Jabalpur News: बारूद को ट्रे में रखते वक्त हुआ था ब्लास्ट, खमरिया फैक्टरी हादसे में बोर्ड ऑफ़ इंक्वायरी आर्डर

ऑर्डिनेंस खमरिया फैक्टरी में हुए ब्लास्ट के बाद प्रबंधन सवालों के घेरे में हैं।एरियल बम के बैच तैयार किए जा रहे थे। जिसमें बारूद को पिघलाकर उसका मिश्रण भरा जा रहा था। तभी अचानक ट्रे में बारूद रखते वक्त ब्लास्ट हो गया।

जबलपुर, 30 सितंबर: ऑर्डिनेंस खमरिया फैक्टरी में हुए ब्लास्ट के बाद प्रबंधन सवालों के घेरे में हैं। कर्मचारी संगठनों ने फैक्टरी प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए है, जो हादसे की बड़ी वजह बने। आपको बता दें कि एरियल बमों की फिलिंग के दौरान पिघलाए जा रहे बारूद में अचानक विस्फोट हुआ था। जिसमें सेक्शन में काम कर रहे 6 कर्मचारी बुरी तरह झुलस गए थे। बुरी तरह गंभीर एक कर्मचारी को एयर एंबुलेंस से इलाज के लिए मुंबई ले जाया गया है।

बारूद को ट्रे में रखते वक्त हुआ था हादसा

बारूद को ट्रे में रखते वक्त हुआ था हादसा

गुरूवार को रोज की तरह फैक्टरी के F-6 सेक्शन बिल्डिंग नंबर 637 में कमर्चारी काम कर रहे थे। जहां एरियल बम के बैच तैयार किए जा रहे थे। जिसमें बारूद को पिघलाकर उसका मिश्रण भरा जा रहा था। तभी अचानक ट्रे में बारूद रखते वक्त ब्लास्ट हो गया। वहां मौजूद कर्मचारियों को संभलने का जरा भी मौका नहीं मिला और वह बुरी तरह झुलस गए।

एयर एंबुलेंस से मुंबई भेजा गया गंभीर घायल कमर्चारी

एयर एंबुलेंस से मुंबई भेजा गया गंभीर घायल कमर्चारी

ब्लास्ट की वजह से लगी आग की लपटों में 6 कर्मचारी झुलस गए थे। जिसमें नंदकिशोर सोनी नाम का एक कर्मचारी बेहद गंभीर है। जिसे शुक्रवार की सुबह एयर एंबुलेंस की मदद से इलाज के लिए मुंबई भेजा गया। अन्य एक कर्मचारी ओएफके अस्पताल में भर्ती है, जबकि बाकी चार घायलों का शहर के निजी अस्पताल इलाज जारी हैं। सभी के परिजन इस हादसे से बेहद खफा है। उनका कहना है कि फैक्टरी प्रबंधन कर्मचारियों की सुरक्षा ताक पर रखकर काम करवा रहा है।

डेंजर बिल्डिंग में दिव्यांगों की तैनाती

डेंजर बिल्डिंग में दिव्यांगों की तैनाती

देश आयुध निर्माणियों में से जबलपुर की खमरिया फैक्टरी का अलग स्थान है। यहां का उत्पादन विदेशों में भी सप्लाई हो रहा है। लेकिन कर्मचारी संगठनों ने लगातार होते ऐसे हादसों को लेकर फैक्टरी प्रशासन को जिम्मेदार माना है। श्रमिक नेताओं के आरोप है कि सुरक्षा मापदंडों को दरकिनार कर कर्मचारियों से उत्पादन कार्य कराया जा रहा है। मशीनरी सिस्टम की ना तो देखरेख होती है और ना ही प्लांट में तैनात कर्मचारियों की स्थिति देखी जाती है। आलम यह है कि ऐसी रिस्क वाली जगहों पर दिव्यांग कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।

आईएनडीडब्ल्यूएफ के आरोप

आईएनडीडब्ल्यूएफ के आरोप

आईएनडीडब्ल्यूएफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अरुण दुबे बोले कि फैक्टरी में अनुभव और जरुरत को नजरअंदाज किया जा रहा है। नॉन फिलिंग कर्मियों को फिलिंग सेक्शन में जबरदस्ती तैनात किया गया है। फिलिंग में हाई एक्सप्लोजिव वर्क होता है। जहां फायर सेफ्टी के साथ एंबुलेंस की तैनाती जरुरी है। लेकिन प्रबंधन की मनमानी के चलते एंबुलेंस मेन बिल्डिंग में खड़ी रहती है। फिलिंग सेक्शन में सुरक्षा के लिए ऐसे प्राइवेट कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिनमें हादसे से निपटने के एक भी गुण नहीं है।

बोर्ड ऑफ़ इन्क्वायरी के निर्देश

बोर्ड ऑफ़ इन्क्वायरी के निर्देश

इधर हादसे के बाद जबलपुर सांसद राकेश सिंह ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने केन्द्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट को भी इसकी जानकारी दी। जिसके बाद केन्द्रीय मंत्री ने बोर्ड ऑफ़ इन्क्वायरी का गठन कर विस्तृत जांच के निर्देश दिए। वही श्रमिक संगठनों ने फैक्टरी प्रशासन के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज करने मांग भी उठाई है।

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