जबलपुर में घोड़ों की रहस्यमयी मौत: 5 दिन में 8 अश्वों की जान गई, वजह- ग्लैंडर्स बीमारी या कोई घोर लापरवाही?
Jabalpur Horse Death: मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से पशु प्रेमियों को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां पर महज पांच दिन में आठ घोड़ों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वजह-ग्लैंडर्स नामक बैक्टीरियल बीमारी या फिर लापरवाही और अनियमितता की आशंका है? फिलहाल जांच जारी है।
वनइंडिया हिंदी से बातचीत में जबलपुर जिला कलेक्टर आईएएस दीपक सक्सेना ने बताया कि हैदराबाद रेस कोर्स में काम आने वाले घोड़ों को लेकर विवाद होने पर एक व्यक्ति को इनको जबलपुर की तहसील पनागा के गांव रैपुरा में लोकर फॉर्म हाउस में रखे हुए था। मेनका गांधी की सूचना पर जबलपुर जिला प्रशासन की टीम फॉर्म हाउस पहुंची थी।

दरअसल, हैदराबाद से सड़क मार्ग के जरिए जबलपुर 57 घोड़े लाए गए थे, जिनमें से 13 मई 2025 तक आठ की मौत हो चुकी है। ये घोड़े थरौब्रेड, काठियावाड़ी और मारवाड़ी प्रतिष्ठित नस्लों से संबंधित थे। इन्हें 29 अप्रैल से 5 मई के बीच रैपुरा गांव स्थित एक निजी अस्तबल में पहुंचाया गया, जहां उन्हें कथित तौर पर बेहद खराब हालात में रखा गया।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि स्थानांतरण के दौरान आवश्यक मेडिकल क्लीयरेंस और अंतर्राज्यीय परमिट नहीं लिया गया, जिससे इन पशुओं की सेहत की उचित निगरानी नहीं हो सकी। घोड़ों की रहस्यमयी मौतों के पीछे 'ग्लैंडर्स' नामक घातक बैक्टीरियल बीमारी की भी आशंका जताई जा रही है।
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भोपाल से भेजी गई तीन सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग टीम
जबलपुर जिला कलेक्टर दीपक सक्सेना ने बताया कि पशुपालन विभाग ने सभी घोड़ों के रक्त सैंपल हिसार स्थित नेशनल इक्वाइन रिसर्च सेंटर भेजे हैं। अब तक 51 घोड़ों की रिपोर्ट नकारात्मक आई है, जबकि बाकी रिपोर्टें अभी लंबित हैं। घटनास्थल पर 17 मई को भोपाल से भेजी गई तीन सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है।
रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात
जबलरपुर जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात की है, जबकि जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि ट्रांसपोर्ट में उपयोग हुए दस्तावेजों और परमिशनों की जांच कराई जाए। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही गई है।
PETA ने जताई गहरी चिंता
उधर, पशु अधिकारों की संस्था PETA ने इस मामले पर गहरी चिंता जताते हुए पारदर्शी जांच और कड़े पशु संरक्षण कानूनों की मांग की है। जबलपुर के कई स्थानीय पशु संरक्षण संगठनों ने संकेत दिए हैं कि वे इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर सकते हैं। अगर याचिका दायर होती है, तो इससे पशु कल्याण नीतियों की समीक्षा का रास्ता खुल सकता है।
मीडिया की खबर में एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह सिर्फ पशु क्रूरता का मामला नहीं, बल्कि इसके पीछे एक संगठित अनियमितता का संदेह भी है। ट्रांसपोर्टेशन, क्वारंटीन, और देखभाल के नाम पर बड़ी लापरवाहियां उजागर हो रही हैं।
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