धरती का भगवान या फ्रॉड मैन? आयुष्मान योजना स्कैम का आरोपी डॉ. अश्वनी पाठक और पत्नी गिरफ्तार
जबलपुर, 28 अगस्त: स्वास्थ्य से जुड़ी केंद्र सकरार की सबसे महत्त्वकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के नाम एमपी के जबलपुर में फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ था। शहर के सेन्ट्रल इंडिया किडनी हॉस्पिटल के संचालक पति-पत्नी डॉ. अश्वनी पाठक और दुहिता पाठक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इन पर बड़े स्तर पर सरकारी योजना के जरिए करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने का आरोप हैं। आरोपों में चार सौ बीस दोनों पति-पत्नी ही आयुष्मान योजना के फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड निकले। इनके गिरोह में शामिल अन्य लोगों का भी पुलिस पता कर रही है।

फरार होने के पहले दबोंचा गया डॉक्टर और उसकी पत्नी
सरकारी तंत्र और योजनाओं को चुनौती देने वाले एमपी के जबलपुर के यही वो पति-पत्नी है, जिन पर कोविडकाल के बाद करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने के आरोप हैं। दावा किया जा रहा है कि सेन्ट्रल इंडिया किडनी हॉस्पिटल के मालिक दुहिता पाठक और उनके पति डॉ. अश्वनी पाठक ने चिकित्सा जगत में फर्जीवाड़े के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। अवैध कमाई के जरिए अपनी तिजोरी भरने इन लोगों ने फर्जी मरीजों का धंधा शुरू कर दिया। कलई खुलने के बाद जैसे ही होटल में चल रही अवैध हॉस्पिटल सील हुई और मूल हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन रद्द हुआ, तो ये शहर से भागने की तैयारी में थे। लेकिन आयुष्मान योजना स्कैम का भंडाफोड़ करने वाली जबलपुर पुलिस ने, इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

बेटे की होटल को बनाया फर्जीवाड़े का अड्डा
आरोपी डॉ. अश्वनी पाठक ने अपने सेन्ट्रल इंडिया किडनी हॉस्पिटल के बाजू से अपने बेटे के लिए वेगा होटल बनाई थी। कोविड के वक्त होटल का धंधा बंद हुआ तो, उस वक्त सरकार की तरफ से होटल में कोरोना मरीजों को रखने की छूट मिली। जिसके सहारे पाठक दंपत्ति ने आयुष्मान भारत योजना के कार्डधारी मरीजों को सोने की चिड़िया समझ लिया। करीब दो सालों से अस्पताल की शक्ल में तब्दील होटल में फर्जी मरीजों को भर्ती कर अंधाधुंध अवैध कमाई की जा रही थी।

ट्रीटमेंट चार्ट में बेहोश मिले कई मरीज
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा पुलिस को जांच प्रतिवेदन सौंपा गया। जिसके मुताबिक आरोपी डॉक्टर के ठिकाने पर आयुष्मान कार्डधारी फर्जी मरीजों का इलाज हो रहा था। जांच में पता चला कि सिर दर्द ,बदन दर्द वाले मरीजों को ट्रीटमेंट चार्ट में बेहोश होना दर्शा दिया जाता था। बीमारी भी बेहद गंभीर बताई जाती थी। ताकि आयुष्मान योजना के तहत मरीज के दाखिले का अप्रूवल मिल सकें। कई फर्जी मरीज ऐसे मिले जिनको सिर्फ छींक आ रही थी और जरुरत न होते हुए भी उनको जबरदस्ती आईव्ही फ्लूड चढ़ा दी गई। एक आईव्ही फ्लूड की जगह ट्रीटमेंट फ़ाइल में 5-6 आईव्ही फ्लूड दर्शाई गई। जांच में कई और फर्जी मरीजों की इसी तरह की कहानी सामने आई है।

पैथालाजी रिपोर्ट और डॉक्टर विजिट में भी फर्जीवाड़ा
फर्जीवाड़े के आरोपों की लंबी फेहरिस्त है। होटल में चल रहे अस्पताल में भर्ती होने वाले फ्रॉड मरीजों के नाम, कई बीमारियों की जांच भी होती थी। मौके से कई मरीजों की फ़ाइल में लगी पैथालाजी रिपोर्ट की पड़ताल हुई ,तो उसमें भी फर्जीवाड़े का ही खुलासा हुआ। शहर के अलग-अलग लेब डायरेक्टर और कंसल्टिंग पैथालाजिस्ट के डिजिटल साइन वाली रिपोर्ट शामिल थी। जिनके डिजिटल साइन थे, उन्होंने रिपोर्ट को फर्जी ही करार दिया। ट्रीटमेंट फ़ाइल में हर रोज कई डॉक्टर की विजिट अंकित रहती थी, जब संबंधित डॉक्टर से पूछताछ हुई तो उन्होंने किसी भी विजिट से इंकार किया।

आरोपियों के खिलाफ कई धाराओं के तहत FIR
सेन्ट्रल इंडिया किडनी हॉस्पिटल के मालिक डॉ. अश्विनी पाठक और उनकी पत्नी दुहिता पाठक के खिलाफ कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस गिरफ्त में आने के बाद दोनों से बारीकी से पूछताछ की जा रही हैं। इनके इस गोरखधंधे में और कौन कौन लोग शामिल रहे, इस बारे में पता किया जा रहा है। इसके अलावा एमपी या दूसरे राज्यों से अब तक इस हॉस्पिटल में कितने लोगों को बतौर फर्जी मरीज बनाकर भर्ती रखा गया, इसका रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। जबलपुर एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा का कहना है कि यह फर्जीवाड़ा बड़े पैमाने पर चल रहा था, आगे की जांच के बाद कई और बड़े खुलासे हो सकते है।












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