपनी हार नहीं मानी। उन्हें लग रहा है कि भाजपा की तरह हो सकता है, पार्टी के दिग्गज नेता उनके पक्ष में कोई चमत्कारिक फैसला लें। वार्डवार जो कार्यकर्ता पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को जिताने से लेकर अभी तक उनकी आराधना करते रहे, वह आरक्षण के हिसाब से खुद या फिर अपनी गृह लक्ष्मी के लिए पार्षद टिकिट की जुगत लगा रहे है।

वक्त है बदलाव का

वक्त है बदलाव का

इससे पहले साल 2015 की शुरूआत में चुनाव हुए थे। उस समय आम पब्लिक इतनी ज्यादा सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थी। यूँ कहे कि इंटरनेट की स्पीड के हिसाब से ही मोबाइल की बटने चटर-पटर होती थी। लेकिन अब स्पीड भले ही 4G की है, लेकिन कई लोगों के हाथ 5G वर्जन के हेंडसेट है। लिहाजा फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर से लेकर मोहल्ले और सोसायटी के वाट्सएप ग्रुपों में चुनावी चौपाल सजना शुरू हो चुकी है।

आम के मौसम में सरगर्मी से जुटी है आम आदमी पार्टी

आम के मौसम में सरगर्मी से जुटी है आम आदमी पार्टी

नगर सत्ता की इस बार की जंग फलों के राजा आम के मौसम में हो रही है। जनता तो इस बात से भी खुश है क्योंकि उसे आम खाने से मतलब है पेड़ गिनने की उधेड़बुन में कौन पड़े। लेकिन इस बार चुनाव के मैदान में एक पार्टी भी जमकर ताल ठोंकने में लगी हुई है। वह है मैंगो मेन यानि आम आदमी पार्टी, पार्टी के लोकसभा अध्यक्ष जो खुद महापौर पद की दावेदारी कर रहे हैं। इस बार युवाओं को पार्टी में जोड़ने लगातार मेहनत कर रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए ही उन्होंने इच्छुक युवाओं से पार्टी में जुड़ने के लिए फॉर्म भरवाने वायरल कर रखा है। दावा यह है कि फॉर्म देखकर ही ये पार्षद उम्मीदवार डिक्लेयर करेंगे। पार्टी की उस खबर ने भी हडकंप मचा रखा है, जिसमें दावा किया गया कि भाजपा से एक पूर्व मंत्री को यदि पार्टी ने टिकिट नहीं दी, तो वह पाला बदलकर आम आदमी पार्टी का दामन थाम लेंगे। 'आप' की झाड़ू के साथ महापौर का चुनाव लड़ने मैदान में कूदेंगे।

‘मुखबिर कहो या हरीराम नाई’ ट्रेनिंग के लिए भी वैकेंसी

‘मुखबिर कहो या हरीराम नाई’ ट्रेनिंग के लिए भी वैकेंसी

इस सब के बीच दावेदारों के खेमों में हरीराम नाई की ट्रेनिंग के लिए भी वैकेंसी खुली हुई है। इसके लिए अर्हता यही है कि भैया की हर दावेदार के बीच उठक-बैठक होती हो। ताकि विपक्षी या पक्षी कोई भी रकीब हो उसके अंदरखाने की रणनीति का पता लगाया जा सके। टिकट वितरण के साथ ही ऐसे जग्गा जासूसों का काम बढ़ने वाला जो है।

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